Sweet...elevated...lovely....divine....angels...............
{Note: There may be some spelling-mistakes in hindi-words....please kindly forgive me...and please read in Bapdada's remembrance.....baba will help.....}
June 24th, Mamma's Day, रात को पहली बार Shantivan में कदम रखा....वहा से हमें Pandav Bhawan जाने केलिए एक vehicle मिला.....मै और दीदी Pandav Bhawan पहुंच गये तो बहुत रात हो चुकी थी....सब सो चुके थे.....कही भी कोई light नही था....अंधेरा था भीर भी चांदनी रात जैसे प्रकाश भी था.....gate के पास दो brothers था...दीदी उनसे बात किया तो अन्दर जाने का permission मिला और एक भाई हमारे लिए रहने यदि का इंतजाम करने केलिए साथ चला.....दीदी मुझे पीछे आने को कहा और भाई से बात करते हुए आगे चली तो.....मै जैसे स्वर्ग में पैर रखते है....एसे अच्छी भावना से (जैसे अपने घर में, एक बच्चे की तरह अधिकार से......अपने राजधानी में, एक राजकुमारी की तरह royality से.......अपने ससुराल में, पहली बार कदम रखने वाली एक दुल्हन की तरह......) पैर उठाकर gate के अन्दर रखा तो....पानी की 2-3 बूंदे हाथ में और चेहरे पर गिरा.....एसा लगा की बापदादा सामने खड़ा होकर मुझे स्वीकार कर रहा है.....सब सो गये...किसी को भी पता नही चला...मगर मेरा बाप को पता चला है की, "मेरा बच्चा आया है......"...... तो सोचा, "बाबा ये मेरा भ्रम तो नही?".....और दूसरा पैर उठाकर अन्दर रखते हुए हाथ उठाकर चेहरे पर गिरा वो पानी की बूंदों को check किया....अंधेरे होने के कारण मै देख नही पा रही थी मगर पानी महसूस हुवा....तो और भी पानी की बूंदे चेहरे पर गिरने लगे....दीदी मुझे पीछे मुड कर देखा क्योकि मुझे तोडा fever था......(दीदी रास्ते में मधुबन के उनके बहुत सारे अनुभवे सुनाया था...और मधुबन पहुंची एक दीदी से बात करने के बाद कहा था...की अबी मधुबन में high temperature है....गर्मी है......low temperature होती तो आप सब हुद अनुभव कर सकते थे.....)....वो मेरा भ्रम नही था.....वो एक छोटी बारिश की पहली बूंदे थी....धीरे धीरे चलकर हम दादियो की कमरे के सामने आकर खड़े होगये, मुझे नही पता था.....वो ददियो की कमरा है....बाबा जो 4 धाम की यात्रा का drill सिखाया था...उसमे मुझे सबसे पसंद Shanti-Stambh था....भीर बाबा का कुटिया(hut) था.....मै वहा खड़ी होकर चारों तरफ देखने लगी शांति स्तम्भ कहा है....तो Shanti-Stambh की light पर नज़र पड़ी.....और मन कहा " Shanti-Stambh "....तो दीदी भी कहा "वो है Shanti-Stambh "....बहुत सुन्दर था Shanti-Stambh का निराकार शिवबाबा का light....जो भी रात को शांति स्तम्भ देखा है...उन्हें पता है की कितना सुन्दर scene है वो.....रात को Shanti-Stambh का एक अलग ही शोभा है.....भाई किस room में bed vacant है ये देखने office room चले गये....तो दीदी मुझे वहा खड़ी होकर समझाया, "वो है Shanti-Stambh ....कितना सुन्दर है ना?....वो History Hall है.....ये दादियो की कमरा है....वो बाबा room है....वहा ब्रह्मा बाबा का कुटिया (hut) है....वो Meditation Hall है......." बाबा का hut मै देख न पाई मगर सब का direction और स्थान समझ में आ गया था.....तो भाई आकर कहा Shanti-Stambh के जो surrounding building है उसके 2nd Floor में एक room में 2 bed vacant होना चाहिए....आप जाकर check करो.....तो हमें room मिल गया....भीर भाई हमें dinning hall ले गया....हम यात्रा के कारण बहुत थक गये थे....एक रोटी बाबा खिलाया तो बस!....सारा थकावट गायब होगया....हम वापिस room जा रहे थे.....(may be about 11 pm)...तो दीदी कहा, "अब तो अमृतवेला (2 a.m.) होने वाला है....मुझे तोडा काम है....नींद आ रही हो तो सो जावो नही तो मुझे तोडा मदत करो...." तो कहा, "आज तो नींद नही आयेगी दीदी.....आज तो शिवरात्री होगयी.....मै आप को मदत करुँगी......" और हम Shanti-Stambh के टिक पीछे 2nd Floor में एक table थी वहा आकर बैठ गये....मै Shanti-Stambh का light पर नज़र डालकर बैठी थी....