विषय : गौशाला प्रबंधन

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Sanjeev Goyal

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Jan 9, 2026, 10:02:00 PM (6 days ago) Jan 9
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PMOPG/E/2026/0000152


संबंधित संस्था : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूसा 

 

पशु विज्ञान विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) द्वारा वर्ष 2016 में गौशालाओं के सुव्यवस्थित प्रबंधन हेतु एक नियमावली अधिसूचित की गई थी। उक्त नियमावली में गौशालाओं के दैनिक संचालन एवं रख-रखाव से संबंधित विषयों पर विस्तृत दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए गए हैं, तथापि गोबर के वैज्ञानिक, पर्यावरण-अनुकूल एवं व्यावसायिक उपयोग से संबंधित किसी विशिष्ट प्रक्रिया अथवा अनुशंसा का समावेश नहीं किया गया है।

 

वर्तमान समय में गोबर को एक वैकल्पिक ईंधन के रूप में श्मशान घाटों में प्रयोग किए जाने के प्रति जागरूकता बढ़ी है। गोबर से ईंटों के निर्माण हेतु छोटे-छोटे संयंत्र भी अब सरलता से उपलब्ध हैं।

 

गोबर के इस प्रकार के उपयोग से एक ओर पारंपरिक ईंधन हेतु लकड़ी की कटाई में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है, वहीं दूसरी ओर यह गौशालाओं के लिए आय-सृजन का एक स्थायी साधन बनकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगा। साथ ही इससे नगर एवं ग्राम स्तर पर मल-व्ययन एवं अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों पर पड़ने वाला भार भी कम किया जा सकेगा।

 

गोबर प्रबंधन की यह प्रणाली पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के पुनर्चक्रण तथा सामाजिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने का एक प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह केवल सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक एवं पारिस्थितिक दृष्टि

से बहुआयामी लाभ प्रदान करने में सक्षम है।

 

चूँकि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा को कृषि एवं कृषि-आधारित गतिविधियों के क्षेत्र में नीति-निर्माण, अनुसंधान एवं मार्गदर्शन प्रदान करने वाली एक अग्रणी संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त है, अतः यह विनम्र अनुरोध है कि उक्त गौशाला प्रबंधन नियमावली का यथाशीघ्र पुनरीक्षण एवं अद्यतन करते हुए उसमें गोबर प्रबंधन, उपयोग एवं मूल्यवर्धन से संबंधित प्रावधानों को सम्मिलित किए जाने पर विचार किया जाए।

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