पुलिंग या स्त्रीलिंग?

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Rajesh Roshan

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Jun 11, 2008, 6:28:47 AM6/11/08
to chithakar

हिंदी के सुधीजनों से एक प्रश्न का जवाब जानना चाहता हूं, अंग्रेजी का क्लास (कक्षा) का प्रयोग जब हम हिंदी में उपयोग करेंगे तो वह पुलिंग होगा या स्त्रीलिंग?



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Rajesh Roshan
http://rajeshroshan.com

Shailesh Bharatwasi

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Jun 11, 2008, 6:37:40 AM6/11/08
to Chit...@googlegroups.com
डॉ॰ हरदेव बाहरी के राजपाल हिन्दी-हिन्दी शब्दकोश के अनुसार
 
क्लास पुल्लिंग है जिसके अर्थ हैं- दरजा, श्रेणी, वर्ग, कक्षा।
 
परंतु मैंने कई लोगों की जुबान से यह भी सुना है- 'आप कौन सी क्लास में हैं, बेटा!?'
 
वैसे मैं पुल्लिंग के रूप में इस्तेमाल करता हूँ।

Abhishek

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Jun 11, 2008, 7:16:38 AM6/11/08
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While using class for कक्षा, mere vichaar se to ye striling hi hota hai...

main saatveen kaksha me padhta hoon...
barahveen kaksha ke results aa rahe hain...
ye kaun see kaksha hai?

~ Abhishek
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Thanks & Regards
Abhishek

दिनेशराय द्विवेदी

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Jun 11, 2008, 8:02:29 AM6/11/08
to Chit...@googlegroups.com
हिन्दी में लिंग शब्दों पर निर्भर करेंगे। मैं इन शब्दों में से क्लास, श्रेणी, कक्षा को स्त्री लिंग और वर्ग व दर्जा को पुर्लिंग प्रयोग करता हूँ।
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दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan, http://anvarat.blogspot.com/
http://teesarakhamba.blogspot.com/
http://judisndia.blogspot.com/

sanjay | जोग लिखी

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Jun 12, 2008, 4:30:04 AM6/12/08
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पूरी क्लास खाली थी, क्योंकि कोई पढ़ने नहीं आया था.

विद्यालय में कुल दस क्लासें थी.

क्लास, इस अल्पज्ञानी के अनुसार स्त्रीलिंग है.

narayan prasad

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Jun 12, 2008, 5:27:33 AM6/12/08
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महाजनो येन गतः स पन्थाः ।
बड़े लोग जिस रास्ते गये वही सही रास्ता है ।


यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः ।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ।। गीता ३.२१।।

श्रेष्ठ पुरुष जो जो आचरण करता है, अन्य लोग भी उसके अनुसार बरतते हैं । वह जो कुछ प्रमाण कर देता है, लोग उसी का अनुसरण करते हैं ।



2008/6/12, sanjay | जोग लिखी <sanjay...@gmail.com>:

Hariram

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Jun 12, 2008, 6:54:13 AM6/12/08
to Chithakar
सही है-- बड़ों ने जो रास्ता दिखाया उससे मार्गदर्शन लेना चाहिए। उच्चतम
न्यायालय भी पिछले निर्णयों को उदाहरण के तौर पर ग्रहण करके वर्तमान
मामलों पर फैसला देता है--

हिन्दी में कोई (शब्द) नपुंसक, हिंजड़ा नहीं होता, सभी या तो स्त्रीलिंग
या पुल्लिंग होते हैं -- यह इसकी खाशियत है या सख्शियत - वाद-विवाद हेतु
अच्छा विषय होगा...

एक चुटकुले में दिए गए लालू जी का उदाहरण अनुकरणीय है--

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एक रेलवे स्टेशन पर दो यात्री लड़ रहे थे--

एक कह रहा था "गाड़ी आती है" सही होगा।
दूसरा कह रहा था "गाड़ी आता है" सही होगा।

अन्त में निर्णय हेतु बात लालू जी तक पहुँची--

लालू जी ने निर्णय दिया -- "गाड़ी आवत है" - सही होगा।

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यदि हिन्दी संस्कृत के आधार पर विकसित हुई है तो क्या हम हिन्दी में भी
नपुसंक लिंग का प्रावधान नहीं कर सकते भावी पीढ़ियों के लिए, संसार के
समस्त लोगों के लिए हिन्दी को सरल बनाने के लिए, का/की/के, ता/ती/ते आ/ई/
ए प्रत्ययों की विविध जटिलता को मिटाने के लिए...?????

नीचे दिए श्लोक के अनुसार अब स्वयं श्रेष्ठजन बनें, लोगों के लिए
अनुकरणीय सरल मार्ग प्रशस्त करें...