और दीदी से कहा....."दीदी, मुझे Pandav Bhawan में सबसे पसंद Shanti-Stambh है.....पता नही मुझे Shanti-Stambh इतना आकर्षण क्यों करता है?.."...दीदी कहा, "आकर्षण क्यों नही होगा, BrahmaBaba's body was buried here......" तो कहा...."क्या??!!!??........Oh!!!...मुझे तो पता भी नही था......sister कहती थी दीदी की, यहाँ Jan-18th को सब इकट्ठे होते है तो मै सोचती थी......यहा क्यों इकट्ठे होते है......उस दिन तो ब्रह्मा-बाबा का शारीर जहा bury किया है वहा इकट्ठे होना चाहिए.......ये तो स्तम्भ है ना?.....और ब्रह्मा-बाबा का body को बच्चो ने क्या किया? ये भी सोचती थी....क्योकि दीदी में Light और Tower को ही देखती थी....निचे कुछ लिखा है, वो एक basement है एसे समझती थी......center में model देखा तो...जो लिखा है वो भी पढ़ा था मगर उस का design पर attention ही नही दिया......मुझ से कोई सीधा ये कबी नही कहा की यहाँ ब्रह्मा-बाबा का body bury किया है.......मै भी ना!!.....निचे दिखा ही नही.....ऊपर ही देखती रही......".....दीदी मुस्कुराया और कहा, "यहाँ आया तो देखो, बाबा Shanti-Stambh के पास room दिया....ताकि room से बाहर निकल कर देखे तो Shanti-Stambh देख सके....."........तो मै Shanti-Stambh के निचे देखा.....और उस दृश्य को अन्दर समाया....भीर light पर नज़र डालते हुवे....बाबा से कहा, "आप तो जानते हो ना बाबा, अगर मंदिर जाने केलिए बुलाये तो क्षण में तैयार होती थी.....और अगर शादी या funeral में जाने केलिए बुलाये तो क्या क्या बहाने बनाती थी.....मगर मै church में भी कुछ memorials देखा है.....एसा एक कही नही देखा बाबा......आप के बच्चे भी ना बाबा......देखो plaque के ऊपर Tower बना दिया.....और मै बुदू, समझ बैठी की ये केवल Tower है......आप जो मुरली में Tower of peace, might, light....कहते हो उसका model दिखाने केलिए ये tower बनाया होगा, मै एसे सोचा........मगर इसका ब्रह्मा-बाबा (Jan 18th) से क्या संबंद है.....ये मुझे समझ में नही आया.......मै तो light में आकर्षित होगयी....निचे देखा ही नही..... Sorry! Babaaa.....मै ये भी नही समझ पाया....अब ये कह कर आप ने अच्छा किया .....Shanti-Stambh के पास आया तो पता चला की...Shanti-Stambh क्या है............Babaaa...friends कहते है, जो सब को समझ में आता है (simple) वो इसे समझ में नही आयेगा....और जो किसी को समझ में नही आता (difficult) वो इसे समझ में आता है.......सच में बुदू है क्या??? बाबा?!!...."....बाबा कहा, "नही!....बच्चे.....तुम ज्यादा बुद्धि use नही करती.....effort नही करती इसलिए एसे होता है.....तुम जानते हो ना?.....जहा तुम बुद्धि use करते है.....effort डालती है.....वहा तो तुम top बन जाते है......".....तो कहा..."हां बाबा.....भीर भी sorry! Babaaa... वैसे तो ब्रह्मा-बाबा का यादगार स्थान में Tower बनाकर...आप के बच्चो ने Brahma-Baba केलिए दुनिया का सबसे सुन्दर memorial बना दिया.... wonderful! बुद्धि!..." (मुझे अपने ऊपर हसी भी आई.....और बाबा का बच्चो के wonderful! बुद्धि!....पर आश्चर्य भी आया.....)
2 a.m. होगयी तो दीदी कहा....."बाबा room चले....".....हम Shanti-Stambh के पास से Baba Room की और चला तो एक बहन Shanti-Stambh के सामने बैठ कर योग कर रही थी....मुझे भी Shanti-Stambh के पास बैठने का मन था.....Pandav Bhavan में पोहुंच कर 3-4 hours होगया था मगर एक बार भी Shanti-Stambh के पास बैठा नही......तो हम Baba Room के अन्दर पोहुंच गये तो....जैसे sister कहते थे, वैसी ही एक अलोकिक आकर्षण....एक जादू....बापदादा के नयनों में अनुभव होने लगा.......मगर में Baba Room में ज्यादा समय बैठ नही पाया.....क्योकि मुझे Shanti-Stambh अपने और खींच रहा था.....एसा लगता था बाबा मुझे बुला रहा है, "आओ बच्चे.....आओ......" और मै उठ कर Shanti-Stambh की और चलने लगी......और Shanti-Stambh के सामने आकर बैठ गयी.....तो floor में पानी था.....because of the small rain......