Prabhaker Prabhat
unread,Jun 17, 2013, 6:18:55 AM6/17/13Sign in to reply to author
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क्या आप जानते हैं कि.... मुहम्मद बिन कासिम... नामक.... बर्बर और
दुर्दांत मुस्लिम तुर्क लुटेरा कौन था और उसकी मौत कैसे हुई थी....?????
उस मुहम्मद बिन कासिम को जानने
से पहले एक नजर.... उसके पहले के हिंदुस्तान पर नजर डालना अतिआवश्यक
है.... तभी , बिन कासिम और उसके कारनामों को ठीक ढंग से समझा जा सकता
है...!
मुहम्मद बिन कासिम से पहले.... महाराज विक्रमादित्य के
पराक्रम से .... भारत का हिन्दू साम्राज्य अफगानिस्तान तक फैला हुआ था....
और, वहां के राजप्रसादों और सुरम्य भवनों में दूध तथा शहद की नदियाँ बहती
थी... और वे स्वर्ण तथा हीरे-मोतियों से सुसज्जित तथा प्रकाशवान थे.....
जिन्हें इन तुर्क और बर्बर लुटेरों ने .... खुली नालियों... झोपड़ियों और
कच्चे मकानों वाली झुग्गी-झोपड़ियों में तब्दील कर दिया...!
दरअसल
भारतीय इतिहास .के कपटवेश में इस काल के जो वृतांत विश्व भर में पढाये
जाए हैं.... वे तब जले पर और भी ज्यादा नमक छिड़कते हैं..... जब इन्हें अरबी
और फारसी संस्कृति का भारतीय संस्कृति में समावेश बताते हुए ... इन्हें
भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है....!
जबकि....जाहिल और क्रूर
जत्थों द्वारा हिंसात्मक व्यवहारों, विध्वंसों , हत्या और सामूहिक
नरसंहारों , बलात्कारों और अमानवीय अत्याचारों का यह समय हिंदुस्तान के लिए
बहुत ही भयावह था...!
भारतीय इतिहास का वो अंश यदि आप पढ़ें ....
जिसमे काम पिपासु , अन्धविश्वासी, और दुर्दांत अरबी मुस्लिम लुटेरे ..
इस्लाम के प्रचार के बहाने... हिंदुस्तान की धरती को रौंदते , खून की
नदियाँ बहाते... और, कटे हुए सिरों को चरों और बिखेरते हुए आगे बढ़ रहे
थे तो.... भय से आप कांप उठेंगे.....!
वे आवारा ... खानाबदोश और
नैतिकता से हीन मुस्लिम लुटेरे ... एक हाथ में खून से भींगी हुई तलवार और
दुसरे हाथ में मशाल लेकर... हर घर में कत्लेआम मचाया .... और, चीखती
-चिल्लाती औरतों को अपनी हवस का शिकार बनाया ...!
इसी खूनी गिरोह
का एक हरी आँखों वाला .... 16 वर्षीय कुख्यात शैतानी सरदार था.... मुहम्मद
बिन कासिम .... जो अर्धचंद्र अंकित इस्लामी हरे झंडे को उडाता हुआ अरब से
आया था...!
और.. वर्षों के लम्बे प्रयास के बाद.... इस कासिम की
लूट भारत में सफल हो सकी थी.... क्योंकि, उसके पूर्व अरबी मुस्लिमों ने
जितनी भी योजनाएं बनायीं थी., और जितने भी लुटेरे भेजे थे .... सारे के
सारे ... शक्तिशाली हिन्दुओं द्वारा हिंदुस्तान के सरहद पर ही मारे जा चुके
थे.... और, वहीँ दफ़न हो चुके थे...!
उस समय हिन्दुओं के बहादुरी
का इतना अधिक जलवा था कि..... अरबी लुटेरे चाह कर भी हिंदुस्तान की तरफ
आने का साहस नहीं कर पा रहे थे...!
लेकिन.... भारतीय नारियों का
लुभावना रूप और यहाँ का धन-वैभव .. दो ऐसे प्रबल आकर्षण थे .... जो उन अरबी
लुटेरों को ज्यादा दिन रोक नहीं पाया !
हालाँकि.....यह मुस्लिमों की एक सनक थी.... लेकिन, धन और स्त्रियों की अपनी प्यास बुझाने का यह सबसे आसन रास्ता था...!
