PRSEC/E/2026/0020644
विषय : भाषा संबंधित विसंगति
बोर्ड द्वारा प्रमाणित हिन्दी फिल्मों में एक विसंगति दृष्टिगोचर होती है। फिल्म के दौरान अनेक लिखित सूचनाएँ—जैसे स्थानों के नाम, ऐतिहासिक संदर्भ, समय-रेखाएँ, अथवा अन्य भाषाओं के संवाद—दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं। ये सूचनाएँ अक्सर कथानक की समझ को गहराई प्रदान करती हैं तथा दृश्य के संदर्भ को स्पष्ट करती हैं। तथापि, बहुत बार यह देखा गया है कि ऐसी सूचनाएँ केवल अंग्रेज़ी भाषा में ही प्रदर्शित की जाती हैं।
यह स्थिति स्वाभाविक रूप से प्रश्न उत्पन्न करती है कि जब किसी फिल्म का प्रमाणन हिन्दी फिल्म के रूप में किया गया है और उसका प्रमुख दर्शक-वर्ग हिन्दी भाषी है, तो इन महत्वपूर्ण सूचनाओं को केवल अंग्रेज़ी में प्रस्तुत करना किस हद तक उचित है। भारत जैसे बहुभाषी देश में, जहाँ बड़ी संख्या में दर्शक अंग्रेज़ी से पूर्णतः परिचित नहीं हैं, यह प्रवृत्ति उन्हें फिल्म के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं से वंचित कर देती है। इससे न केवल दर्शकों के अनुभव की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि फिल्म की संप्रेषणीयता भी आंशिक रूप से बाधित होती है।
मेरे विचार से, यदि किसी कारणवश अंग्रेज़ी का प्रयोग आवश्यक समझा जाता है—जैसे कि वैश्विक दर्शकों को ध्यान में रखते हुए—तो भी उसी सूचना को समान रूप से हिन्दी में प्रदर्शित किया जाना चाहिए। इससे सभी वर्गों के दर्शकों के लिए फिल्म को अधिक समावेशी और सुलभ बनाया जा सकेगा व समान रूप से जानकारी प्राप्त होगी।
बहुत संभावना है की यही विसंगति अन्य भाषाओं में प्रदर्शित चल चित्रों में भी हो। अतः यह अपेक्षित है कि केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, जिससे सभी निर्माताओं द्वारा फिल्मों में प्रदर्शित लिखित सूचनाएँ उस फिल्म की भाषा और आवश्यकता अनुसार अंग्रेज़ी दोनों में अनिवार्य रूप से दी जाएँ।
इस प्रकार का एक छोटा-सा सुधार दर्शकों के अनुभव को अधिक समृद्ध, समावेशी एवं न्यायसंगत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकता है।