मुझे fever था.....बहुत cool feel होने लगे......मगर मै उठ नही सकती थी....इसलिए वही बैठ कर योग किया.....हर दिन दीदी मुझे baba room ले जाती थी.....मगर क्यों???...ये पता नही......मै उठ कर चलने लगेगी....और Shanti-Stambh के पास आकर बैठ जाती थी.....Baba room और History Hall मुझे बहुत पसंद थी....History hall का meditation, जो एक sister और एक brother.....दो गद्दी में बैठ कर करते है...वो मुझे बहुत सुन्दर-powerful अनुभव हुवा......मुझे बहुत आकर्षित करते थे......मगर मै ज्यादा समय कही भी बैठ नही पाती थी......Shanti-Stambh अपने और खींचता था......दीदी मुझ से पूछती थी, "अगर मै late होगयी तो क्या आप अकेले जाकर lunch time में भोजन करेगी?..." तो कहती थी, "नही!....आप जब आयेगे...तब साथ चलेंगे...."...तो पूछती थी, "तुम कहा होगा?..." तो कहती थी...."मै Shanti-Stambh के पास होगा....या......" तो दीदी कहती थी..."कुटिया(hut) में होगा.....".....Day time ज्यादा बाबा का hut में बैठती थी....एक दिन मै hut में बैठी थी तो...बहुत बच्चे आ गये और अन्दर space कम होगयी तो...मै उठ कर बाहर bench में बैठ गयी.....कुछ समय बाद देखा की दो brothers आम तोड़ रहा है....तो मै बाबा से कहा, "बाबा, आप के बच्चे भी ना.....हर कर्म कला से करते है.....एसे आम तोडना मै कबी-कही नही देखा है.....ये बच्चे आम तोड़ रहा है?...या फूल तोड़ रहा है बाबा?.....वैसे बाबा ये क्यों आम तोड़ रहा है?.....pickles बनाना है क्या?....Fruit तो नही लगता बाबा..........कुछ भी हो, आप ने कहा होगा......"....जब दीदी आकर बुलाया तो brothers वहा नही था......निचे कोई पत्ता भी नही था.....clean and clear.....The next morning, after Murli class.....हम सब को एक-एक आम दिया....और dinning hall में mango juice भी बनाकर रखा था.....तो समझ में आया वो आम, Fruit बन गया था......और बाबा क्यों वो आम तोडा?.....
मै Madhuban में Mamma's day (June 24) हमारे यज्ञ माँ का यादगार दिन पोहुंच गयी थी.....और wonderful बात ये थी की, बाबा मेरा सारी मातावो को भी मधुबन में ले आया था......जिन के द्वारा जन्म दिया...ज्ञान दिया.......जो भी आत्मावो के द्वारा माँ का पालना दिया.....जो दे रहा है....सब को बाबा मधुबन में ले आया था......जब दादी (Dadi Ratan Mohini)....सब छोटे बहनों को Om Shanti Bhawan में gift दिया तो मुझे भी stage में बुलाकर दिया.....तो बहने कहा, "पहली बार मधुबन में आकर.....stage में जाकर बाबा से (दादी के द्वारा) gift लेना कोई छोटी बात नही है....."........एक दिन evening meditation, Meditation Hall में था.....जब Meditation Hall पोहुंच गयी तो दीदी कहा..."आज दादी (Dadi Ratan Mohini) दृष्टी देंगे....इसलिए आप आगे जो छोटी बहने बैठी है उनके साथ जाकर बैठो..." तो मै छोटी बहनों के पास जाकर बैठ गयी....दादी आया तो कहा, "सब तोडा और आगे आकर बैठो...." तो एक भाई आकर हमारे positions change करने लगा......3-4 बार मुझे निचे से उठाया....तो मै बाबा से कहा, "ये क्या बाबा??....मुझे कही बैठने दो ना....."...तो भीर से उठने को कहा....और बिठा दिया......वो भी दादी के सामने...चाहो तो हाथ से छु सकेंगे.....मेरे right में sisters....left में brothers.....दादी सब को दृष्टी देने के बाद मुझ पर भीर से दृष्टी डाली.....और 5 minutes से ज्यादा दृष्टी दिया......बहुत powerful दृष्टी थी....एक current की तरह.....lightening की तरह थी.....मुझे एसा लगा दादी की भृकुटी से आग निकल कर मेरे ऊपर पड़ रहा है.....मै बाबा से कहा, "बाबा...लगता है दादी मुझे आग में जलाकर भस्म करने वाली है....मै तो चली Paramdhammm..............".....और संगल्प किया, "बाबा....आप दादी के द्वारा मुझे जो शक्ति-गुण-खज़ाना- या -संगल्प भेज रहा है......उसे मै सचे दिल से पूरा स्वीकार कर रही हुं......."...तो मै निराकार बाबा का powerful याद में स्थित होगयी..........