इसीलिए अरबों ने हिंदुस्तान को लूटने की योजना .. 6 वीं सदी में
बनायीं... और, उस समय अरब का खलीफा... सुलेमान नामक नरपिशाच था.... और,
ईराक पर हज्जाज का राज था...!
उस सुलेमान खलीफा का प्रमुख कर्ता-धर्ता.. यही हज्जाज था... और, हिंदुस्तान में लूट की कमान भी इसी हज्जाज के हाथों में थी...!
उन लुटेरों का नायक ( कासिम) ... इस्लामी हिसाब से लूट का पाचवां भाग
अपने पास रख सकता था... जबकि बाकी का हिस्सा उसे अरब भेजना होता था...!
खलीफा और हज्जाज की कामुक लिप्सा शांत करने के लिए... श्रीलंका और भारतीय सरहद पर हमले कर उन्हें लड़कियां भेजी जाती थी...!
इसी तरह... एक बार जहाज में श्रीलंका से ढेर सारा लूट का सामान और...
औरतें खलीफा को भेजी जा रही थी..... कि... उस जहाज ने कराची में लंगर
डाला..... और, वहां के तटों से और भी.... हिन्दू स्त्रियों को पकड़कर जहाज
पर चढाने लगे.... जिस कारण राजा दाहिर के तट रक्षकों ने उन मुस्लिम
लुटेरों को पकड़ लिया और, वो स्त्रियाँ तथा लूट का सामान सुलेमान तक नहीं
पहुँच सकी....जिससे सुलेमान काफी निराश हो गया...!
राजा दाहिर उस
समय सिंध प्रान्त के राजा थे..... और वे बेहद शक्तिशाली और न्यायप्रिय
राजा थे.... . और .... पूरे सिंध प्रान्त पर उनका ही राज था... तथा उनकी
राजधानी देवालयपुर (आधुनिक कराची) था...!
उनके शहर के बीचोबीच
.... सुरक्षा के देवता का एक मंदिर था.... जिसके विशाल गुम्बद पर.... सदैव
एक भगवा ध्वज लहराता रहता था.... जिसे मीलों दूर से ही दिखाई देता था..!
खैर... जब इस बात की खबर.... खलीफा सुलेमान को लगी तो.... उसने राजा
दाहिर को इसका जिम्मेदार ठहराया और उन्हें एक बेहद अपमानजनक संधिपत्र
भेजा... जिसे राजा दाहिर ने सख्ती से ठुकरा दिया...!
इसके जबाब
में हज्जाज ने अपने चचेरे भाई और अपने दामाद .... मुहम्मद बिन कासिम को
पचास हजार लुटेरे घुड़सवार की सेना बना कर.... भारत पर आक्रमण करने को
भेजा...!
हालाँकि... इस से पहले भी वो... राजा दाहिर पर.... कई
बार आक्रमण कर चुका था.... लेकिन हर बार राजा दाहिर ने.... उन मुस्लिम
लुटेरों को... गाजर-मुली की तरह काट डाला था....!
लेकिन इस बार.... वो बहादुर राजा दाहिर.... कासिम के धोखे के शिकार हो गए... और, लड़ते हुए वीर गति को प्राप्त हुए...!
राजा दाहिर के... वीरगति को प्राप्त होते ही.... उस राजमहल की सारी
स्त्रियाँ.... उन मुस्लिम लुटेरों से अपनी अस्मिता बचाने के लिए.... एक
जगह जौहर की आग में कूद गयी...!
उसी समय..... दो बेहद ही सुन्दर दो लड़कयाँ जो जौहर की आग में नहीं कूद पाई थी..... कासिम के हाथ लग लग गयी...!
हालाँकि... वे राजा दाहिर की बेटियां नहीं थी..... फिर भी, वे देखने में
बेहद ही सुन्दर थी..... इसीलिए कासिम ने उन्हें.... राज दाहिर की पुत्री ही
समझा.... और, उन्हें हज्जाज के हरम के लिए भेज दिया...!
उस लड़की का नाम जानकी था.... और, बेहद सुन्दर होने के साथ -साथ बेहद बहादुर.... और, बुद्धिमान भी थी...!
उस लड़की जानकी को.... जब खलीफा वालिद के पास ले जाया गया तो.... हज्जाज
उस जानकी के रूप लावण्य को देख कर मोहित हो गया.... और, उसका बलात्कार करने
को उतावला हो गया....!
