चिट्ठाजगत को लोकमंच की खुली चिट्ठी

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shashi singh

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Mar 6, 2007, 10:13:51 AM3/6/07
to Chithakar
प्रिय चिट्ठाकार बन्धुओं,
सादर नमस्कार।

ईश कृपा से आप सभी के स्वस्थ और सानन्द होने की कामना करता हूँ। पिछले
एकाधिक मास से आपको लोकमंच चिट्ठा देखने, पढ़ने और इस पर अपनी राय बनाने
का अवसर मिला होगा। लोकमंच ने अब अपना स्वरूप कुछ बदला है जो सामग्री और
सज्जा दोनों ही दृष्टियों से है।

www.lokmanch.com की आरम्भिक परिकल्पना नवम्बर मास में हमारे मस्तिष्क
में आई और जनवरी के मध्य में हमने इसे क्रियात्मक स्वरूप दिया। लोकमंच की
अवधारणा इस चिन्तन पर केन्द्रित है कि स्वतन्त्र चिट्ठाकारों को एक
व्यापक मंच प्रदान कर चिट्ठाकारिता के पाठक वर्ग के साथ पत्रकारिता के
पाठक वर्ग को भी जोड़ा जाये ताकि पत्रकारिता साहित्योन्मुख, जनोन्मुख और
राष्ट्रीय सरोकारों से जुड़ सके। स्वतन्त्र चिट्ठाकारिता या ब्लाग एक
सामयिक सृजन है जिसने बाजारवादी मानसिकता में छटपटाती बौद्धिक चेतना में
से जन्म लिया है। आज चिट्ठाकारिता या ब्लाग तथाकथित दिग्भ्रमित मुख्यधारा
की पत्रकारिता के समक्ष चुनौती के रूप में खड़ा है।

आज स्वतन्त्र रूप में अनेक चिट्ठाकार स्वान्त: सुखाय या समाज के प्रति
अपने दायित्वों की पूर्ति में लेखन में संलग्न हैं। इन चिट्ठाकारों को एक
साथ आने का समय आ गया है। इस प्रकार के सामूहिक चिट्ठाकारिता के प्रयास
अक्षरग्राम, नारद, चिट्ठा-चर्चा, हिन्द-युग्म के माध्यम से हो चुके हैं
और इनके प्रयास अत्यन्त सराहनीय हैं और साधुवाद के पात्र हैं परन्तु
चिट्ठाकारों की रचनात्मकता को पत्रकारिता से जोड़कर उनके पाठकों की
संख्या बढ़ाने का अवसर आ गया है। पत्रकारिता की विधा से जुड़े व्यक्ति और
पाठक अब चिट्ठाकारिता को भी पत्रकारिता की एक नई विधा के रूप में स्वीकार
करें ताकि जनता की वास्तविक संवेदना को पत्रकारिता का अंग बनाया जा सके।

व्यक्तिगत आधार पर चिट्ठाकार जिन विषयों को उठाते हैं वे आपस में मिलकर
एक व्यापक राष्ट्रीय बहस को जन्म देते हैं जो सभी वर्गो, पक्षों का
प्रतिनिधित्व करती प्रतीत होती है। आज देश के समक्ष यदि कोई सबसे बड़ा
संकट है तो वह है बाजारी मानसिकता के चलते शासन प्रशासन सर्वत्र आम आदमी
की भावनाओं की अनदेखी। पत्रकारिता में भी बाजारी चमक दमक के बीच जनता की
आवाज दब जाने के बाद इस कमी को चिट्ठाकारों ने बखूबी पूरा किया है। अब
इन्हीं चिट्ठाकारी को पत्रकारिता की एक नई विधा बनाने का अवसर आ गया है
ताकि पत्रकारिता जनता और राष्ट्र से सीधे जुड़ सके।

लोकमंच ने पत्रकारिता और चिट्ठाकारिता के अपूर्व समन्वय से जाल की दुनिया
में हिन्दी को लोकप्रिय बनाने का भगीरथ प्रयास अपने हाथ में लिया है।
हमारी अपेक्षा है कि हमें आप चिट्ठाकारों का सहयोग मिलेगा और आप लोकमंच
को अपना योगदान देकर चिट्ठाकारिता की दुनिया में एक अभिनव प्रयोग का
मार्ग प्रशस्त करेंगे।

लोकमंच किसी संगठन या विचारधारा विशेष द्वारा संचालित नहीं है इसका
एकमात्र उद्देश्य सभी रचनाधर्मियों की रचनात्मकता को प्रकाश में लाकर
उन्हें समस्त विश्व में आलोकित करना है ताकि जाल पर हिन्दी समृद्धतम भाषा
के रूप में विकसित हो सके।

आपका
अमिताभ त्रिपाठी
शशि सिंह

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