कोई हिन्दी का जासूस है क्या?

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sanjay | जोग लिखी

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Dec 29, 2009, 11:49:16 PM12/29/09
to Chithakar | चिट्ठाकार
बात अय्यारी की आए तो देवकीनन्दनजी की चन्द्रकांता ही सामने आती है.
बांग्ला में व्योमकेश बक्षी उपलब्ध है, वैसे ही हिन्दी का कोई पात्र नजर
नहीं आता. आपको कोई पता है क्या?

Sagar Nahar

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Dec 30, 2009, 8:32:59 AM12/30/09
to chit...@googlegroups.com
जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा को नहीं पढ़ा आपने?
उनके लगभग  दो सौ से ज्यादा उअप्न्यासों के पात्र हैं, जगन, जगत, जयन्त, राजेश, बन्दूक सिंह आदि...लेकिन एक खास बात है कि शर्माजी के पात्र कभी भी बिना वजह हथियार नहीं उठाते; जैसे वेदप्रकाश शर्मा के विकास ब्लेड से चीर कर कपड़े की तरह अपराधी को टांग देते हैं।

सागर चन्द नाहर
www.nahar.wordpress.com ॥दस्तक॥
www.techchittha.blogspot.com तकनीक
www.mahaphil.blogspot.com  गीतों की महफिल


2009/12/30 sanjay | जोग लिखी <sanjay...@gmail.com>
बात अय्यारी की आए तो देवकीनन्दनजी की चन्द्रकांता ही सामने आती है.
बांग्ला में व्योमकेश बक्षी उपलब्ध है, वैसे ही हिन्दी का कोई पात्र नजर
नहीं आता. आपको कोई पता है क्या?

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Amit Gupta

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Dec 30, 2009, 9:30:02 AM12/30/09
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2009/12/30 Sagar Nahar <sagar...@gmail.com>

जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा को नहीं पढ़ा आपने?
उनके लगभग  दो सौ से ज्यादा उअप्न्यासों के पात्र हैं, जगन, जगत, जयन्त, राजेश, बन्दूक सिंह आदि...

जगत का किरदार एक ठग का किरदार है न कि जासूस का। :)

बाकी - सुरेन्द्र मोहन पाठक का प्रचलित किरदार सुनील है जो कि एक अख़बार का इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर है। ऐसे ही उनका एक शाहकार है सुधीर कुमार कोहली जो कि एक प्राईवेट जासूस है।

बाकी हिन्दी में जेम्स हेडली चेज़ के उपन्यास भी मिल जाएँगे जो कि अंग्रेज़ी उपन्यासों का हिन्दी अनुवाद हैं।

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http://amitgupta.in/

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल ।   -- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

Jitendra Chaudhary

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Dec 30, 2009, 10:04:43 AM12/30/09
to chit...@googlegroups.com
बचपन मे बच्चों के उपन्यास पढते थे, उसमे राजन इकबाल, राम-रहीम जैसे किरदार हुआ करते थे। राजन-इकबाल तो अच्छे खासे प्रसिद्द थे। वेदप्रकाश शर्मा के विजय-विकास भी जासूस थे, फिर केशव पंडित भी अच्छा किरदार था।

2009/12/30 Amit Gupta <cool...@gmail.com>

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दिनेशराय द्विवेदी

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Dec 30, 2009, 10:22:15 AM12/30/09
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मैं जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का  फैन हूँ। मैं ने उन के लगभग सभी उपन्यास पढ़े  हैं। दुर्भाग्य कि इस समय  मेरे पास एक  भी उपलब्ध  नहीं है। उन्हों ने जासूसी ही नहीं बल्कि सामाजिक  और साहित्यिक  उपन्यास भी लिखे हैं। नज़ीर अकबराबादी  के  जीवन पर लिखा गया उन  का उपन्यास दूसरा ताजमहल तो उल्लेखनीय कृति है।  यदि उन्हों ने सैंकड़ों की संख्या में जासूसी  उपन्यास न लिखे होते तो उसे साहित्यिक जगत  में एक विशेष स्थान प्राप्त  होता। वे मेरठ के थे।  पिछली दिल्ली यात्रा में जब खुशदीप मिले थे तो वहाँ शर्मा जी का उल्लेख हुआ था और मैं ने उन्हें कहा था कि मैं उन की सभी पुस्तकें प्राप्त करना चाहता हूँ।

2009/12/30 Sagar Nahar <sagar...@gmail.com>



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दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
अनवरत<> http://anvarat.blogspot.com/
तीसरा खंबा<> http://teesarakhamba.blogspot.com/
Law & Life<> http://judisndia.blogspot.com/

