एक नहीं, देश को कई केजरीवाल चाहिए

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Chauthi Duniya

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Nov 14, 2012, 6:12:17 AM11/14/12
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दो साल पहले तक जयप्रकाश आंदोलन और भ्रष्टाचार के खिला़फ वी पी सिंह के आंदोलन में हिस्सा लेने वाले लोग भी यह कहते थे कि जमाना बदल गया है, अब देश में कुछ नहीं हो सकता. आज के युवा आंदोलन नहीं कर सकते. देश में अब कोई भी आंदोलन संभव नहीं है. देश के बड़े-बड़े राजनीतिक दलों को यह लगा कि देश की जनता अफीम पीकर सो चुकी है और उनकी मनमानी पर अब कोई आवाज़ उठाने वाला नहीं है. यह धारणा गलत साबित हुई. राजनीतिक दल इस बात को भूल गए कि जनता के बर्दाश्त करने की भी एक सीमा है. संकटकाल में ही बदलाव के बीज प्रस्फुटित होते हैं. परिवर्तन की आंधी चलती है, तभी आंदोलन होते हैं, लीडर पैदा होता है.

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