लेकिन... उसी समय उस जानकी ने.... अपनी
बुद्धि के उपयोग करते हुए.... हज्जाज से कहा कि.... उसे यहाँ भेजे जाने से
पहले.... कासिम ने तिन दिनों तक लगातार उसका बलात्कार किया है.... क्या...
खलीफा को अपने सिपाही का जूठन खाना ही पसंद है....??????
ये बात
वालिद के दिल को बेध गयी.... और ....वासना में अँधा हुआ हज्जाज .... अपने
विश्वसनीय सैनिकों की एक टोली को आदेश दिया कि..... . कासिम जहाँ कहीं और
जिस भी अवस्था में हो.... उसे सांड के ताजे खाल में सिल कर तुरत मेरे सामने
पेश करो....!
खलीफा का आदेश पढ़ते ही.... कासिम स्तंभित रह
गया.... और, उस कासिम को.... ऊँचे सिहांसन से खीच कर घसीटते हुए....
हाथ-पैर बाँध कर.... सांड के ताजे खाल में भर कर सिल दिया गया... और, वो
खूनी बण्डल.... पेटी में भरकर दमिश्क लाया गया ...!
कासिम के लाश
के पहुँचने की सूचना जब वालिद को मिली तो... उसने उन दो लड़कियों को भी
बुलवाया और गर्व से कहा कि.... मेरी पुत्रियों... देखो किस तरह मेरे
आदमियों ने... मेरी आज्ञा का पालन किया है..... क्योंकि, लाखों लोगों का
हत्यारा वो कासिम उस खाल के अन्दर तड़प-तड़प कर दो दिनों में मरा था...!
ये सुनते ही लड़कयाँ हँसने लगी.... और उन्होंने कहा कि... इसद कासिम ने
हमारा स्पर्श तक नहीं किया था... लेकिन इसने हमारे राजा का धोखे से वध
किया... हमारे देश को तहस-नहस कर दिया... हमारे सम्मान को नष्ट कर .. हमें
गुलाम बनाया ... और, हमारी जैसी ही 10 हजार स्त्रियों का इसने मान-मर्दन
किया था.... 70 शासकों की इसने हत्या की थी... और, हमारे मंदिरों को ताड़कर
मस्जिद बना दिया था.... इसीलिए, हमने झूठ का सहारा लेकर इस से बदला लिया
है...!
यह सुनते ही.... खलीफा वालिद सन्न रह गया.... और, शोक की तीव्र लहर में उसने अपनी हथेलियाँ काट खायी...!
शर्म, शोक और गलती का उस खलीफा वालिद को ऐसा गहरा आघात लगा कि.... वो इस
सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाया और.... अंततः ...जनवरी... 715 में उसकी
मौत हो गयी...!
हज्जाज इस घटना से ६ महीने ही मर चुका था....
क्योंकि... खलीफा वालिद ने उस पर इलज़ाम लगाया था कि.... उसी के कहने पर....
कासिम ने इन लड़कियों को अपवित्र किया था....!
खलीफा... हज्जाज और
कासिम ... एक साथ तीनों के मौत के झटके ने..... सुलेमान को कंपकपा
दिया.... और, उसने डर के मारे.... उन बहादुर... लड़कियों को हाथ तक नहीं
लगाया.... !!
नमन है उन भारतीय वीर बालाओं को ...... जिन्होंने उस
विकट परिस्थिति में भी अपना धैर्य नहीं खोया.... और, उन्होंने हमारे
हिंदुस्तान के मान-मर्दन करने वाले मुस्लिम लुटरों को कुत्तों से भी बदतर
मौत दी...!
जागो हिन्दुओ..... ये कहानी हमें बताती है कि..... अगर
धैर्य और हिम्मत से काम लिया जाए तो..... दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं
है...!
पहचानो अपने आपको.... और, दहाड़ो हिन्दुओ....
जय महाकाल...!!!
नोट: कहा जाता है कि.... हज्जाज नामक पागल नर पिशाच ने अपने आदमियों से
एक लाख बीस हजार आदमियों को कटवा कर फिंकवा दिया था.... और, उसकी मौत के
बाद उसके जेलखानों में तीस हजार पुरुष और बीस हजार स्त्रियाँ बंदी पायी गयी
थी....!
यह लेख.... इतिहास के गहन विवेचना और.... ढेर सारे वीडियो देखने के बाद ही लिखे गए हैं....!
स्रोत: बायोग्राफिकल डिक्शनरी, सर इलियट एंड डाउसन, पी सी ओक़, यू ट्यूब एवं अन्य........