जब दादी की class के बाद मै दीदियो की पास पोहुंच गयी तो.....sisters मुस्कुरा रहे थे....एक दीदी मेरे सिर पर हाथ रख कर...मुझे अपने बाहों में लिया....और प्यार से कुछ समझाया....एक दीदी चेहरे पर हाथ रख कर प्यार से समझाया.....भीर दीदी आकर मुझे अपने साथ लेकर चलने लगी और कहा.....दादी आपको आज बहुत समय दृष्टी दिया तो हम सब को बहुत अच्छा लगा.....मै सोचा बाबा क्यों मुझे इतना दृष्टी दिया???....तो लगा....वो तो महारथियों की सभा थी.....सब से ज्यादा 15-20 years वाले बच्चे थे.....और मै उस सभा में सब से छोटा सा बच्चा था.....वो भी (less than) 2 year वाला बच्चा....इसलिए बाबा मुझे front में बिठाया होगा...और.....20 years वाले और 2 year वाले बच्चे के स्थिति में difference तो होगा ना....इसलिए बाबा मुझे ज्यादा दृष्टी दिया होगा.......भीर भी मै बाबा से पूछा, "इतना दृष्टी क्यों दिया बाबा??....कोई बात है क्या??....मुझे बहुत अच्छा लगा बाबा......" तो बाबा तोडा seriously कहा...."वो सब मै तुम्हे बाद में समझावुंगा....अब मेरे बच्चे तुम खुश रहो और हर scene को अपने अन्दर समा लो......" {कुछ सवालों का उत्तर बाबा एसे दिया....."बाद में समझावुगा...".....आज मै जानती हुं, बाबा क्यों इतना दृष्टी दिया था....क्योकि मेरा बाबा जानता था...."मेरा बच्चा कुछ समय केलिए.....पूरे परिवार से तोडा दूर जाने वाली है....वेष (dress) बदल कर चलना है...अकेले चलने केलिए उसे शक्ति चाहिए...." और भर दिया.......}
मै जब room के बाहर window के पास बैठ कर Shanti-Stambh देखती थी तो.....Om Shanti Bhawan का top भी देख सकती थी......Pandav Bhavan में temperature very low होगया था.....तो clouds आकर Om Shanti Bhawan का top को cover करते हुए..... Shanti-Stambh को भी cover करते थे....तो मै बाबा से कहती थी, "देखो...बाबा, ये clouds Shanti-Stambh को cover कर दिया.....मै Shanti-Stambh देख नही पा रही है....."...तो धीरे-धीरे Shanti-Stambh का light नज़र आने लगेंगे....एसा लगता था clouds (प्रकृति) भी मेरे साथ खेलने आ गयी है......एक दिन दीदी कही से भाग कर मेरा पास आया और पूछा, "Pardadi से मिलना है???...."....तो कहा, "हां दीदी...."...तो दीदी मेरा हाथ पकड़ा और भागने लगी.....मुझे पता था Pardadi Pandav Bhavan में है...मगर बाहर कबी देखा नही था.... ..हम भाग कर Shanti-Stambh के पास परदादी की room के सामने आकर खड़े होगये.....दीदी कहा..."Pandav Bhavan में Low temperature होने के कारण Pardadi को Shantivan ले जाने वाले है.....दादी जब room से निकल कर car में बैठेगी तो देख सकेंगे....."....तो 2 sisters room के बाहर आया और कहा...."आप दोनों को दादी अन्दर बुला रही है......"....दादी से मिलकर एसा लगा मै एक छोटी बच्ची से मिल रही है.....क्योकि दादी एक छोटी बच्ची की तरह बात किया......इतना खुश (सागर) थी......की दादी को देख कर कोई भी खुश हो जायेंगे.....एसे मुस्कुरा रही थी की....मै बाबा से कहा, "बाबा मै बेहोश हो जायेंगे....."...क्योकि होश उड़ाने वाली मुस्कान थी.....((When any Dadi begins to smile....i always says, "देखो बाबा.....दादी मुस्कुराने वाली है......मेरा होश उड़ाने वाली है....मुझे tight पकड़ो.....मै बेहोश होने वाली है....".....{Note: This 'thought' is........to catch the full amount of (treasure of) happiness(खुशी) inside them (soul)....वो खुशी...वो आनंद अनुभव करने केलिए..........} )).....जब दादी के सामने knee में खड़े होकर toli खाया तो......toli से भी मीठा दादी का प्यार-दृष्टी-बोल-चेहरा- वो -खुशी-मुस्कान- अपना_पन अनुभव हुवा.......जो toli मन (आत्मा) को मिला उसके सामने....जो toli शारीर को मिला वो बहुत बहुत छोटा था..............भीर दादी car में बैठ कर हमारे और हाथ हिलाया...और चली गयी......it was truly a magical experience......
तेरी शिक्षाए और प्यार.....बाबा...तेरी याद
दिलाती है.....मधुबन का वो दिन-रात....मधुबन का वो दिन-रात बाबा तेरी याद दिलाती
है........
