महाकुंभ में नग्न नहीं रह सकतीं नागा महिलाएँ

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BABA KHADAG

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Feb 12, 2013, 12:24:12 AM2/12/13
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महाकुंभ में नग्न नहीं रह सकतीं नागा महिलाएँ

अमिताभ सान्याल

इलाहाबाद से बीबीसी के लिए

 गुरुवार, 24 जनवरी, 2013 को 10:45 IST तक के समाचार

नागा महिला साधुओं के अखाड़े में विदेशी महिलाएं भी शामिल.

इस बार का कुंभ आयोजन एक मायने में बेहद ख़ास है. पहली बार नागा साधुओं के अखाड़े में महिलाओं को स्वतंत्र और अलग पहचान दी गई है. इसी वजह से आपको संगम के तट पर जूना संन्यासिन अखाड़ा नजर आता है.

कुंभ को दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है. इस आयोजन का नियंत्रण काफी हद नागा साधुओं के जिम्मे होता है.

पुरुषों की बहुलता वाले इस आयोजन में अब तक महिला साधु पुरुषों के अखाड़े में शामिल होती रहीं.

प्रत्येक 12 साल पर आयोजित होने वाले कुंभ के आयोजन का इतिहास करीब हजार साल पुराना है.

क्लिक करेंदेखिए नागा महिला अखाड़े का रंग

पुरुष साधुओं के अखाड़े में महिलाओं को कमतर माना जाता था. पुरुषों के नेतृत्व के तले उन्हें कम जगह में कम सुविधाओं के साथ रहना होता था.

लेकिन अब ऐसा नहीं है. क्योंकि उनका अपना अखाड़ा है, अपना नेता है और अपने संसाधन हैं. शौचालय की संख्या पर्याप्त है. महिलाओं के अखाड़े की सुरक्षा में पुलिस की सख्त निगरानी भी है.

"अभी भी अखाड़ों में पुरुष और महिलाओं में बराबरी नहीं आयी है. हमारा टेंट कहां लगेगा जैसे बड़े फ़ैसलों के लिए हम अभी भी अखाड़ों के पुरुषों के लिए निर्भर हैं."

कोरिने लियरे, फ्रांसीसी महिला जो बनी हैं साधु

महिलाओं के अखाड़े की नेता दिव्या गिरी कहती हैं, “यह हमारी नयी पहचान है.”

2004 में विधिवत तौर पर साधु बनने से पहले 35 साल की दिव्या ने इंस्टीच्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड हाइजिन, नई दिल्ली से मेडिकल टेक्नीशियन की पढ़ाई पूरी की है.

वे कहती हैं, “हम कुछ चीजें अलग से करना चाहती हैं. जूना अखाड़े के इष्टदेव भगवान दत्तात्रेय हैं, हम अपना इष्टदेव दत्तात्रेय की मां अनुसूया को अपना देवी बनाना चाहती हैं.”

भगवान को निर्धारित करना एक चीज है, लेकिन लिंग आधारित भेदभाव को दूर करना एक दूसरी बात है.

पुरुषों पर निर्भरता

एक सप्ताह पहले ही, फ्रांस की कोरिने कोको लियरे साधु बनी हैं.

भगवा कपड़ों में मितभाषी कोरिने बताती हैं, “अभी भी अखाड़ों में पुरुष और महिलाओं में बराबरी नहीं आई है. हमारा टेंट कहां लगेगा जैसे बड़े फ़ैसलों के लिए हम अभी भी अखाड़ों के पुरुषों के लिए निर्भर हैं.” वैसे लियरे का नाम अब संगम गिरी है. संगम गिरी ने अपने लिए महिला गुरुओं की तलाश शुरू कर दी है. एक नागा साधु को पांच गुरू चुनने होते हैं.

निकोले जैकिस न्यूयार्क में फिल्म निर्माण से जुड़ी हैं. वे 2001 से साधु बन चुकी हैं और अब कुछ महिला साधुओं के लिए संपर्क अधिकारी के तौर पर काम कर रही हैं.

