अपने वोट बेचते हो!

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सम्पादक

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Aug 1, 2008, 2:42:55 AM8/1/08
to ई-हिन्दी सहित्य सभा
मंहगाई से त्रस्त, समस्याग्रस्त
एक किसान ने जैसे ही,
अपने सांसदों के हाथों में
नोटों के बण्डल देखे,
बड़ी हीन भावना से चिल्लाया-
देखो! देखो! भागवान!
संसद को कैसे नंगा किया
यह इंसान!
पास खड़ी पत्नी चिल्लाई
बड़ी नेकी बखानते हो!
गये इलेक्सेन में
तुम भी तो
एक जोड़ी धोती के लिए
अपने वोट बेचते हो!।

शम्भु चौधरी
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