One day, afternoon....मै दीदी से एक अजीब सवाल पूछा, "दीदी....Madhuban में Pani-Puri बनाते है क्या??.."...दीदी कहा, "क्या??!!....Pani-Puri?!!....वो क्या है?..."...तो मै कहा, "दीदी....मै सुना है North-India में सब को Pani-Puri बहुत पसंद है.....मधुबन तो North-India में है ना....इसलिए पूछा....बनाते है क्या?..."...तो दीदी कहा, "इतने सालों में (20 years)...मै मधुबन में आया तो Pani-Puri नाम का कोई चीज़ खाया नही....पता नही, मधुबन में बनाते है या नही....."....तो मै वो बात छोड़ दिया....भूल गयी......That evening after meditation, we entered the Dinning hall.........तो बहन plate में 4-5 छोटी-छोटी puri रखी....और भीर से रखने लगी तो कहा.."बस!! बहन और नही...."....दीदी मुझे देखा, क्योकि एसी छोटी-छोटी puri हम पहली बार देख रहे थे......मै चारों और देखा तो...सब बहुत सारे puri plate में लेकर बैठे है.....तो मेरे intellect में एक blub light हुवा....."Oh!!! Babaaaa......ये Pani-Puri है क्या??????........Oh!!! No!!!! मेरा Babaaaa........".........तब-तक तो दीदी...बहन से पूछा था...."ये क्या है बहन??.."... तो बहन कहा..."इसे कहते है Pani-Puri .....जाओ 2-3 small plates और लेकर आओ........Puri और चाहिए?...बस!!...5??!!...."......दीदी आश्चर्य से मुझे देखा.....मै pale होगयी थी, कुछ भी बोल न पाया.....सिर हिलाया और संगल्प भेजा....."नही!!!.....मै किसी से कुछ नही कहा.....kitchen में गया भी नही.....brothers से कुछ कहा भी नही......की....Pani-Puri बनावो!!....".....हम small plates लेने केलिए चली तो दीदी कहा, "इतना प्यार??!!!....बस! पूछा....बाबा बना दिया!!...... पता है?....Prakashmani Dadi हमेशा कहती है (Teachers Bhatti)....घर आया है, अगर कुछ भी खाने का मन हो तो कहना.....खिलावुंगी.....घर आया है, बाबा बच्चो की सारी मनोकामनाये पूरा करेंगे....".....हम puri, dhal, pani...plate में लेकर एक table में बैठ गये....मगर खाना कैसे है ये पता नही....हमारे सामने दो brothers बैठा था....तो दीदी कहा, "देखो वो जैसे करते है हम भी वैसे करे...."....तो हम उन्हें follow करने लगा.....तो एक भाई जब puri pani में dip करके मुख में डाला तो नज़र हमारे ऊपर पड़ा......तो हम सब एक second केलिए pause होगये.....भीर हम सब एक साथ हसने लगे....brothers को समझ में आया था हम उन्हें notice कर रहे थे, follow कर रहे थे...हमें कैसे खाना है ये पता नही......इसलिए brothers हमें दिखाया एसे एसे खाना है....... मधुबन निवासी brothers के चेहरे में एक हसी थी.....वैसे तो सब मधबन निवासी brothers के चेहरे में सदा एक मुस्कान होता ही है.....उनकी महिमा कैसे करू???.....मधुबन निवासी (resident) अर्थात मधुबन निवासी....उनके कोई comparison है ही नही......उनके जैसे भाग्यशाली कोई है ही नही दुनिया में.....उनका चेहरा, चलन, बोल, स्थिति, बाबा से उनका जो प्यार, सेवा में उनका जो त्याग, याद में उनका जो लगन, पुरुषार्थ में उनका जो attention....बाबा उन्हें कहा-कहा से चुन-चुन कर लाया है...........Shantivan, Gyan Sarovar, Global Hospital, Pandav Bhavan के Madhuban residents मुझे देख कर कहा...."Lucky Child...."....(The main reason was that, First time Madhuban में आके direct Pandav Bhavan में रहने का Chance बहुत कम बच्चो को मिलता है(now)......इसलिए कहा....."Lucky Child")....तो मै बाबा से कहा, "बाबा आप का सब से "Luckiest Children" है Madhuban Residents वो मुझे वर्दान (Blessing) दिया "Lucky Child".....अब मै आप का "Lucky Child" नही हो तो भी "Lucky Child" बन जायेगा......"
मै 3-4 puri बहुत मुशकिल से खाया....क्योकि एक तो पेट ख़राब था....secondly, खुशी से पेट भर गया था.....एक माँ जब अपने बच्चो को खाना खिलाती है तो जैसे खुश हो जाती है वैसे....खुश होगयी.....मै तो चबा भी न पाया.....दीदी कहा, "बाबा से पूछा ना...मधुबन में Pani-Puri बनाते है या नही?....तो बाबा बनाकर...खिलाया तो खाती क्यों नही?...."....मै कहा, "मै खा नही पा रही हुं...." बस!! taste किया......
