[Aam Hindustani] राज ठाकरे का आन्दोलन

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Ashish

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May 5, 2008, 4:37:43 AM5/5/08
to ehindi...@googlegroups.com
आज कल राज ठाकरे और मुम्बई में "बाहरी लोग" चर्चा का आम विषय है।

राज के विचारों के बारे में लोगों की अलग अलग राय है। ये अलग बात है कि कई लोग राजनीतिक कारणों से राज के समर्थन में नहीं बोल पा रहे है। पर मुम्बई ही नहीं वरन देश के सभी महानगरों पर हर रोज़ लाखों नए लोगों के भार से कई तरह की समस्याएँ उत्पन्न हो रही है।
अगर हम कुछ समय पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित का बयान याद करें, तो उन्होंने भी दिल्ली की व्यवस्था पर बाहरी लोगों के बढ़ते भार पर चिंता व्यक्त की थी। ये अलग बात है कि राजनीतिक दबाव के चलते उन्हें अपना बयान वापस लेना पडा था, पर इससे समस्या की गंभीरता स्पष्ट होती है।

राज ठाकरे के आन्दोलन को राजनीती से प्रेरित माना जा रहा है। जो धीरे धीरे प्रान्तवाद में परिवर्तित होता जा रहा है। मेरे विचार से इस प्रश्न को राजनीतिक प्रश्न न मानते हुए इसके मूल कारण का विचार करना चाहिए। और मूल प्रश्न है "रोजगार" ।

उत्तर प्रदेश हो या बिहार या कोई भी अन्य प्रांत, किसी भी व्यक्ति के महानगर की और रुख करने का एकमात्र कारण केवल रोजगार है। छोटे शहरों या गावों में जब तक रोजगार उपलब्ध नही होगा तब तक लोगों का शहरों की और पलायन जारी रहेगा।
लेकिन सरकार, मीडिया और राजनीतिक दल बजाय मूल प्रश्न को सुलझाने के अपने अपने तरीकों से स्वार्थ सिद्ध करने में लगे है। गावों में रोजगार के अवसर उत्पन्न करने में पिछली सभी सरकारें असफल रही है, ऐसे में जरुरत है नए तरीके से सोचने की।
उत्तर प्रदेश के एक युवा सामाजिक कार्यकर्त्ता श्री भारत गांधी के विचारों को इस समय गंभीरता से लिया जाना चाहिए। श्री गांधी ने गहन अध्ययन करके votership की संकल्पना की है । जिसके अनुसार देश के प्रत्येक मतदाता को उनके मतदान के एवज में ३७५० रुपये दिए जाना चाहिए जिससे समाज के निचले स्तर तक पैसा पहुंचेगा और लोगों की खरीदने की क्षमता बढेगी। इस वोटर शिप को देने के लिए आवश्यक धन के लिए श्री गांधी की सलाह है कि सरकार वे सभी जनहित कार्यक्रम बंद कर दे जिसके द्वारा पैसा लोगों को बांटा जा रहा है। इससे ना केवल भ्रष्टाचार में कमी होगी वरन मतदान का प्रतिशत बढेगा, सीधे पैसा मिलाने से जनता का जीवन स्तर सुधरेगा, शहरों की और पलायन रुकेगा और भीक मँगाने, चोरी आदी अपराधों में भी कमी आयेगी । साथ ही मतदान आवश्यक होने से चुनाव में खर्च कम होगा। श्री गांधी के प्रस्ताव को www. votership.com पर देखा जा सकता ।

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Posted By Ashish to Aam Hindustani at 5/04/2008 11:51:00 PM

ftsbhub...@gmail.com

unread,
May 6, 2008, 1:02:33 PM5/6/08
to Hindi Sahitya Sabha
श्री आशीष जी,
गाँवों में औद्योगिकरण की बात सुनने में बहुत अच्छी लगती है। लेकिन आज की
परीस्थितियों में यह काफी तकलीफदायक एवं संकटों से घिरा option है। मेरे
दो कारखाने गांव में हैं। तीन शहरों में हैं। गांव में स्थानीय राजनीति ,
बिजली की आपूर्ति सम्बन्धी समस्यायें तो हैं हीं। इनके अलावा स्थानीय
राजनीति के चलते labour cost दोगुनी पड़ती है। आज मैं तीस वर्ष पुराना
उद्योगपति कभी किसी entreprenuer को गांव में उद्योग लगाने के लिये
प्रोत्साहित नहीं करूंगा ।
राज ठकरे के विषय में मेरा blog निम्नलिखित है।
http://kuldipgupta.blogspot.com/2008/02/raj-thakare-and-maharashtras-respect.html


On 5 मई, 13:37, Ashish <tambe.ash...@gmail.com> wrote:
> आज कल राज ठाकरे और मुम्बई में "बाहरी लोग" चर्चा का आम विषय है।राज के विचारों के
> बारे में लोगों की अलग अलग राय है। ये अलग बात है कि कई लोग राजनीतिक कारणों से राज
> के समर्थन में नहीं बोल पा रहे है। पर मुम्बई ही नहीं वरन देश के सभी महानगरों पर ह
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