श्री आशीष जी,
गाँवों में औद्योगिकरण की बात सुनने में बहुत अच्छी लगती है। लेकिन आज की
परीस्थितियों में यह काफी तकलीफदायक एवं संकटों से घिरा option है। मेरे
दो कारखाने गांव में हैं। तीन शहरों में हैं। गांव में स्थानीय राजनीति ,
बिजली की आपूर्ति सम्बन्धी समस्यायें तो हैं हीं। इनके अलावा स्थानीय
राजनीति के चलते labour cost दोगुनी पड़ती है। आज मैं तीस वर्ष पुराना
उद्योगपति कभी किसी entreprenuer को गांव में उद्योग लगाने के लिये
प्रोत्साहित नहीं करूंगा ।
राज ठकरे के विषय में मेरा blog निम्नलिखित है।
http://kuldipgupta.blogspot.com/2008/02/raj-thakare-and-maharashtras-respect.html
On 5 मई, 13:37, Ashish <
tambe.ash...@gmail.com> wrote:
> आज कल राज ठाकरे और मुम्बई में "बाहरी लोग" चर्चा का आम विषय है।राज के विचारों के
> बारे में लोगों की अलग अलग राय है। ये अलग बात है कि कई लोग राजनीतिक कारणों से राज
> के समर्थन में नहीं बोल पा रहे है। पर मुम्बई ही नहीं वरन देश के सभी महानगरों पर ह