यह लोकतंत्र की सियासी गाथा का स्याह पक्ष है, जहां दाग को अच्छा माना
जाता है. निष्ठा जहां पैसे के आगे दम तोड़ देती है. ईमानदारी जहां बाहुबल
के आगे हार जाती है. यह चुनावी समर है. जहां सब कुछ जायज़ है, बशर्ते आप
ईमानदार न हों, साफ छवि के न हों. यहां जनता हारती है, जीतता है स़िर्फ
पैसा और पावर. क्या है उत्तर प्रदेश के चुनावी महासमर की हक़ीक़त. पढ़िए
इस रिपोर्ट में.
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http://www.chauthiduniya.com/2012/01/dear-everyone-daghi-defectors-and-seth-dnna.html