Sagar Nahar

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Dec 30, 2009, 10:49:04 AM12/30/09
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2009/12/30 दिनेशराय द्विवेदी <drdwi...@gmail.com>

मैं जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा का  फैन हूँ। मैं ने उन के लगभग सभी उपन्यास पढ़े  हैं। दुर्भाग्य कि इस समय  मेरे पास एक  भी उपलब्ध  नहीं है। उन्हों ने जासूसी ही नहीं बल्कि सामाजिक  और साहित्यिक  उपन्यास भी लिखे हैं। नज़ीर अकबराबादी  के  जीवन पर लिखा गया उन  का उपन्यास दूसरा ताजमहल तो उल्लेखनीय कृति है।  यदि उन्हों ने सैंकड़ों की संख्या में जासूसी  उपन्यास न लिखे होते तो उसे साहित्यिक जगत  में एक विशेष स्थान प्राप्त  होता। वे मेरठ के थे।  पिछली दिल्ली यात्रा में जब खुशदीप मिले थे तो वहाँ शर्मा जी का उल्लेख हुआ था और मैं ने उन्हें कहा था कि मैं उन की सभी पुस्तकें प्राप्त करना चाहता हूँ।


मेरे पापाजी भी शर्माजी के फैन थे, जब  मैं, पांचवी छठी में पढ़ता था तब हमारे घर में शर्मा जी के दो सौ से ज्यादा उपन्यास थे। मैने छुप छुप कर सारे पढ़े और उसके बाद शर्मा जी का ऐसा फैन हुआ कि आज दूसरे उपन्यास लेखक की  पुस्तक पढ़ना अच्छा नहीं लगता।
जैसा कि आपने बताया  साहित्यिक  जगत में......शर्मा जी ने  कई ऐसे उपन्यास लिखे  जो साहित्य से कहीं भी  कमतर ना थे। ऐसा ही एक उपन्यास मेरा सबसे पसंदीदा है, सांझ हुई घर आये। इसके अलावा नया संसार, पिशाच सुन्दरी  आदि बहुत से हैं कईयों के तो नाम भी अब याद नहीं आते।
मैं भी उन सब उपन्यासों को अगर मिले तो सब के सब  पाना चाहूंगा।

ePandit | ई-पण्डित

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Dec 30, 2009, 7:23:25 PM12/30/09
to chit...@googlegroups.com
ओमप्रकाश शर्मा और सुरेन्द्र मोहन पाठक के एक दो उपन्यास बहुत पहले मैंने भी पढ़े थे पर नाम याद नहीं। १२वीं कक्षा के दौरान तथा कॉलेज के समय मैं जेम्स हेडली चेइज के उपन्यासों का दीवाना था। उनके कवर पन्ने पर सुन्दरियों के चित्र होते थे, सो उस पर अखबार चढ़ा कर घरवालों से छुपाकर पढ़ने पढ़ते थे। बाद मैं उनके नये उपन्यास आने बन्द हो गये।
उनकी तुलना मे भारतीय लेखकों के उपन्यास पढ़ने में आन्नद ही न आता था। फिर टीवी और फिल्मों की सुलभता के बाद इस शौक का स्थान हॉलीबुड फिल्मों ने ले लिया।

३० दिसम्बर २००९ ९:१९ PM को, Sagar Nahar <sagar...@gmail.com> ने लिखा:
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Shrish Benjwal Sharma (श्रीश बेंजवाल शर्मा)
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Dr.Durgaprasad Agrawal

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Dec 30, 2009, 11:03:38 PM12/30/09
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एक ज़माने में मैंने कर्नल रंजीत के लगभग सारे जासूसी उपन्यास पढ़ डाले थे. कह जाता है कि कर्नल रंजीत नाम से कोई और लिखा करता था.

उसी ज़माने में सुरेंद्र मोहन पाठक भी लिखा क्रते थे. मुझे उनके उपन्यास, खास तौर पर उनका अन्दाज़े-बयां बहौत अच्छा लगता था.

अब मुझे तो लगता है कि हिंदी में इस तरह के पल्प फिक्शन का ज़माना ही बीत गया है.

Dr. D.P. Agrawal
E-2/211, Chitrakoot,
JAIPUR-302 021
Phone 0141-2440782
Mobile: 9829532504.