मै बाबा से पूछा, "बाबा आप तो जानते हो ना...मुझे ये खाने आदि में कोई interest नही है.....आज तो low temperature के कारण पेट भी ख़राब था.....बाबा मै तो बस...जानने केलिए पूछा था......की मधुबन में बनाते है या नही?....ताकी कबी, मधुबन आये...खाने को मिले तो taste करके देखे....ताकी पता चले, सबको ये इतना पसंद क्यों है?....आप से मै बस!!...पूछा....आप ने बना दिया...और पूरे Pandav Bhavan को खिला दिया...?!!....बाबा अगर मै आप से कहा होता(दृढ संगल्प) की...."BABAAAA.....मुझे Pani-Puri खाना है....खिलावो!!!!..............." तो आप क्या करता बाबा???...".....तो बाबा कहा, "मेरे बच्चे.....तुम Pandav Bhavan में बैठी हो!!....अपने घर-ससुराल में बैठी हो!!.....येहा बैठ कर अगर तुम संगल्प करता की......"BABAAAA.....मुझे Pani-Puri खाना है....खिलावो!!!!...............".....तो मुझे पूरे दुनिया को खिलाना पड़ता....इसलिए तुम संगल्प करने से पहले मै तुम्हे खिला दिया....ताकी तुम वो संगल्प न करे........." {उस दिन से जब भी ये सवाल पूछा मुझे येही उत्तर मिला.... "पूरे दुनिया को खिलाना पड़ता....अपने संगल्पो पर Attention!!!...." पता नही...मुझे संगल्प catch करने में कोई गलती होगयी?!!....शायद बाबा मुझे alert करने केलिए एसे कहा होगा.....बाबा का इशारा येही था....."अपने संगल्पो पर Attention!!!...."}.....तो कहा..."Oh!! Sorry Baba....मै भी न आप से क्या-क्या questions पूछती है.....वैसे आप को पता है ना?...मै एसे कुछ मांगने वाली नही है......बचपन में बहुत व्रत रखती थी.....मगर मुझे ये नही पता था...सब कोई प्राप्ति केलिए...कुछ पाने केलिए व्रत रखते है....जब मुझे वो पता चला तो मै आप से क्या कहा था.....की अबी मुझे कुछ चाहिए नही...जब कुछ पसंद आयेंगे, कुछ आवश्यक पड़ेंगे तो पूछेंगे.....मै तो बस आप से प्यार था इसलिए व्रत रखती थी.........First problem ये है की.........मुझे कुछ भी पसंद नही आता.....Second problem ये है की...अगर पसंद आया तो.....अन्दर मन कहे....."Yes!!!"..........तो समझो "it's Done!....".......क्योकि पसंद आया.....दिल को छु लिया......तो दिल से करती हुं......((Point: "जो दिल से करते है.....उनका हार हो नही सकता!!...."))....अगर कुछ पसंद आया तो...उसे कहा-कहा ढूंढ़ती है.....मिला नही तो हुद design करना पड़े....हुद बनाना पड़े...उस केलिए समय निकालना पड़े....त्याग-तपस्या करना पड़े....पूरा effort डालना पड़े....सालों इंतजार करना पड़े तो भी करुँगी....मगर जो चाहा वही स्वीकार करुँगी!!.....एसी-वैसी कुछ स्वीकार नही करती....जो चाहा वही!!....मतलब....वही!!..........अगर कुछ पसंद आया, तो भीर....कोई भी मुझे रोक नही सकता...हुद भी नही रोक सकता....जब-तक मन कहे....."पा लिया....जो....पाना था....."..........((हां, मेरा बाबा रोक सकता है....मगर कोई और नही!!....मै चाहे super-fast-express की तरह चल रही हो.....या तूफान की तरह चल रही हो.....मेरा बाबा, less than 1 second(nano seconds) मुझे रोक सकता है....direction change कर सकता है.....शांत कर सकता है.....बाबा, जब-चाहे जैसे-चाहे इस तन-मन-बुद्धि को चला सकता है....क्योकि वो मालिक और मै केवल Trusty हुं.....{स्वमान}....कईयों ने मुझे रोकने की कोशिश किया रोक न पाया....कईयों ने मुझे गिराने की कोशिश किया गिरा ना पाया.....मेरा बाबा के सिवाय कोई और मुझे control नही कर सकता!!...{स्वमान}....))
बाबा कहा, "इसलिए तो मै कह रहा हुं....मेरे बच्चे अपने संगल्पो पर Attention!!....तुम Pandav Bhavan में बैठी हो!!....अपने घर-ससुराल में बैठी हो!!.....Attention!!.....अपने एक-एक संगल्पो पर Attention!!.......Be Alert!!.........अपने शक्ति को पहचानो बच्चे......संगल्प शक्ति को पहचानो......मेरे बच्चे पहचानो......".....दीदी भी कहा, "बाबा को आप से बहुत प्यार है....इसलिए दिल खोल कर बाबा से बात करो....." उसके बाद मै एक-एक संगल्पो पर बहुत Attention दिया.....बाबा से सचे दिल से दिल खोल कर बात करने लगी.....मै बाबा से कुछ भी माँगा नही.....बस! बात किया.....
