विषय : श्मशान घाट पर उपलों का इस्तेमाल।

6 views
Skip to first unread message

Sanjeev Goyal

unread,
Feb 5, 2026, 10:01:52 AM (3 days ago) Feb 5
to dwarka-residents

PMOPG/E/2026/0018575


 

संबंधित मंत्रालय : शहरी विकास

 

दिल्ली नगर निगम ने एक बहुत सामयिक कदम उठाते हुए अपने नियंत्रण वाले सभी 400 श्मशान घाटों पर लकड़ी के स्थान पर गोबर से निर्मित उपलों के प्रयोग तो प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। यह अनेक लाभों से युक्त एक चिर प्रतीक्षित प्रकृति अनुकूल कदम है। इस कदम से सब ओर लाभ ही लाभ हैं। पर्यावरण संरक्षण के अतिरिक्त यह प्रयास गौशालाओं को स्वायत्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। जो गोबर अब तक जल कुंडों को दूषित कर रहा था अब वो कंडों के रूप में ईंधन की भांति उपयोग में लाया जाएगा। चूंकि हमारे राष्ट्र में पालतू पशु धन की विश्व की सर्वाधिक संख्या है, यह गहन चिंतन का विषय है कि पर्यावरण के सतत ह्रास विनाश के उपरांत भी की इस सामान्य सी दिखने वाले निर्णय में वर्षों लग गए ? मरघट में लकड़ी का प्रयोग प्रायः शहरों में अधिक होता है, ग्रामीण क्षेत्रों में गोसे/कंडों का प्रयोग प्रचुर मात्रा में होता है।

 

अब जबकि दिल्ली जैसा नगर, जो भारत वर्ष का सर्वाधिक गहन आबादी वाला क्षेत्र होने के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी होने का गौरव भी सँजोय है, इस कदम के लिए दशकों लगा सकता है, पिछले लगभग पाँच वर्षों से तो में ही इस बारे में लिख रहा था, और भी न जाने कितने व्यक्ति इस हेतु प्रयासरत होंगे।देश के अन्य शहर भी प्रशासनिक उदासीनता के इसका अनुगमन करने के लिए अगले बीस वर्ष तक सोच विचार कर सकते हैं। अभी तो सरकार ने निर्णय भर लिया है , इसे मूर्त रूप देने में संभवतया अभी कुछ वर्ष और लगेंगे। एतदर्थ अनुरोध है कि देश के सभी नगर निगमों को इस संदर्भ में सूचित कर निर्देश दिया जाए के वे भी अपने क्षेत्र में इस प्रकार के व्यवस्था स्थापित करने लिए समय बद्ध योजना का निर्माण कर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें । 

 


--

REJIMON C K

unread,
6:47 AM (4 hours ago) 6:47 AM
to DWARKA FORUMregdgrpemail
FIX ACCOUNTABILITY OF PUBLIC SERVANTS, REPS, & CONTRACTORS TO PREVENT CIVIC FATALITIES - *Sign the Petition! * https://c.org/CVtQqCxNSP via @dwarkaforum

*Fellow Indians*: When Will We Say *Enough to Deadly Negligence? *
 
*Heart-wrenching deaths like Komal Dhayani's and Yuvraj Mehta's—and so many more* —rip families apart. Isn't negligence in public space a killer *we can stop* ? Answer *honestly* and *act*:
 
1. **How deeply have these tragedies shaken you emotionally? ** (Devastated? Angry? Indifferent? Why? )
 
2. **If this happened to *your* loved one—child, spouse, parent, friend—what would you feel? What would you demand? ** 
 
3. **As a citizen, do you own responsibility to end this? ** Yes/No-How? (Report negligence? Follow up relentlessly until resolved? Rally neighbors? )
 
**Demand Now :) *Strict safety protocols in ALL public places* ! Full accountability from government and public services— *no more excuses* !  
 
Share your answers publicly. Tag officials. Let's turn grief into guardians of life.

#EndNegligenceNow #SaveLivesIndia 

Act now against any dangerous spots observed.  
Sign online petitions, send emails, post social media (use it at least *once* to save lives)

Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages