विषय : पर्यावरण संरक्षण के लिए नीतिगत निर्णय

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Sanjeev Goyal

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Apr 12, 2026, 10:46:24 AM (yesterday) Apr 12
to dwarka-residents

 

PMOPG/E/2026/0057503


 

 

संबंधित विभाग : नीति आयोग

 

“श्मशान घाटों पर जैव-ईंधन की खपत कम करने के उद्देश्य से किए जा रहे प्रयासों में ‘मोक्षदा प्लेटफॉर्म’ एक महत्वपूर्ण पहल है। इस प्रणाली के उपयोग से ईंधन की खपत लगभग 40% तक कम हो जाती है। इसमें चिता भूमि पर रखने के स्थान पर लोहे के ढांचे (प्लेटफॉर्म) पर स्थापित की जाती है, जिससे लकड़ी की आवश्यकता स्वतः ही काफी कम हो जाती है। यह कोई साधारण बचत नहीं है; यदि इसे व्यापक स्तर पर अपनाया जाए तो देशभर में प्रतिवर्ष लाखों टन लकड़ी की बचत संभव है।

 

किन्तु यह देखा गया है कि इस पद्धति के आविष्कार के कई वर्षों उपरांत भी इसका उपयोग अत्यंत सीमित है। अधिकांश श्मशान घाटों पर ऐसे प्लेटफॉर्म केवल एक या दो मात्रा में ही उपलब्ध होते हैं, जबकि शेष दाह-संस्कार अभी भी पारंपरिक पद्धति से भूमि पर ही किए जा रहे हैं।

 

वहीं, सरकार द्वारा अनेक स्थानों पर विद्युत एवं गैस आधारित दाह-प्रणालियाँ स्थापित की जा रही हैं, जिनकी स्थापना अपेक्षाकृत अधिक खर्चीली होती है।

 

मेरे विचार से ‘मोक्षदा प्रणाली’ को व्यापक स्तर पर लागू करने हेतु एक ठोस एवं व्यापक पहल की आवश्यकता है। मोक्षदा ढांचा अनेक दशकों तक बिना किसी अनुरक्षण के अपना कार्य करता रह सकता है।  इससे होने वाले आर्थिक एवं पर्यावरणीय लाभ अत्यंत महत्वपूर्ण व वृहद हैं। अधिकांश श्मशान घाट नगर निगमों या धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित होते हैं, अतः सभी वर्तमान प्लेटफॉर्म्स को इस प्रणाली में परिवर्तित करने के लिए एकमुश्त अनुदान प्रदान करने पर विचार किया जा सकता है।”
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