"बाबा, आप ने मुझे सारे तलवार दे दिया......मगर, बाबा....मै इसे एक साथ चला नही पा रही है....एक समय मै 1-2-3 तलवार चला सकती हुं....मगर इतने सारे तलवार एक-साथ चला नही पा रही है......बाबा, मै चलते-चलते महारथियों की मैदान में पोहुंच गयी है....यहाँ तो बहुत युद्ध है.....बहार कुछ और युद्ध था....अन्दर कुछ और युद्ध है बाबा.....हां! आप ने कहा था ये महारथियों की मैदान है....बहुत युद्ध करना पड़ेगा....मगर, बाबा मै इतना नही सोचा था.......बाबा, मै जब 1-2 तलवार चलती है तो...कोई और तलवार कुछ तोड़ता था....कुछ नुकसान करता है......मै कुछ न कुछ तोडती रहती है बाबा.....परिवार को मेरे पीछे भाग-दौड़ करना पड़ता है.....क्या मुझ से कोई गलती होगयी बाबा???....मै तो सब का कल्याण करना चाहती हुं....सबको सुख-शांति देना चाहती हुं....सब को खुश देखना चाहती हुं.....भीर भी, ये सब क्या हो रहा है बाबा???..... बाबा, आप मुझे ये सारे तलवार एक-साथ चलाना सिखावो....भीर देखना मै कैसे युद्ध करती हुं.....बाबा आप ने......सारे खज़ाना दे दिया.....अब उसे एक-साथ use करना सिखावो.......बाबा, बहुत युद्ध होगया...अब मुझे तोडा शांति चाहिए बाबा.....आप मुझे यज्ञ की किसी corner में शांति से बिठाकर तलवार चलाना सिखावो..........आप जानते हो ना, मै जब पढ़ती हुं तो byheart नही करती.....अगर कुछ समझ में नही आया तो रुक जाती हुं....जब-तक वो समझ में नही आती वो छोडती भी नही....आगे पढ़ती भी नही....और बहुत सारे text refer करती हुं.....और एक बार वो समझ में आ जाये तो भीर revision करने की ज़रूरत भी नही पढती.... मगर बाबा, मुझ से कुछ और नुकसान न हो जाये....इसलिए आप मुझे यज्ञ की किसी corner में बिठाकर तलवार चलाना सिखावो.....और(condition) जब मै तलवार चलाना सीखे तो....कुछ न तोड़े...कोई नुकसान न हो....किसी को कोई परेशानी न हो.......परिवार को मेरे पीछे भाग-दौड़ करना न पड़े.....मुझे सिखावो बाबा.....आप सिखावो बाबा.............((मै दिन-रात ये संगल्प करने लगी.....Pandav-Bhavan में बैठकर.....))
मै बाबा से ये नही कहा की....center की किसी corner में बिठाकर सिखावो.......
मै ने कहा.........................यज्ञ!!... की किसी corner में बिठाकर सिखावो..........
हां....check किया था (एक-एक word)....संगल्प कर रही है...."यज्ञ!!".....और यज्ञ का अर्थ है...पूरी दुनिया (विश्व)....तो option आया......"center कहू?...." या...."यज्ञ कहू?...".....मुझे बाबा 2 Main Centers द्वारा एक-साथ पला था.....आज, किस center से मुरली सुनने वाली है...ये मुझे भी नही पता होता......जब time मिलेंगे....free होंगे....तो पास में जो center है वहा जाकर मुरली सुनती थी.....mainly 3 centers से मुरली सुनती थी.....कबी-कबी एक ही दिन 3 centers में भी जाती थी.....Morning एक center.....Noon एक center......Evening एक center......जहा जाती थी, वही से murli का photostat भी मिलती थी.....((situation एसा था की बहन को एसा permission देना पड़ा...))...और बाबा कब-कहा मुरली class करने को कहते है...भेजते है....अपना माध्यम बनाते है....ये भी मुझ से पहले कहता नही था.....इसलिए हर center को गीता-पढ़शाला को अपना समझती थी....center नही.....मेरे बाबा का अविनाशी-रूद्र-गीता-ज्ञान-यज्ञ समझती थी.......और सोचा बाबा तो कहता है.."मेरा center मेरा center...." एसे नही कहना चाहिए....और promise तो येही है ना...."whatever you feed me.....whatever you give me to wear....wherever you make me sit,....i will just do that......"{स्वमान}......सोचा, अगर यज्ञ का मतलब पूरी-दुनिया हो!...तो क्या हुवा....मै तो center में ही हुं....डरने की कोई बात ही नही......इसलिए word choose किया...."यज्ञ".........