वे कहती हैं, “ये महिलाएं अब तक अपने जीवन में पुरुषों पर निर्भर रही है. कभी पिता, कभी पति और कभी बेटे पर. ये चीजों के होने का इंतज़ार करती हैं, पश्चिम में हम ऐसा नहीं करते.”

महिला साधु अपने अखाड़े में तकनीक का इस्तेमाल भी खूब कर रही हैं.

जूना संन्यासिन अखाड़ा में तीन चौथाई महिलाएं नेपाल से आई हुई हैं. नेपाल में ऊंची जाति की विधवाओं के दोबारा शादी करने को समाज स्वीकार नहीं करता. ऐसे में ये विधवाएं अपने घर लौटने की बजाए साधु बन जाती हैं.

वैसे नागा अखाड़ों में महिलाओं को अलग नजरिए से देखने की एक वजह और भी मौजूद है. पुरुष साधुओं को सार्वजनिक तौर पर नग्न होने की इजाजत है लेकिन महिला साधु ऐसा नहीं कर सकतीं.

लेकिन जूना अखाड़े की महिलाओं को ये इजाजत भी मिली हुई है. 70 साल की प्रहलाद गिरी ने याद करती हैं कि उन्हें बस एक महिला साधु ब्रह्मा गिरी की याद है जो हमेशा नग्न रहा करतीं थीं और अपनी सुरक्षा के लिए दोनों तरफ़ तलवारें रखती थीं.

नग्न होने पर मनाही

ब्रह्म गिरी का देहांत हो चुका है और किसी महिला साधु को नग्न रहने की इजाजत नहीं है. ख़ासकर कुंभ में डुबकी लगाने वाले दिन में तो एकदम नहीं.

कुंभ के शाही स्नान की शुरुआत से एक दिन पहले जूना अखाड़े के पुरुष साधुओं ने दिव्या गिरी को ये कहा कि वे इस बात का ख्याल रखें कि कोई महिला साधु नग्न अवस्था में नजर नहीं आएं.

"हम इसकी इजाजत कैसे दे सकते हैं. महिलाओं का नग्न रहना भारतीय परंपरा में शामिल नहीं है."

हरि गिरी, महासचिव, जूना अखाड़ा

इसके चलते ज्यादातर महिलाएं एक कपड़ा लपेटे हुए मिलती हैं.

जूना अखाड़े के महासचिव हरि गिरी कहते हैं, “हम इसकी इजाजत कैसे दे सकते हैं. महिलाओं का नग्न रहना भारतीय परंपरा में शामिल नहीं है.”

महिलाओं को अपने पताके में जगह देने के मुद्दे पर हरि गिरी कहते हैं, “ये लोकतंत्र है और महिलाएं इसके लिए लंबे समय से मांग कर रही थीं.”

पहले महिला साधु जहां रहते थे, उसे माई बाड़ा कहते थे, बाड़ा जानवरों को बांधने की जगह को कहा जाता था. लेकिन इस बार का कुंभ बदला बदला है.

DURGA PRASAD JUGRAN

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Feb 12, 2013, 7:46:34 AM2/12/13
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बाबा क्या चाहते हैं?

2013/2/12 BABA KHADAG <akgup...@gmail.com>

ASHOK KUMAR Gupta

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Feb 12, 2013, 7:54:02 AM2/12/13
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बाबा के चाहने से कुछ होता तो बाबा न रह कर सांसारिक बन जाते 

2013/2/12 DURGA PRASAD JUGRAN <jug...@gmail.com>



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ASHOK GUPTA


DURGA PRASAD JUGRAN

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Feb 12, 2013, 8:07:16 AM2/12/13
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साध्वियों के बीच रहने की चाहत संभवतः  बाबा में भी है, परन्तु सांसारिकता की लक्ष्मन रेखा उन्हें ऐसा करने से रोक रही है। जाओ बाबा ,अपने सपनों में जीने के लिए ,आपके चेले आपको इजाजत देते हैं।

2013/2/12 ASHOK KUMAR Gupta <akgup...@gmail.com>
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