नागर जी के औपन्यासिक रचनाकाल की परिस्थितियाँ –
सामाजिक परिस्थिति
राजनीतिक परिस्थिति
साँस्कृतिक परिस्थिति
नागर जी ने प्रथम उपन्यास 'महाकाल' सन् 1942 में लिखा तथा सन् 1972 में
'मानस का हंस' उनकी अन्तिम प्रकाशित रचना के रूप में हमारे सामने आया।
अतः 1940 से 1972 तक की राजनीतिक, सामाजिक और साँस्कृतिक परिस्थितियों
का
अध्ययन तत्कालीन इतिहास के परिप्रेक्ष्य में ही किया जा सकता है।
Please see below file link for pdf: