'हंस' पत्रिका के बारे में शंका

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Anunad Singh

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Aug 27, 2009, 10:48:43 AM8/27/09
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क्या वर्तमान में  श्री राजेन्द्र यादव द्वारा  सम्पादित 'हंस' कथा मासिक  वही  पत्रिका है जिसे  कथा-सम्राट प्रेमचन्द  ने  आरम्भ किया था?  मुझे इसके उतर में अन्तरजाल पर  दोनो तरह के उत्तर प्राप्त हो रहे हैं।

यदि वर्तमान पत्रिका  अलग  है तो  प्रेमचन्द का हंस क्या अब बन्द हो चुका है?

-- अनुनाद

jagdish vyom

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Aug 27, 2009, 10:54:38 AM8/27/09
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प्रेमचन्द का हंस तो बहुत पहले हवा हो चुका है

, यह हंस वो हंस तो बोल्कुल नहीं है।

२७ अगस्त २००९ ७:४८ AM को, Anunad Singh <anu...@gmail.com> ने लिखा:
क्या वर्तमान में  श्री राजेन्द्र यादव द्वारा  सम्पादित 'हंस' कथा मासिक  वही  पत्रिका है जिसे  कथा-सम्राट प्रेमचन्द  ने  आरम्भ किया था?  मुझे इसके उतर में अन्तरजाल पर  दोनो तरह के उत्तर प्राप्त हो रहे हैं।

यदि वर्तमान पत्रिका  अलग  है तो  प्रेमचन्द का हंस क्या अब बन्द हो चुका है?

-- अनुनाद



--
डा० व्योम

Anunad Singh

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Aug 28, 2009, 3:47:23 AM8/28/09
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नयी  'हंस'  पत्रिका कब शुरू की गयी थी? क्या इसकी शुरूआत  श्री राजेन्द्र यादव  ने  ही किया था?

ज़ाकिर अली “रजनीश”

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Aug 29, 2009, 1:14:38 AM8/29/09
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Haan, ye vahu hans hai, jise PREMCHAND ne shuru kiya tha.

Anunad Singh

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Aug 29, 2009, 3:28:18 AM8/29/09
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भाई जाकिर ने अलग  जानकारी देकर इस शंका को  फिर 'प्रश्न' बना दिया है।  कोई बन्धु  इस पर कुछ विस्तार से प्रकाश डालें तो अच्छा हो।

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२९ अगस्त २००९ १०:४४ AM को, ज़ाकिर अली “रजनीश” <zaki...@gmail.com> ने लिखा:

Kakesh Kumar

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Aug 29, 2009, 3:49:50 AM8/29/09
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जहाँ तक मेरी जानकारी है.

हँस को प्रेमचन्द ने शुरु किया था। कालान्तर में यह बन्द  हो गयी। जिसे राजेन्द्र यादव ने अक्षर प्रकाशन (शायद) के द्वरा फिर से शुरु किया . हँस के आवरण पृष्ठ में अभी भी संस्थापक प्रेमचन्द लिखा रहता है। यह दुबारा कब शुरु हुई यह नहीं मालूम।

काकेश
-- 
धन्यवाद सहित
सादर

काकेश
http://kakesh.com

narayan prasad

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Aug 29, 2009, 10:36:24 AM8/29/09
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<<यह दुबारा कब शुरु हुई यह नहीं मालूम। >>
 

Rajendra Yadav (राजेन्द्र यादव) (born 1929) is one of the eminent Hindi fiction writers ... He edits the famous literary magazine HANS, which was originally founded by Munshi Premchand in 1930, and which continued publication till 1953, thereafter it was relaunched by Rajendra Yadav on July 31, 1986, (Premchand's Birthday), who has remained its editor ever since, and the magazine reached 17,000 mark in 2005.

२९ अगस्त २००९ १:१९ PM को, Kakesh Kumar <kakes...@gmail.com> ने लिखा:

narayan prasad

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Aug 29, 2009, 10:54:34 AM8/29/09
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