जैसा कि न्यायालय, उच्चतम न्यायालय द्वारा कई कानूनों, आदेशों में
'अश्लील' शब्दों, पदों आदि का बोलना, लिखना वर्जित कर दण्ड विधान किया
गया है, तो क्या न्यायालय/सरकार द्वारा ऐसे वर्जित शब्दों, पदों की सूची
आम जनता की जानकारी के लिए उपलब्ध कराई गई है? चूँकि एक शब्द के अनेक
अर्थ होते हैं, आम जनता कैसे समझेगी कौन सा शब्द कानूनन वैध है, कौन सा
अवैध? आम जनता गलती से ऐसे शब्दों को बोलने लिखने पर दण्ड की पात्र बनने
से कैसे बच सकेगी?
यदि न्यायालय/सरकार द्वारा ऐसे शब्दों की कोई सूची निर्धारित नहीं की गई
है तो क्या न्यायालय के ऐसे आदेश मानवीय नैतिकता के आधार पर अपने आप ही
रद्द नहीं माने जाएँगे?