वफ़ा अगर रास न आए वो वफ़ा क्यूँ करें

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PRiTaM

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Sep 15, 2008, 4:38:20 AM9/15/08
to Feel Better
वफ़ा अगर रास न आए वो वफ़ा क्यूँ करें,
दुआ गर आस्मां तक न जाए हम दुआ क्यूँ करें.
उस दीवानी के ख्वाब दिन रात देखते हैं हम ,
नसीब में फ़क़त ख्वाब हैं , मिलने के चाह क्यूँ करें,
दिल की हर एक धड़कन उस को सदा देती है पल पल,
वो सुनी को उन्सुनी करदे तो हम इज़हार -ऐ -वफ़ा क्यूँ करें,
उसकी याद ज़िन्दगी भर यूँही मुझे,
बेहतर है भूल जाऊं "दोस्तों" ज़ख्म और गहरा क्यूँ करें....!!

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