भविष्य पुराण
प्रतिसर्ग अध्याय5
संस्कृतस्यैव वाणी तु भारतं वर्ष मुह्य्ताम्।
अन्ये खंडे गता सैव मलेच्छा ह्यनन्दिनोsभवत्।।
पितृ पैतरभ्राता च बार: पतिरेव च।
सेति सा यावनी भाषा ह्यश्वश्चास्यस्तथा पुनः॥
हप्तहिन्दुर्यविना च पुनर्ज्ञेया गुरुण्डिका।।
Kesari Singh
Suryavanshi
संस्कृत
वाणी के (शब्द) अन्य देशों में जाने पर दूषित(भ्रष्ट उच्चारण) हो गए जिन्हें
म्लेच्छ भाषा कहा गया।
उस म्लेच्छ भाषा की कई उप भाषाओँ में से एक यावनी भाषा में
सकार का हकार उच्चारण होता था।
वे हम सप्तसिन्धुओं को हप्तहिन्दु सम्बोधित करते थे।
Puran
Prakash Dave
संस्कृतस्यैव
वाणी तु भारतं वर्ष मुह्य्ताम्।
अन्ये खंडे गता सैव मलेच्छा ह्यनन्दिनोsभवत्।।
पितृ पैतरभ्राता च बार: पतिरेव च।
सेति सा यावनी भाषा ह्यश्वश्चास्यस्तथा पुनः॥
हप्तहिन्दुर्यविना च पुनर्ज्ञेया गुरुण्डिका।।........................RIGHT
Kesari Singh Suryavanshi हिन्दू शब्द की उत्पत्ति : हिन्दू धर्म को सनातन, वैदिक या आर्य धर्म भी कहते हैं। हिन्दू एक अप्रभंश शब्द है। हिंदुत्व या हिंदू धर्म को प्राचीनकाल में सनातन धर्म कहा जाता था। एक हजार वर्ष पूर्व हिंदू शब्द का प्रचलन नहीं था। ऋग्वेद में कई बार सप्त सिंधु का उल्लेख मिलता है। सिंधु शब्द का अर्थ नदी या जलराशि होता है इसी आधार पर एक नदी का नाम सिंधु नदी रखा गया, जो लद्दाख और पाक से बहती है। भाषाविदों का मानना है कि हिंद-आर्य भाषाओं की 'स' ध्वनि ईरानी भाषाओं की 'ह' ध्वनि में बदल जाती है। आज भी भारत के कई इलाकों में 'स' को 'ह' उच्चारित किया जाता है। इसलिए सप्त सिंधु अवेस्तन भाषा (पारसियों की भाषा) में जाकर हप्त हिंदू में परिवर्तित हो गया। इसी कारण ईरानियों ने सिंधु नदी के पूर्व में रहने वालों को हिंदू नाम दिया। किंतु पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लोगों को आज भी सिंधू या सिंधी कहा जाता है। ईरानी अर्थात पारस्य देश के पारसियों की धर्म पुस्तक 'अवेस्ता' में 'हिन्दू' और 'आर्य' शब्द का उल्लेख मिलता है। दूसरी ओर अन्य इतिहासकारों का मानना है कि चीनी यात्री हुएनसांग के समय में हिंदू शब्द की उत्पत्ति इंदु से हुई थी। इंदु शब्द चंद्रमा का पर्यायवाची है। भारतीय ज्योतिषीय गणना का आधार चंद्रमास ही है। अत: चीन के लोग भारतीयों को 'इन्तु' या 'हिंदू' कहने लगे।
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निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः।। (भ.गी.)
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