| 05-07-26 | प्रात:मुरली ओम् शान्ति ''अव्यक्त-बापदादा'' | रिवाइज: 15-12-10 मधुबन |
मेरे को तेरे में परिवर्तन कर बेफिक्र बादशाह बनो, सेकण्ड में व्यर्थ को बिन्दी लगाने के अभ्यासी बन हर संकल्प और समय को सफल करो
| वरदान:- | स्नेह और शक्ति रूप के बैलेन्स द्वारा सेवा करने वाले सफलतामूर्त भव जैसे एक आंख में बाप का स्नेह और दूसरी आंख में बाप द्वारा मिला हुआ कर्तव्य (सेवा) सदा स्मृति में रहता है। ऐसे स्नेही-मूर्त के साथ-साथ अभी शक्ति रूप भी बनो। स्नेह के साथ-साथ शब्दों में ऐसा जौहर हो जो किसी का भी हृदय विदीरण कर दे। जैसे माँ बच्चों को कैसे भी शब्दों में शिक्षा देती है तो माँ के स्नेह कारण वह शब्द तेज वा कडुवे महसूस नहीं होते। ऐसे ही ज्ञान की जो भी सत्य बातें हैं उन्हें स्पष्ट शब्दों में दो - लेकिन शब्दों में स्नेह समाया हुआ हो तो सफलतामूर्त बन जायेंगे। |
| स्लोगन:- | सर्वशक्तिमान् बाप को साथी बना लो तो पश्चाताप से छूट जायेंगे। |
ये अव्यक्त इशारे - ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
जैसे सूर्य की किरणें फैलती हैं, वैसे ही मास्टर सर्वशक्तिवान् की स्टेज पर शक्तियों व विशेषताओं रूपी किरणें चारों ओर फैलती अनुभव करें, इसके लिए “मैं मास्टर सर्वशक्तिवान, विघ्न-विनाशक आत्मा हूँ'', इस ऊंचे स्वमान के स्मृति की सीट पर स्थित हो योग को ज्वाला रूप बनाओ तो कोई विघ्न सामने तक भी नहीं आ सकता।