उत्तर प्रदेश में दिलचस्प स्थिति पैदा हो गई है, जहां नीतीश कुमार और शरद
यादव भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के खिला़फ चुनाव प्रचार करेंगे.
अब इसे अंतर्विरोध न कहें तो क्या कहें. जो एनडीए मुसलमानों के खिला़फ
मानी जाती है, वह तो मुसलमानों या सेक्युलरिज्म के हित में काम कर जाती
है, जबकि यूपीए जो मुसलमानों की समर्थक और सेकुलर मानी जाती है, वह
मुसलमानों के खिला़फ काम कर देती है. अब जब यह मांग उठी है कि अगर
मुसलमानों को 9 फीसद आरक्षण की घोषणा में दम है या ईमानदारी है तो क्यों
नहीं कांग्रेस की सरकार, कांग्रेस पार्टी अध्यादेश निकाल कर,
एक्जिक्युटिव ऑर्डर जारी कर आंध्र प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा
में तत्काल प्रभाव से मुसलमानों को 9 फीसदी आरक्षण दे देती है.
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