यूपीए सरकार की भी दास्तां अजीब है. सुप्रीम कोर्ट कहता है कि दाल में कुछ काला है तो सरकार कहती है कि यही सरकार की नीति है. सीएजी जब कहती है कि घोटाला हुआ है तो सरकार के मंत्री कहते हैं कि सब कुछ नियमों के मुताबिक हुआ और यह जीरो लॉस है. देश के संसाधन लुट जाते हैं. निजी कंपनियां पैसे कमा लेती हैं. मीडिया छाती पीटता रह जाता है और सरकार के मंत्री टीवी पर मुस्कुराते हुए कहते हैं कि प्रधानमंत्री शक के दायरे से बाहर हैं. एक नया घोटाला सामने आया है, लेकिन उम्मीद यही है कि सरकार इसे झुठला देगी या फिर जीरो लॉस थ्योरी जैसा कोई और तर्क सामने रखा जाएगा. लेकिन जब घोटाला 48 लाख करोड़ रुपये का हो तो उसे झुठलाने में कम से कम थोड़ी-बहुत हिचकिचाहट या शर्म तो ज़रूर आएगी.