जियोसिटीज़ - एक युग का अंत

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आलोक | Alok

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Sep 30, 2009, 7:47:10 AM9/30/09
to Chithakar | चिट्ठाकार
अगला महीना जियोसिटीज़ की सेवा का आखिरी महीना है।

क्या पूछा आपने, जियोसिटीज़ क्या है? :)

एक वाक्य में कहे तो यह अपने ज़माने का ब्लॉग्स्पॉट था।

अभी भी हिन्दी के कम से कम ३२ स्थल हैं जो जियोसिटीज़ पर हैं।
http://search.dmoz.org/cgi-bin/search?search=geocities&all=no&cs=UTF-8&cat=World%2FHindi
अगर आप इनमें से किसी के स्वामी हैं, या स्वामी को जानते हैं, या आपको
लगता है कि यह सामग्री जाल पर रहनी चाहिए, तो कृपया इनके स्वामियों से
संपर्क कर के इसे कहीं और ले जाने के लिए प्रेरित करें, और यहाँ
पुनर्निर्देशन कड़ियाँ डालने को कहें।

२६ अक्तूबर २००९ तक का समय है।

धन्यवाद।

अनूप शुक्ला

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Sep 30, 2009, 7:51:28 AM9/30/09
to chit...@googlegroups.com
इसके बारे में एक पोस्ट भी लिख देते तो अ्च्छा रहता जनता के लिये।

2009/9/30 आलोक | Alok <alok....@gmail.com>

ePandit Shrish

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Sep 30, 2009, 8:18:42 AM9/30/09
to chit...@googlegroups.com
Some wise man told once me, "Every s/w has a life cycle".
Although I did not use Geocities too much but made my first webpage on
it. It was a beloved of millions.
Goodbye Geocities.

३०-९-०९ को, अनूप शुक्ला <anup...@gmail.com> ने लिखा:


--
Shrish Benjwal Sharma (श्रीश बेंजवाल शर्मा)
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
If u can't beat them, join them.

ePandit: http://epandit.blogspot.com/

Amit Gupta

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Sep 30, 2009, 8:23:53 AM9/30/09
to chit...@googlegroups.com
नब्बे के दशक के अंत में और इस दशक के शुरुआती 1-2 वर्षों में फोकटी होमपेज बनाने वाली सेवाओं का बुखार था जो कि 2002 के बाद से लगभग समाप्त हो गया था।

जियोसिटीज़ से पहले लाएकास का ट्रॉयपाड लोगों का पसंदीदा था किसी ज़माने में, ऐसे ही किसी ज़माने में एन्जलफॉयर भी था। इनके मुकाबले देखा जाए तो जियोसिटीज़ की उम्र काफ़ी अधिक रही, एक दशक से कुछ अधिक! :)

--
http://amitgupta.in/

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल ।   -- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

Ravishankar Shrivastava

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Sep 30, 2009, 11:09:35 AM9/30/09
to chit...@googlegroups.com


३० सितम्बर २००९ ५:१७ PM को, आलोक | Alok <alok....@gmail.com> ने लिखा:

धन्यवाद, स्मरण के लिए.
इनमें एक पेज स्वर्गीय धनंजय शर्मा का भी है. मैं उसे नेट पर कहीं और टिकाता हूं एकाध दिन में.
--
सधन्यवाद,
रवि
http://raviratlami.blogspot.com/
http://rachanakar.blogspot.com/

ई-स्वामी

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Sep 30, 2009, 11:19:31 AM9/30/09
to chit...@googlegroups.com
सच!
दोनो ही बातें हैं .. एक तरफ़ तो ये एक महान सुविधा थी वहीं दूसरी तरफ़ बुरी HTML और बेढब पन्नों के जितने उदाहरण जियो और एन्जल्फ़ायर पे थे और कहीं नहीं :)
हां अपने ब्लागजगत के कुछ ब्लाग्स की फ़ॉन्ट्स और रंग भी माश-अल्लाह उसी जमाने की याद ताजा कर देती हैं! :)

2009/9/30 Ravishankar Shrivastava <ravir...@gmail.com>



--
http://hindini.com
http://hindini.com/eswami

narayan prasad

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Sep 30, 2009, 11:20:11 AM9/30/09
to chit...@googlegroups.com
http://blog.co.in स्थल पर स्थानान्तरित करना बेहतर होगा ?

३० सितम्बर २००९ ८:३९ PM को, Ravishankar Shrivastava <ravir...@gmail.com> ने लिखा:
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