[दुनिया भर की] फूल

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Duniya Bhar Ki

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Jul 27, 2008, 12:42:37 PM7/27/08
to ehindi...@googlegroups.com
[http://www.mpgovt.nic.in]
मैं भाता हूँ सबके मन
जब तक हूँ -
सुन्दर-सुरभित-सुखद-सुमन।
भगवान के चरणों में,
नेता, मंत्रियों के गले में,
तुम्हारे गुलदस्ते में,
उनके बालों में,
सबको लगता प्यारा
जब तक हूँ-
मैं शोभा मंङित रंगोआव।
मेरी-
सुन्दरता,
सौरभता,
कोमलता
हो जाती है जब
विगत विकार;
जानते हों फिर
क्या होता है मेरा?
फिर कोई नहीं
पूंछता मुझे,
जिस मिट्टी से
मैं बनता हूँ
फिर उसमें ही
मिल जाता हूँ ।

--
Posted By Duniya Bhar Ki to दुनिया भर की at 7/27/2008 09:32:00 AM
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