मिहरबान

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Narinder Kumar

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May 28, 2026, 6:03:38 PMMay 28
to dhan nirankar
धन निरंकार जी 🙏

☀️मिहरबान मिहरॉं करी जा रिहा है
झोलियाँ सबदियॉं भरी जा रिहा
है

चुक के ज़मीन तों टूटे होए तारे
असमानॉं (अंबरॉं ते मिहरबॉं)
ते धरी जा रिहा है

अजलॉं तों बिछडियॉं बूंदां जो सागरों
इक मिक समंदर नाल करी जा रिहा है

कोई कुछ भी आखे कोई कुछ भी समझे
कम एह भलाई दे करी जा रिहा है

आओ एहदियॉं पैडां ते चलदे ही चलिए
“मस्त” एह करदा बरी जा रिहा है।
“”””””””””””””””””””””””””””””
धन निरंकार जी

सोचो तो बशर कया है
आख़िर हश्र क्या है

जरो जहाँ जीतने के बाद
फिर सफ़र ए कब्र क्या है

सॉंस निकली जिस्म से
तो धरती अंबर कया है

भीतर न देख पाए तो
नज़र ए नज़र क्या है

खुदो खुदा की खबर नहीं तो
हक ओ कुफ़्र कया है

न क़द्र की बन्दों की तो
क़द्र ए कादर कया है

“मसत”जो धूप नहीं देखी
तो साया ओ छजर कया है।
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