एक वरिष्ठ मंत्री ने निजी तौर पर बताया कि यह मामला गंभीर राजनीतिक
परिणाम ला सकता है. कुछ मंत्रियों ने खुद को ग़ैर संवैधानिक अथॉरिटीज
वाले कॉकस के आगे बेबस बताया. समझने वाली बात यह है कि हाल के दिनों में
जितने भी घोटाले और षड्यंत्र देखने को मिले हैं, उन सब में इसी ग़ैर
संवैधानिक अथॉरिटीज वाले कॉकस का प्रभाव रहा है. सरकार ने शुरू में धमकी
देकर काम निकालने की सोची. जब ऐसा नहीं हुआ, तब लालच दिखाया. कई दूतों को
भेजकर जनरल को यह संदेश दिलवाया कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें अन्य
सुविधाएं दी जाएंगी. जब इससे भी सरकार जनरल को नहीं खरीद पाई, तब कुछ
मध्यस्थों के सहारे समझौता कराने की कोशिश की गई, लेकिन बीच-बीच में
मीडिया ने इस मामले में कुछ ऐसे पर्दा़फाश किए, जिनसे सरकार की मुश्किलें
बढ़ गईं.
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http://www.chauthiduniya.com/2012/02/case-of-birthdate-of-army-general-government-process-is-suffered-from-ill.html