सरकार चलाने का यह अजीबोग़रीब तरीक़ा है. पहले एक समस्या को जन्म दो, उसे
पाल-पोस कर बड़ा करो और उसे बढ़ने दो. फिर मीडिया के ज़रिए उसके खतरे के
बारे में लोगों को बताओ, चिंता जताओ, फिर हाथ खड़े कर दो कि इससे निपटने
के लिए कड़े फैसले लेने होंगे, क़ानून बदलना होगा. ऐसी रणनीति का फायदा
यह हो जाता है कि सांप भी मर जाता है और लाठी भी नहीं टूटती. जन विरोधी
एवं ग़रीब विरोधी नीतियों और क़ानूनों को लागू करने के लिए सरकार हमेशा
इसी रणनीति का इस्तेमाल करती है. इसी तरह राजनीतिक दल और अधिकारी देश की
जनता को मूर्ख बनाने में सफल हो जाते हैं और लोगों को सरकार की नीति
जायज़ और सही लगने लगती है.
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http://www.chauthiduniya.com/2012/03/budget-2012-countrys-economic-crisis.html