दिनेशराय द्विवेदी

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Jun 12, 2008, 7:03:53 AM6/12/08
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मैं हरिराम जी की बात से सहमत हूँ। जैसे हम करेंगे हमारे पीछे वाले उस का अनुसरण करेंगे। यहाँ अदालत में दिए जाने वाले आवेदनों में प्रार्थी शब्द का खूब इस्तेमाल होता है। प्रार्थी अगर स्त्री या लड़की हो तो वहां प्रार्थिया लिखा जाता है। मैं वर्षों से महिला को भी प्रार्थी ही लिखता हूँ। हां जब वाक्य लिखना होता है तो लिखता हूँ ....प्रार्थी वचन देती है.....। इस तरह मैं ने अपना प्रयोग आरंभ किया है। अनेक अन्य भाषा प्रयोग किए हैं। वैसे यह विशेषता है हिन्दी की कि क्रिया से पता लगता है कि कर्ता स्त्री लिंग है या पुर्लिंग।
2008/6/12 Hariram <hari...@gmail.com>:

Hariram

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Jun 13, 2008, 6:24:36 AM6/13/08
to Chithakar
दिनेश जी,

आपने सभी के लिए 'प्रार्थी' लिखकर सही मार्ग दर्शाया है।

क्योंकि अगर पुरुष प्रेसिडेण्ट को "राष्ट्रपति" कहते हैं।
तो महिला प्रेसिडेण्ड को "राष्ट्रपत्‍नी" कहेंगे क्या कोई?

पदनाम एक ही होते हैं, चाहे स्त्री हो या पुरुष।



On 12 जून, 16:03, "दिनेशराय द्विवेदी" <drdwive...@gmail.com> wrote:
> मैं हरिराम जी की बात से सहमत हूँ। ......प्रार्थी अगर स्त्री या लड़की हो तो वहां प्रार्थिया लिखा

आलोक कुमार

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Jun 13, 2008, 9:19:35 AM6/13/08
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क्योंकि अगर पुरुष प्रेसिडेण्ट को "राष्ट्रपति" कहते हैं।
तो महिला प्रेसिडेण्ड को "राष्ट्रपत्‍नी" कहेंगे क्या कोई?

पदनाम एक ही होते हैं, चाहे स्त्री हो या पुरुष।

नहीं, यह हम मान सकते हैं पर व्याकरण के जरिए से तो यह सही नहीं है।
बल्कि, इन्दिरा गाँधी के प्रधानमन्त्री बनने पर चर्चा हुई थी कि पद को प्रधानमन्त्राणी कहना चाहिए या नहीं, अन्ततः फैसला हुआ था कि नहीं। लेकिन व्याकरण की दृष्टि से यही सही था।
राजा को रानी नहीं कहते हैं हम, न रानी को राजा। ये भी पदनाम ही हैं।

--
Can't see Hindi? http://devanaagarii.net

दिनेशराय द्विवेदी

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Jun 13, 2008, 9:32:25 AM6/13/08
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आलोक जी की बात सही है। लेकिन भाषा पहले अस्तित्व में आती है, व्याकरण बाद में। व्याकरण वस्तुतः किसी भी भाषा के नियमों का संकलन है।  और ऐसा भी नहीं कि व्याकरण के नियमों के अपवाद नहीं होते। हर भाषा में होते हैं। उन की संख्या भी कम नहीं होती। भाषा जड़ नहीं होती वह बहती हुई होती है। वह स्वयं को निरंतर नई आवश्यकता के अनुरूप बदलती भी रहती है। इस कारण से मूल नियमों को छोड़ कर व्याकरण के नियमों में भी परिवर्तन होता है। शब्दों में तो यह परिवर्तन तेजी से होता है। समय के साथ शब्द अपने अर्थ भी बदलते हैं। समाचार पत्रों ने हिन्दी को बहुत बदला है। भारतेंदु के समय की भाषा आज अजनबी लगने लगती है। जो भाषा अपने को बदलना बंद कर देती है। वह लोक से दूर होती जाती है और पुस्तकों में बन्द हो जाती है। चाहे वह कितनी ही सक्षम या समृद्ध क्यों न हो।
तो फिर हम नये प्रयोग क्यों न करें, भाषा को और समृद्ध बनाने के लिए, इस की जीवन्तता के लिए।

narayan prasad

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Jun 13, 2008, 9:49:51 AM6/13/08
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रानी कहने से यह स्पष्ट नहीं होता है कि वह केवल राजा की पत्नी है या वस्तुतः शासन सँभालनेवाली ।
आचार्या = आचार्य के समान ही अध्यापन कार्य करनेवाली स्त्री
आचार्याणी = आचार्य की पत्नी (वह अनपढ़ भी हो सकती है)


2008/6/13, आलोक कुमार <alok....@gmail.com>:
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