[दुनिया भर की] इस वार का बसंत

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Jan 31, 2009, 8:35:04 AM1/31/09
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साया-ए-गम लाया है इस वार का बसंत,
मौसम जुदाई का लाया है इस वार का बसंत।
इस वार भी होते जो तुम मेरे दिल के मेहमां,
तो 'बसंत-सा' लगता इस वार का बसंत।
इस वार तुम नहीं हों नज़दीक मेरे दिल के,
'पतझड़-सा' लग रहा है इस वार का बसंत।
फूल भी चुभते हैं मुझे कांटों की तरह,
तन्हाई में जो आया है इस वार का बसंत।
कड़बी-कड़बी लगती है कोयल की कुहूक,
खाने को दौड़ता है इस वार का बसंत।
लगता है ये टेसू हँसते हैं अपनी जुदाई पर,
मजाक प्यार का उडा़ रहा है इस वार का बसंत।
करूँ पार कैसे 'अकेला मैं' तुम्हारे बिना,
गम का समंदर लगता है इस वार का बसंत।
शरदातप भी रास न आई इस वार की,
फूल तो क्या कांटे भी न लाया इस वार का बसंत।
कैसे चलेगी किस्ती मेरी तुम्हारे बिना,
रेगिस्तान-सा लग रहा है इस वार का बसंत।

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Posted By दुनिया भर की to दुनिया भर की on 1/31/2009 05:22:00 AM
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