[दुनिया भर की] बीमा है न पेन्शन है, जीवन भर का टेन्शन है

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Sep 4, 2008, 12:27:11 AM9/4/08
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सन्दर्भ - शिक्षक दिवस 5 सितम्बर
मध्यप्रदेश सरकार भले ही लाख दाबे करे कि इस प्रदेश की जनता खुशहाल है, प्रदेश में तरक्की हो रही है, जनता जनार्दन खासकर कर्मचारी सरकार से खुश हैं लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश के लगभग दो लाख सरकारी कर्मचारी आज भी अपने भविष्य को लेकर चिन्तित हैं। यह वह कर्मचारी हैं जो प्रदेश की विभिन्न पाठशालाओं में देश के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। अब आप ही अंदाजा लगाइए जिन 'सरकारी' ( ? ) कर्मचारियों का स्वयं का भविष्य सुरक्षित नहीं है वह किस तरह इस देश के भविष्य का निर्माण कर रहे होंगे? जी हॉ, हम बात कर जहे हैं प्रदेश के उन अध्यापकों, संविदा शिक्षकों, और गुरुजियों की जो स्वयं अपने भविष्य को लेकर भले ही चिन्तित हों लेकिन देश के भविष्य को संवारने में लगे हुए हैं। न्यूनतम वेतन और मानदेय पर कार्यरत इन अध्यापकों को भविष्य में न तो पेन्शन मिलने का प्रावधान है और न ही उनके जीवन पर किसी भी प्रकार का बीमा है। सरकार के अन्य कर्मचारियों की तरह न तो जीपीएफ की सुविधा है और न ही मेडीकल आदि की। कुल मिलाकर नौकरी के नाम पर जीवन भर का टेन्शन है। लगभग ढाई हजार से लेकर छह-सात हजार रुपये महिने की नौकरी करते यह अध्यापक अपने जीवन से निराश और भविष्य के प्रति चिंतित हैं। हालाकि यह अध्यापक भी वही कार्य कारते हैं जो इनके साथ रहकर शिक्षा विभाग के अन्य 'सरकारी कर्मचारी' करते हैं। अतः स्पष्ट है कि एक ही स्कूल में साथ-साथ समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को समान वेतन नहीं दिया जाकर अध्यापकों के साथ सौतेया व्यवहार किया जाता है। एक ही स्कूल में भांति-भांति के शिक्षकों की नियुक्तियां की गई हैं। हायर सेकण्डरी स्कूलों में व्याख्याता (वेतन पन्द्रह से बीस हजार) वरिष्ट अध्यापक (वेतन लगभग सात हजार) व संविदा शाला शिक्षक वर्ग - एक (वेतन चार हजार पांच सौ), मिडिल स्कूलों में उच्च श्रेणी शिक्षक (वेतन वारह से सोलह हजार), अध्यापाक (वेतन लगभग छह हजार), संविदा शाला शिक्षक वर्ग - दो (वेतन तीन हजार पांच सौ) प्राइमरी स्कूलों में सहायक शिक्षक (वेतन दस से पन्द्रह हजार) सहायक अध्यापक (वेतन लगभग चार हजार पांच सौ), संविदा शाला शिक्षक वर्ग - तीन एवं गुरुजी (वेतन दो हजार पांच सौ) कार्यरत हैं। उक्त सभी तरह के शिक्षक कार्य एक ही करते हैं परंतु वेतन अलग-अलग दिया जाता है, अर्थात 'समान कार्य के लिये समान वेतन' न दिया जाकर कर्मचारियों के एक बहुत बडे वर्ग के साथ भेद-भाव वरता जा रहा है। इतना ही नहीं जिन कर्मचारियों(व्याख्याता,उच्च श्रेणी शिक्षक व सहायक शिक्षक) को ज्यादा वेतन मिलता है उन्हे शासन द्वारा टी॰ए॰, डी॰ए॰, ग्रह भाडा भत्ता, मेडिकल, अर्जित अवकाश, पेन्शन, बीमा, आदि अन्य सुविधायें भी जा रही हैं परन्तु अध्यापाक संवर्ग, संविदा शाला शिक्षकों एवं गुरुजिओं को वेतन के अलावा किसी भी प्रकार की अन्य सुविधा नहीं दी जा रही है। और अब छटवा वेतनमान भी उन्ही कर्मचारियों को दिया जा रहा है जो ज्यादा वेतन ले रहे हैं। अध्यापक सम्बर्ग को छटवें वेतनमान का लाभ न दिया जाना कहां तक न्यायोचित है? पहले अध्यापक सम्बर्ग को अवकाश संबंधी सुविधायें अन्य कर्मचारियों के समान उपलब्ध थी, परन्तु शासन द्वारा राजपत्र के माध्यम से अध्यापक सम्बर्ग को दी जा रही उक्त सुविधायें भी समाप्त कर दी गई हैं। अध्यापाक संवर्ग, संविदा शाला शिक्षकों एवं गुरुजिओं के लिये तो यह शिक्षक दिवस 'काला दिवस' बनकर रह गया है।


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Posted By दुनिया भर की to दुनिया भर की on 9/03/2008 09:19:00 PM
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