धन निरंकार जी🌹🙏
☀️हम पर आपके एहसान बहुत हैं
जानते तो हैं हम ,मगर नादान बहुत हैं
भुल जाना अच्छा, और बुरा याद रखना
हम इनसानियत का करते,नुकसान बहुत हैं
अच्छाई, समझ, इल्म बहुत है जहान में,बस
आजकल के इन्सान में अभिमान बहुत है
मंजिल पर आसानी से पहुँच तो जाएँ फ़क़त
सर पर हमारे दुनियादारी का सामान बहुत है
“मस्त”लिखकर,कहकर,सुनकर नहीं ए नफीस
बहुत मुश्किल है अधिआतम,लगता जो आसान बहुत है।
आया खयाल बनके
वो
गया सवाल बनके।
मुसररत ख़रीद लाया था
वो
गया मलाल बनके।
यही खुबसूरती थी उसमें
वो
गया जमाल बनके।
लम्हे समेट लाया था
वो
गया है साल बनके
‘मस्त’ किधर गया है
वो
गया कमाल करके।
🙏🌹🙏