स्वागत

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Debashish

unread,
Jan 4, 2006, 2:25:37 AM1/4/06
to Chithakar
समूह के नये सदस्य ग्रेग
गोल्डिंग http://stillingstilldreaming.blogspot.com/
का स्वागत!

greg.g...@gmail.com

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Jan 4, 2006, 4:36:43 PM1/4/06
to Chithakar
बहुत धन्यवाद। इस ग्रूप के
सदस्य बनने से बहुत ख़ुशी
हुई।

Pankaj Narula

unread,
Jan 4, 2006, 8:21:54 PM1/4/06
to Chit...@googlegroups.com
ग्रेग भैया नाम से धोखा भी हो सकता है पर क्या आप भारतीय हैं? नाम देख कर थोड़ा कौतुहल हुआ।

पंकज
--
Pankaj Narula
http://pnarula.com | Beta Thoughts
http://ms.pnarula.com | Mirchiseth

ग्रेग गूलदिंग

unread,
Jan 5, 2006, 11:00:22 AM1/5/06
to Chithakar
पंकज भेया मेरा नाम धोखा
नहीं - मैं अम्रीकी हूँ;
बोस्तन में पैदा हुआ। दरअसल
मैं 'धोखा' और 'कौतुहल' के
मतलब नहीं जनता था, इसलिए
शबकोष में अर्थ खोजना
चाहिए। मैं अब पंच साल से
हिंदी पढ़ रहा हूँ और लिखने
के अभ्यास के लिए हिंदी
ब्लोग शुरू की। मुझे हमेशा
परेशान है कि मैं इतना
गलतियाँ करुँगा कि किसी
नहीं को समझ आयेगी। फ़िर भी
आशा है कि मैं कुच माज़ा ला
सकता हूँ
हिन्दी-ब्लोगोस्फ़ीर में।

Kanishk

unread,
Jan 5, 2006, 4:38:52 PM1/5/06
to Chit...@googlegroups.com

वाह वाह ग्रेग साहब।

आपका हिंदी चिट्ठा जगत

(ब्लोगोस्फेयर) में स्वागत है। चिट्ठा लिखने से शर्तिया ही हिंदी लिखने का विकास होगा।

गलतियों की चिंता मत कीजिए, वह तो हर इंसान से होती हैं।

बस लिखते रहिये।

‍कनिष्क

parag mandle

unread,
Jan 5, 2006, 11:46:56 PM1/5/06
to Chit...@googlegroups.com


भाई ग्रेग

तुम्हें अपने प्रयासों के लिये बहुत-बहुत बधाई.

तुम्हारे ब्लोग ने हिन्दी प्रेमियों के उत्साह को बढ़ा दिया है.

निश्चय ही बहुत जल्दी तुम बढ़िया हिन्दी लिखने लगोगे.

पराग

http:/beech-bazaar.blogspot.com

sanjay | जोग लिखी

unread,
Jan 5, 2006, 11:54:15 PM1/5/06
to Chithakar
सचमुच ग्रेग साहब आपको पढ कर
(आपका लिखा पढ कर) मजा आ रहा
हैं,गल्तीयों की चिन्ता
छोडीये बस लिखते रहीये.

HindiPremi

unread,
Jan 6, 2006, 12:57:11 AM1/6/06
to Chithakar
अरे ग्रेग भैया आप गल्तियों
की तो बिल्कुल फिकर मत करो
हमारे हिंदी के टीवी चैनल
वालों, टीवी कलाकारों, फिल्म
कलाकारों से तो आप करोड़
गुना अच्छे हैं कि कम से कम
हिंदी में लिखने की कोशिश कर
रहे हैं...हमारे ये भाई तो
हिंदी की रोटी (नहीं मलाई)
खाने के बावजूद न तो हिंदी
पढ़ सकते हैं न लिख सकते
हैं...बेचारे हिंदी तभी पढ़
पाते हैं जब उसे रोमन
अंग्रेजी में लिखा जाए..गर
आप जैसे अंग्रेजी भाई हिंदी
लिखने लगोगे तो हमारे इन
हिंदी भाई बहनों को कुछ तो
शर्म आएगी...बस अपनी टूटी
फूटी हिंदी में और लिखें
हमें पढ़ने में मजा
आएगा...आपकी हिंदी ठीक ऐसी ही
है जैसे घर के उस छोटे बच्चे
की, घर में छोटा बच्चा बोलने
की शुरुआत करता है तो ऐसी ही
हिंदी बोलता है आप अब हमारे
घर के एक सम्माननीय सदस्य
हैं...अपनी हिंदी हम पर
बरसाते रहिए यकीन मानिए
हमको तोमजा आएगा ही आप हमारे
देसी हिंदी वालों के लिए
ज़बर्दस्त प्रेरणा का काम
करेंगे....

ग्रेग गूलदिंग

unread,
Jan 6, 2006, 4:32:30 AM1/6/06
to Chithakar
सब लोगों को बहुत धन्यवाद
अपने दिल के तल से (शायद वह
अंग्रेज़ी है फ़ीर भी सच)।
जितनी ख़ुश आप लोगों की
शब्दों ने मुझको लायीं हैं
उतनी मैं नहीं बता सकता हूँ।
इस के पहले मुझे महसूस था कि
मैं हिंदी पढ़ने में अकेला
था, पर अभी मुझे बिलकुल
महसूस है कि मैं इस समूह का
सदस्य हूँ। धन्यवाद।

मैं इस के बारे में एक नया
पोस्ट लिखा हूँ आशा है कि आप
लोग पढ़ेगे।

ग्रेग

stillingstilldreaming.blogspot.com

रमण

unread,
Jan 6, 2006, 8:53:03 AM1/6/06
to Chithakar
"तहे-दिल से" सही है।
स्वागत है हिन्दी ब्लॉग जगत
में एक और ग़ैर-भारतीय का।
जापान के मत्सु
(http://namaste20matsu.blogspot.com/) पहले ही
लिखते हैं।
Goulding के d को हम हिन्दी वाले ड
लिखते हैं, इस लिए आप का नाम
गूल्डिंग बना। नहीं?

ग्रेग गूलदिंग

unread,
Jan 7, 2006, 3:23:06 AM1/7/06
to Chithakar
बिलकुल 'ड' है, बूला गया कि
अपनी ही नाम! मुश्किल है कि
हालाँकि मेरे कान में अपने
नाम में 'द" की आवाज़ देता है
फ़ीर भी 'ड' का अक्षर सही है
अंग्रेज़ी (या आइरलंड) के
नामों के लिए... मत्सु की
ब्लोग बहुत दिलचस्प लगती है,
हम दोनों को आशा है कि एक दिन
हमारी हिंदी भाषा से कुछ काम
आएगा :)
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