Gurmat

0 views
Skip to first unread message

Narinder Kumar

unread,
Apr 17, 2026, 10:21:22 AMApr 17
to dhan nirankar
धन निरंकार जी 

गुरमति बिच रह जो कार है हुंदा सत्गुर नूं ओह स्वीकार है हुंदा 


ऊंच नीच भेद भाव नहीं करदा जो सचमुच दा प्यार है हुंदा 


गललॉं नहीं मुक्ति दा साधन आखिर सच किरदार है हुंदा


जो करदा सत्कार है दिलतों उसदा लाजिम सत्कार है हुंदा


जिस नूं करदी ख़ारिज दुनिया उसदा हाफिज निरंकार है हुंदा


नहीं महदूद ओह इक तबके तक जो सचमुच इसदा यार है हुंदा


“मस्त” गुरू दर झुकके रहिए 

इथे खजल हंकार है  हुंदा। 

Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages