f5QsV *Jeevani Dr. Bhimrao Ambedkar: जीवनी डॉ. भीमराव अम्बेडकर [PDF/EPub] Book by Shubham Gupta

0 views
Skip to first unread message

tellesb...@gmail.com

unread,
Nov 16, 2021, 2:27:44 AM11/16/21
to fsv32t...@googlegroups.com
If5QsV9NtA - Download and read Shubham Gupta's book Jeevani Dr. Bhimrao Ambedkar: जीवनी डॉ. भीमराव अम्बेडकर in PDF, EPub, Mobi, Kindle online. Free book Jeevani Dr. Bhimrao Ambedkar: जीवनी डॉ. भीमराव अम्बेडकर by Shubham Gupta.



Click to Continue


Synopsis: डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने अपने जीवन में एक सच्चे देशभक्त, नेता, प्रोफेसर, वकील, राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता, अर्थशास्त्री, साहित्यकार आदि की भूमिका बखूबी निभाई है, लेकिन यह कहा जाए तो गलत न होगा कि वे एक पिता और पति की भूमिका निभाने में कहीं न कहीं असफल रहे। उनके पूरे जीवनकाल को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि जितना समय उन्होंने अपने समाज व देश के प्रति न्यौछावर कर दिया शायद उतना समय वे अपने परिवार को नहीं दे पाए। संभव है कि अगर वो ऐसा करते तो शायद अपने लक्ष्य को पूरा करने में कभी कामयाब नहीं हो पाते। इसलिए उन्होंने अपने समाज को ही अपना घर-परिवार मान लिया और उनकी सेवा में अपना समस्त जीवन झोंक दिया। अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने कभी भी अपनी निजी समस्याओं को अपने काम के आड़े नहीं आने दिया। विषम-से-विषम परिस्थितियों से भी वह कभी भी घबराए नहीं बल्कि हर परिस्थिति का उन्होंने डटकर मुकाबला किया।बाबा साहब अम्बेडकर हमेशा अस्पृश्यों और अन्य निचली जातियों की समानता के लिए लड़े और सफलता प्राप्त की। बचपन की कठिनाइयों और गरीबी के बावजूद डॉ. बी.आर. अम्बेडकर अपने प्रयासों और समर्पण के साथ अपनी पीढ़ी को शिक्षित बनाने के लिए आगे बढ़ते रहे। उन्होंने जीवन भर न्याय, जाति भेदभाव और असमानता के उन्मूलन के लिए काम किया। उन्होंने दृढ़ता से न्याय और सामाजिक समानता में विश्वास किया और यह सुनिश्चित किया कि संविधान में धर्म और जाति के आधार पर कोई भेदभाव ना हो। डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर के अनुसार बौद्ध धर्म के द्वारा मनुष्य अपनी आंतरिक क्षमता को प्रशिक्षित करके, उसे सही कार्यों में लगा सकता है। उनका विश्वास इस बात पर आधारित था कि ये धार्मिक परिवर्तन देश के तथाकथित ‘निचले वर्ग’ की सामाजिक स्थिति में सुधार करने में सहायता प्रदान करेंगे। सामाजिक भेदभाव व विषमता का पग-पग पर सामना करते हुए अन्त तक वे झुके नहीं। अपने अध्ययन और परिश्रम के बल पर उन्होंने अछूतों को नया जीवन व सम्मान दिया।इस पुस्तक  में अम्बेडकर सा’ब की जीवन यात्रा को जानने की कोशिश की गई है। साथ ही उनके जीवन की कुछ खास घटनाओं को जानने-परखने का काम किया गया है जिससे पाठकों को उनके जीवन के संघर्षों और अनुभवों को जानने का मौका मिलेगा। उम्मीद है, पाठक वृन्द इस पुस्तक से लाभान्वित हो सकेंगे।.
Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages