HM 03-07-2026

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God's Angel

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Jul 2, 2026, 8:38:38 PM (11 days ago) Jul 2
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03-07-2026
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
"बापदादा"'
मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम इस ड्रामा के आदि-मध्य-अन्त को जानते हो, तुम्हें बाप द्वारा ज्ञान का तीसरा नेत्र मिला है इसलिए तुम हो आस्तिक''
प्रश्नः-बाप का कौन सा टाइटिल धर्म स्थापकों को नहीं दे सकते हैं?
उत्तर:-बाबा है सतगुरू। किसी भी धर्म स्थापक को गुरू नहीं कह सकते क्योंकि गुरू वह जो दु:ख से छुड़ाये, सुख में ले जाये। धर्म स्थापन करने वालों के पीछे तो उनके धर्म की आत्मायें ऊपर से नीचे आती हैं, वह किसी को ले नहीं जाते। बाप जब आते हैं तो सभी आत्माओं को घर ले जाते हैं इसलिए वह सभी के सतगुरू हैं।
गीत:-इस पाप की दुनिया से...

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) आत्म-अभिमानी बनकर इन कानों द्वारा अमरकथा सुननी है। ज्ञान की भूँ-भूँ कर आप समान बनाने की सेवा में रहना है।

2) बाप समान नॉलेजफुल, ब्लिसफुल बनना है। सोमरस पीना और पिलाना है।

वरदान:-माया के विघ्नों को खेल के समान अनुभव करने वाले मास्टर विश्व-निर्माता भव
जैसे कोई बुजुर्ग के आगे छोटे बच्चे अपने बचपन के अलबेलेपन के कारण कुछ भी बोल दें, कोई ऐसा कर्तव्य भी कर लें तो बुजुर्ग लोग समझते हैं कि यह निर्दोष, अन्जान, छोटे बच्चे हैं। कोई असर नहीं होता है। ऐसे ही जब आप अपने को मास्टर विश्व-निर्माता समझेंगे तो यह माया के विघ्न बच्चों के खेल समान लगेंगे। माया किसी भी आत्मा द्वारा समस्या, विघ्न वा परीक्षा पेपर बनकर आ जाए तो उसमें घबरायेंगे नहीं लेकिन उन्हें निर्दोष समझेंगे।
स्लोगन:-स्नेह, शक्ति और ईश्वरीय आकर्षण स्वयं में भरो तो सब सहयोगी बन जायेंगे।

ये अव्यक्त इशारे - ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो

अभी ज्वालामुखी बन आसुरी संस्कार, आसुरी स्वभाव सब-कुछ भस्म करो। जैसे देवियों के यादगार में दिखाते हैं कि ज्वाला से असुरों का संघार किया। असुर कोई व्यक्ति नहीं लेकिन आसुरी शक्तियों को खत्म किया। यह अभी आपकी ज्वालास्वरूप स्थिति का यादगार है। अब ऐसी योग की ज्वाला प्रज्जवलित करो जिसमें यह कलियुगी संसार जलकर भस्म हो जाये।

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