जिन्हें संसद की गरिमा का ख्याल था, जिन्हें संसद में सिविल सोसाइटी का
दखल पसंद नहीं था, जिन पर संसद की साख बचाने की ज़िम्मेदारी थी, जिनके
सामने इतिहास गढ़ने का मौका था, वे चूक गए और उन्होंने सब कुछ गंवा दिया.
कांग्रेस पार्टी ने लोकपाल पर जो किया, उससे तो यही निष्कर्ष निकलता है
कि देश चलाने वालों में भ्रष्टाचार खत्म करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति
नहीं है. भ्रष्टाचार के अंधकार को खत्म करने के लिए सरकार को क़ानून
बनाना था, लेकिन उसने भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला एक अंधा क़ानून
बनाने की पहल की है.
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