दोस्तों, यह बहुत ही हैरान करने वाली बात है की-
१-इजरायल के लोग अमेरिका से युद्ध में काम आने वाली हर तकनीक चुरा रहे है, इसमे अमेरिका को कोई परेशानी नहीं है,
२-इजरायल यह तकनीक भारत के सबसे बड़े विरोधी चीन को दे रहा है, यह सच्चाई भी अमेरिका जानता है, चीन विदेश से हथियार नहीं तकनीक खरीदता है जिसमे रॉकेट और उपग्रह तकनीक भी शामिल हैं.
३-और हम है भारत, जो अमेरिका और इजरायल से सिर्फ पुरानी तकनीक उपकरण और हथियार खरीद रहे हैं, दो साल बाद पुनः इससे आगे की तकनीक से बनी चीजे , फिर अगले उससे आगे की तकनीक की चीजे अरबों अरब रुपये में खरीद रहे हैं और इस की कही पर कोई चर्चा तक नहीं होती है. भारत की किसी समझौते में कोई तकनीकी हस्तांतरण समझौता नहीं है सिर्फ रूस के साथ एकाध सौदों में. इसका मतलब हमें अनंतकाल तक विदेशी माल १० गुने दाम खरीदते रहना होगा. इसमे जनता को बेवकूफ बनाया जाता है जब की चीन सिर्फ तकनीक खरीदता है.
अब समझ में आ रहा है की भारत में वैज्ञानिको की ऐसी तैसी क्यों की जाती है, हमारे वैज्ञानिको को दूसरी चीजो में उलझाकर विदेशी माल खरीदने की राह साफ़ की जाती है जो बहुत गंभीर बात है.
क्या आपने कभी ध्यान दिया की भारत सिर्फ बनाए बनाये पुराने तकनीक के उपकरण खरीदता है जबकि चीन सिर्फ अद्यतन तकनीक खरीदता है...क्यों..इसके पीछे क्या राज है....आप हैरान रह जायेंगे ..
अमेरिका और इजरायल चीन से मिलकर हमेशा ही भारत का दोहन बड़ी ही चालाकी से करा रहे हैं जिसमे हमारे भ्रष्ट्र और अदूरदर्शी नेता जो लगभग ३ मुख्या पार्टियों में हैं, शामिल हैं और ये भी समझ में आया की कालाधन सबके पास कैसे आ गया है.
आगे आने वाले दिनों में और खुलासे होंगे......
जय भारत
संजय
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आपने स्वयं और अपने परिवार
के लिए सब कुछ किया, देश के लिए भी कुछ करिये,
क्या यह देश सिर्फ
उन्ही लोगो का है जो सीमाओं पर मर जाते हैं??? सोचिये......