धन निरंकार जी
खुद पर विश्वास कर
तू खुदकी ही तलाश कर
ज़माना नहीं खुश होगा
तू अपना उल्लास कर
जहॉं पर पयार हो
उस बसती में निवास कर
किसी की जलन तरकशी पर
न खुदको तू निराश कर
दुनिया की कहानी छोड़के
खुदा का तू एहसास कर
मुहब्बत को कर भूख
इबादत को प्यास कर
खुदा हो जा “मस्त”
खुदी को तराश कर