किनना बडडा दान है मिलिआ
सत्गुरु तों सानूँ गिआन है मिलिआ
उनना उनना निरंकार है उसदा
जिनना जिनना ध्यान है जिसदा
आपनी आपनी करनी ते निर्भर
गुरु ने तॉं सबनूं सम ज्ञान है बंडदा
जिसने रखिआ पैर बेड़े बिच
उसदा बेड़ा भवसागर तों ठिलिआ।
माण तककबुर त्याग दिते सब
उसनूं ही मिलदा है रब
वरना कोई नहीं फायदा भगती दा
कर्मकांड ने सब दे सब
दौलत शोहरत दा इस जग ते
भला कदों किनी देर है झंडा झुलिआ
प्यार सत्कार प्रीत मुहब्बत करिए
मिलजुल सारे इबादत करिए
न किसे दा दिल तोड़िए
न किसे नाल नफरत करिए
करमॉं दे होंदे लेखे जोखे
आखिर बीज जिहा फल मिलिआ।