--- गुरु, 31/12/09 को, ePandit | ई-पण्डित <sharma...@gmail.com> ने लिखा:

> द्वारा: ePandit | ई-पण्डित <sharma...@gmail.com>
> विषय: Re: [चिट्ठाकार] कोई हिन्दी का जासूस है क्या?
> To: chit...@googlegroups.com
> दिनांक: गुरुवार, 31 दिसंबर, 2009, 5:53 AM


The INTERNET now has a personality. YOURS! See your Yahoo! Homepage. http://in.yahoo.com/

sanjay | जोग लिखी

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Dec 30, 2009, 11:53:52 PM12/30/09
to Chithakar | चिट्ठाकार
सुरेन्द्र मोहन पाठक के सुनिल सिरिज के लगभग सारे उपन्यास मैनें भी पढ़े
है. मगर क्या ऐसी कृतियों को शरलाक होम्स की श्रेणी में रख सकते है? अगर
हाँ तो कर्नल रणजीत सहित ऐसे बहुत से किरदार मिल जाएंगे. अन्यथा एक भी
नहीं. दरअसल किताबी जासूसों की सूची देख रहा था उसमें हिन्दी वाला एक भी
नहीं था. अतः यहाँ जानकारी के लिए पूछा.

Amit Gupta

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Dec 31, 2009, 2:48:42 AM12/31/09
to chit...@googlegroups.com

2009/12/31 ePandit | ई-पण्डित <sharma...@gmail.com>

ओमप्रकाश शर्मा और सुरेन्द्र मोहन पाठक के एक दो उपन्यास बहुत पहले मैंने भी पढ़े थे पर नाम याद नहीं। १२वीं कक्षा के दौरान तथा कॉलेज के समय मैं जेम्स हेडली चेइज के उपन्यासों का दीवाना था। उनके कवर पन्ने पर सुन्दरियों के चित्र होते थे, सो उस पर अखबार चढ़ा कर घरवालों से छुपाकर पढ़ने पढ़ते थे। बाद मैं उनके नये उपन्यास आने बन्द हो गये।

जेम्स हेडली चेज़ के उपन्यासों का हिन्दी अनुवाद सुरेन्द्र मोहन पाठक ने ही किया था :)

Amit Gupta

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Dec 31, 2009, 2:52:22 AM12/31/09
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2009/12/31 sanjay | जोग लिखी <sanjay...@gmail.com>

सुरेन्द्र मोहन पाठक के सुनिल सिरिज के लगभग सारे उपन्यास मैनें भी पढ़े
है. मगर क्या ऐसी कृतियों को शरलाक होम्स की श्रेणी में रख सकते है?

एक सुनील सीरीज़ ही है जिसकी कहानियों और प्लॉट की इतनी औकात होती है कि उसकी तुलना शरलॉक होम्स से की जा सके। अन्यथा शरलॉक होम्स और हरक्यूल पॉयराट की तुलना के जासूस तो अंग्रेज़ी उपन्यासों में भी नहीं मिलेंगे। :)

Rajesh Roshan

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Dec 31, 2009, 3:30:37 AM12/31/09
to chit...@googlegroups.com
सुरेंद्र मोहन पाठक लिखते तो जासूसी नॉवेल हैं लेकिन सुनी‍ल सीरीज का सुनील पत्रकार है ना कि जासूस... मैंने कुछ उपन्‍यास तो पढ़ी हैं उसकी हलिया उपन्‍यास नकाब है, जो मैंने पढ़ी है. बाकी उपन्‍यासों से इनकी कीमत बढ़कर 60 रुपये हो गई है.

2009/12/31 Amit Gupta <cool...@gmail.com>
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Rajesh Roshan
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9350239304

Amit Gupta

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Dec 31, 2009, 5:35:51 AM12/31/09
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2009/12/31 Rajesh Roshan <rajr...@gmail.com>

सुरेंद्र मोहन पाठक लिखते तो जासूसी नॉवेल हैं लेकिन सुनी‍ल सीरीज का सुनील पत्रकार है ना कि जासूस...

Anand D

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Jan 3, 2010, 1:00:06 AM1/3/10
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सुरेंद्र मोहन पाठक का सुधीर कोहली पक्‍का जासूस है। उसका धंधा, उसका सारा एप्रोच ही जासूसी का है। यह पात्र सुनील की अपेक्षा ज्‍यादा रीयल है।
 
- आनंद
 


 
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दिनेशराय द्विवेदी

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Jan 3, 2010, 1:32:29 AM1/3/10
to chit...@googlegroups.com
कर्नल रंजीत के मेजर बलवंत के मुकाबले कोई भी प्रोफेशनल जासूसी पात्र हिन्दी में नहीं है, जिस के पास सहायकों की पूरी टीम है। वे सभी सजीव पात्र लगते हैं। जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा के पात्रों में राजेश एक आदर्श जासूस है। 

2010/1/3 Anand D <anan...@gmail.com>
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