Fwd: jaigurudev news-27.11.2010

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Dr. VIKRAM DEV SHARMA

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Dec 2, 2010, 12:21:53 PM12/2/10
to gandhian...@googlegroups.com, varun...@gmail.com, divyayog...@gmail.com, gandhia...@live.com, adityan...@gmail.com, anni...@gmail.com, abr...@gmail.com, ramlakhanv...@yahoo.co.in, kcs...@rediffmail.com, vksi...@yahoo.co.in, ashwin...@gmail.com, dku...@ncaer.org, ajme...@yahoo.com, shashi...@rediffmail.com, hcpuro...@rediffmail.com, smile_al...@rediffmail.com, brije...@yahoo.co.in, mamg...@gmail.com, skmish...@rediffmail.com, pnat...@yahoo.co.in, rno...@gmail.com
                                       II JAIGURUDEV II, II NAMO BUDHAYA II,  II OM VANDE MAATRAM II

 
Sincerely Yours:-
DR.V.D.SHARMA "Krantiveer"(Gandhian Thinker)
Associate Professor in MBA(Bus.Economics)
Faculty of Management Studies
VBS Purvanchal University Jaunpur (U.P.)
Mob.991983533,E-mail: e-mail:drv...@gmail.com


---------- Forwarded message ----------
From: Baba Jaigurudev <babajai...@gmail.com>
Date: 2010/11/26
Subject: jaigurudev news-27.11.2010
To: Jaigurudevworld-Mathura <jaigurudevw...@googlegroups.com>


जयगुरूदेव समाचार
मथुरा 27 नवम्बर 2010
       परम पूज्य बाबा जयगुरूदेव जी महाराज आश्रम पर हैं। नामयोग साधना मन्दिर
पर वार्षिक पावन भण्डारे की तैयारियां बराबर तेजी से जारी हैं। मन्दिर की
सजावट का काम इस बार सेवादार कर रहे हैं। मन्दिर सजने लगा है। पूज्य गुरू
महाराज सभी तैयारियांे को स्वयं देखते हैं। विभिन्न जिलों व प्रान्तों से
सेवादारों का आना आरम्भ हो गया है। गुरू महाराज प्रातः सेवा के लिए स्वयं
मैदान में उस्थित रहते हैं। सुबह-शाम आश्रम में छोटे मंच के सामने
सामूहिक प्रार्थना, ध्यान-भजन का समय निश्चित है जिसमें सभी सत्संगी-
प्रेमी बराबर बैठते हैं।
भण्डारा कार्यक्रम 13 से 17 दिसम्बर 2010 को होगा।
सत्संग-परम पूज्य बाबा जयगुरूदेव जी महाराज-1999 (भाग-16)
       यह तो अपने अन्दर कर्मानुसार लोगों ने इस लोक में जन्म पाया है और उसके
अनुसार कर्म ही के अनुसार आप लोग भोगंेगे। इसके लिए आपको स्वतंत्र अधिकार
दिया गया है कि शरीर पाने के बाद जो कर्म आपने किया उसका भोग तो आपको
भोगना ही होगा। लेकिन आगे भविष्य में नवीन कर्म पैदा न कर लीजिए ताकि भोग
न भोगना पड़े। इसलिए यह शरीर साधन अवस्था के लिए मिला था। साधन करके
परमात्मा के पास पहुँचने के लिए मिला था। कर्म तो आप भोगेंगे ही। वह तो
आपको प्रारब्ध के अनुसार भोगना ही पड़ेगा।
       राजगद्दी पर बैठो, धन, दौलत, कुटुम्ब परिवार में रहो और बहुत से ऐश आराम
आप उठा लीजिए। मुल्क मंे सारे आप की इज्जत करें। सारा संसार आपका सम्मान
करे। यह तो पुरातन कर्मानुसार होगा। अब आपने नवीन कर्म क्या किया जिसकी
वजह से पार उतर जायें। नवीन कर्म आपने नहीं किया और नवीन कर्म की जगह पर
हम पाप करते रहे। जो अभी आपको दृष्टान्त बताया ऐसे अनेकों लोगों की
मिसालें मौजूद हैं। ऐसे कितने जा रहे हैं और उनसे हिसाब हो रह हैं। और
कितने नर्क भेज दिए जाते हैं जो कि फिर लौटकर नहीं आते हैं वह तो मैंने
आपको अपना अनुभव बताया। अब ऐसे ऐसे अनुभव हैं जो खोला नहीं जाता। वह
इशारों में ही कह दिया जाता है।
       बहुत से लोगों के जो धर्म उपदेश के अगुवा हैं जो समाजों को चलाने वाले
हैं समाजों को बरबाद करते हैं उनकी तो यह हाल होती है तो जरा विचार करो
कि तुम्हारा क्या होगा?  इन बेचारों का तो यह हुआ अब तुम्हारा ? तुम्हारी
तो बड़ी दुर्दशा है। क्योंकि तुमने तो कुछ किया नहीं। उसने तो बहुत कुछ
किया था।
       जब उसने सब कुछ किया तो उसका यह हाल हुआ, उसका हिसाब हुआ और ऐसी जगह पर
उसको वासा दिया गया। तुम बेचारों ने क्या किया ? तुमने तो कुछ किया नहीं,
तुमको क्या मिलेगा? अपने कर्मानुसार कुछ तुमने पहले शुभ कर्म किया उसका
फल तो तुम भोग रह हो। आगे नवीन शुभकर्म करके उसका फल तैयार करो ताकि ऐसा
न हो जाए कि हमको कुफल भोगना पड़ जाए। हमको नीच योनियों में जा करके नरक
भोगना पड़ जाए।-(क्रमशः)

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