एक आश्रम में जुगरान नामक गुरु अपने शिष्यों को शिक्षा देते थे उनके शिष्य एक दूसरे के साथ बहुत ही अच्छी तरह से रहते थे एक दिन वे अपने गुरु जुगरान के पास गए और कहने लगे कि गुरु जी हमें सच्चे ज्ञान के बारे में बताइए तभी गुरु जुगरान ने उन सभी शिष्यों से एक सवाल किया और कहा कि मुझे सबसे पहले यह बताओ कि दुनिया में सबसे मीठा क्या है तभी सभी शिष्य एक दूसरे की ओर देखने लगे. कुछ देर सोचने के बाद उन सभी शिष्यों में से एक शिष्य छर्रा बोला कि गुरु जी इस दुनिया में सबसे मीठा गुड़ है तभी दूसरा शिष्य बोला नहीं गुरु जी सबसे मीठा शहद है तभी अगला शिष्य अशोक गर्ग बोला की गुरु जी सबसे मीठा गन्ना है तभी एक शिष्य अजय सिंह वहां पर एक शक्कर की बोरी लेकर आया और कहने लगा की गुरुजी सबसे मीठी तो शक्कर है
इस तरह से सभी शिष्यों ने अपने अपने हिसाब से अलग-अलग उत्तर दिए की इस दुनिया में सबसे मीठी चीज क्या है तभी उनके गुरु जुगरान ने उन्हें अपने पास बुलाया और कहा की इस दुनिया में सबसे मीठी चीज ना ही शहद है ना ही गुड,ना गन्ना और ना ही शक्कर है इस दुनिया में सबसे मीठी हमारी वाणी होती है अगर हम मीठी वाणी का स्वाद दूसरे व्यक्ति को करादे यानी उससे हम मीटी वाणी के साथ बोले तो उससे हमारे संबंध बहुत अच्छे हो जायेंगे इसलिए दुनिया में सबसे मीठी वाणी होती है इससे हमारे सम्बन्ध मीठे यानी अच्छे होते हैं.