व्यथा : संविधान की मूल भावना के विरुद्ध भेदभाव पूर्ण नियम

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Sanjeev Goyal

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Jan 29, 2026, 10:00:51 AM (16 hours ago) Jan 29
to dwarka-residents

PMOPG/E/2026/0006071


संबंधित विभाग : गृह मंत्रालय


 

मुस्लिम कार्मिकों  को बहु विवाह की आज्ञा : भारतीय संविधान एक धर्म निरपेक्ष अथवा समान विधान है जो की सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है । संविधान की धारा 44 सरकार पर समान नागरिक संहिता अपनाने हेतु एक दायित्व भी डालती है दुर्भाग्य से जिसकी ओर से सभी पूर्ववर्ती  सरकारों ने आँख मूँद रखी थी। जिस प्रकार हमारे राष्ट्र में जागरूकता बढ़ रही है तथा अनेक भेदभाव पूर्ण कानूनों तथा प्रक्रियाओं को रद्द किया जा रहा है, उसी क्रम में में सरकार का ध्यानाकर्षण उस प्रावधान की ओर करना चाहता हूँ किसके तहत सरकारी मुस्लिम कार्मिकों को बहु विवाह की आज्ञा है। इस प्रकार का प्रावधान सरासर भेदभाव पूर्ण व समाज विरोधी कृत्यों को प्रोत्साहन देने के समकक्ष है। आज जबकि हम अत्यधिक जन संख्या के कारण संसाधनों  पर भारी दबाव से गुजर रहे हैं, किसी भी सरकारी कर्मी को बहु विवाह की आज्ञा देना कहाँ तक उचित है? बहु विवाह आज के दौर में समाज में स्वीकृत प्रथा नहीं है  तो इसकी आज्ञा कैसे दी जा सकती है। कोई भी नागरिक इस बात के लिए अधिकार पूर्ण दावा नहीं कर सकता की वो बहु विवाह करेगा और उसका सरकारी नौकरी भी चाहिए।  इस प्रकार का प्रतिबंध लगाना पूर्णतया प्रशासन के हाथ में  है। सरकारी कर्मी को एक विवेक पूर्ण आदर्श नागरिक के अनुरूप व्यवहार करना होता है, बहु -विवाह कदापि उस श्रेणी में नहीं आता मेरा अनुरोध हैं की निजी धार्मिक  कानूनों की आड़ में इस प्रकार की समाज विरोधी स्वछंदता पर तुरंत प्रभाव से अंकुश लगाए जाने की आवश्यकता है तथा इस विकल्प/छूट को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए 


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