बन्दगी

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Narinder Kumar

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Jan 23, 2026, 6:46:20 PMJan 23
to dhan nirankar
धन निरंकार जी 

बन्दगी से ही आती है समझ जिन्दगी की डगर

वरना इन्सान को कब आता 

है सब्र। 


कोई जुल्म ओ सितम न करे खुदा की कसम 

याद हो जाए गर अपना हश्र। 


प्यार क्या है और प्यार का क्या मतलब है 

कोई नफरत न करे ,गर हो पयार का असर। 


बन्दगी के नाम पर न हो कर्मकांड और दिखावा 

आ जाए बन्दे को ,बनदगी की समझ अगर   


“मस्त” महमान हैं सभी इस फ़ानी जहान में 

असल तो और ही है कहीं इनसान का घर। 

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