मगर मै उस समय ये नही सोचा,.....'center' में बिठाकर तलवार चलाना सिखाये और वो किसी पर न पड़े ये...असंभव्य है!!.....[[For eg:- अगर मै center पर रहती और किसी बाबा का बच्चे की गलती देख कर संगल्प करती....'बाबा, ये बच्चा क्या कर रहा है?'....तो तलवार नुकसान किया ना?.....]] {Difference in the meaning of 'One Word' changed the Entire Life....Part in Drama....}
मै Pandav Bhavan में बैठ कर जो संगल्प किया......बाबा उसे सफल कर दिया.......पहले Baba मुझे यज्ञ की एक corner में बिठाया......भीर मुझे शांत किया और सारे तलवार निचे रखवाया....(it took about 6 months)....भीर मुझे से research करवाया.....(1 year) भक्ति से लेकर ज्ञान तक का संस्कार क्या था??.....एक-एक संगल्प का प्रयोग कैसे करती थी??....उस का परिणाम क्या हुवा था??.....etc....etc......बाबा मुझे दुनिया का हालात भी दिखाया.....मेरे चारों और बच्चे एसे गिर रहे थे की....मै सिर चुकाकर चलती थी....और आखे बंद कर कहती थी....."बाबा....मै ये देख नही पा रही हुं....इन्हें मै कैसे बचावु?.....आप इन्हें बचाने केलिए मुझे appoint किया और मै हुद गिर गयी.....अब मेरे पास तलवार उठाने की शक्ति नही....authority नही......मै हुद करती नही तो किस authority से कहू?.....{मुरली: "जो करते है उनके कहने से effect होती है....और जो नही करते......"......."केवल कहो नही....करके दिखावो!!...."} भीर उन सब का documents (reports/notes) बनवाया (6 months)......भीर बाबा मुझे तलवार उठाने को force किया......तो मै सारे तलवार भीर से एक-साथ उठाया....तोडा balance किया और बहुत force से चलाया.......इस बार आवाज़ बहुत कम निकला....perfection भी थी....मगर माया को मार कर...मै हुद को balance नही कर पाया तो सोचा, "मुझे से कोई गलती होगयी क्या??...".....और सारे तलवार निचे रखा.....तो माया मुझे भीर से cover करने लगी.....तो मुझे समझ में आया मुझ से कोई गलती नही हुवा है....मगर मै माया को रोका नही....क्योकि, एक और बार उसे मारना मुझे मुशकिल नही लगा....और मै ये सोच रही थी...इसका पूरा विनाश कैसे करू???.........ताकी एक और बार वो मेरे सामने न आये..................1 month शांत होगयी....2 months research किया.... 1 month documents (reports/notes) बनवाया......बाबा कहा, "उठाओ तलवार!!!....."....तो भीर से सारे तलवार एक-साथ उठाया.....balance किया....stable होगयी.....alert होगयी....focus किया.........कुछ समय मै एसे ही खड़ी रही.......और जब-जहा-जैसे बाबा तलवार चलाने को कहा एसे चलाया........जैसे ही Shivshakti बन सारे तलवार एक-साथ चलायी.....Maya-Ravan जिस foundation पर खड़ी थी उस Foundation का पूरा विनाश होगया.....माया इतनी दूर जाकर गिर गयी की....उसका पूरा Balance or Stability नष्ट होगयी......Then started the Real Game (war).....after a long war....i win & begin to Fly like a Free-Bird with my Beloved-Husband........
बाबा कहते है, "जब तलवार चलाते हो!!.....तो तलवारों का आवाज़ न निकले (गुप्त चलावो).....किसी को ये भी पता न चले की तुम तलवार चला रही है........तलवार को एक फुल की तरह भेजो और उसका दिल तोड़ दे....उसे पता ही न चले actually क्या हुवा है..... {अन्दर क्या परिवर्तन हुवा है} ...........एक-एक तलवार जहा पोहुंच ना है..........वहा पोहुंच कर अपना कार्य कर वापिस आये................"
मै Pandav-Bhavan में बैठकर जो संगल्प किया....मेरा बाबा उसे सफल कर दिया.........{सचे दिल पर....साहेब राज़ी....}
मै जब कोई संगल्प करती हुं.....तो बहुत दृढ़ता से करती हुं.....और उस एक-संगल्प पर खड़ा हो जाता हुं......उसे स्वमान और लक्ष्य बना देती हुं......{अगर कुछ पसंद आया....दिल को छु लिया तो दिल से करुँगी....मगर पसंद आना पड़ेगा.......}
जब Prakashmani-Dadi की health ख़राब होगया तो center से बार-बार योग करने की संदेश मिलती थी.....तो मै बाबा से कहा...."बाबा मै BrahmaBaba से साकार में न मिल पाया....Mamma से साकार में न मिल पाया (in that body).....it's OK!.....जब मुझे ज्ञान मिला तो दादियाँ है....और दादियो से मिलना मेरा जन्म-सिद्ध अधिकार है....ये अधिकार और भाग्य मुझ से कोई नही चीन सकता....जब-तक मै दादी से न मिलु तब-तक दादी शारीर छोड़ नही सकती!!....बाबा इस बात में कोई पुनर्चिन्दन नही.....no discussion....no compromise....it's Final....." भीर दादी की health ख़राब होगयी ये सन्देश आया तो मै बाबा से कहा, "बाबा, मै आप से मुझे ये चाहिए....वो चाहिए एसे नही कहती ना?!!....बस! दादी से मिलना चाहा.....ये कोई इच्छा है क्या?...ये मेरा जन्म-सिद्ध अधिकार है ना?....बाबा, आप जिस माँ के द्वारा मुझे पाल रहा है....उस माँ से मिलना मेरा जन्म-सिद्ध अधिकार है....बाबा, आप दादी को मेरे पास ले आये...या....मुझे दादी के पास ले जाये....it's your choice....{बालक-so-मालिक: मै बाबा का obedient servant हुं और बाबा मेरा obedient servant है} बाबा, आप कुछ भी करो....मतलब.........कुछ भी करो!!!!.............मगर, मुझे दादी से मिलना है...मतलब मिलना ही है....."....."बाबा, आप को पता है ना......मै पहले से ही संगल्प रखा है.....Madhuban में कदम रखुगी तो Kanya-Surrender-Teacher की Title के साथ रखूंगी....और किसी भी Title के साथ....या..किसी और रूप में Madhuban में कदम नही रहूंगी.....अगर मै Madhuban में किसी और रूप में या Title के साथ पोहुंच गयी तो......मै Gate के अन्दर कदम नही रखूंगी....बाबा, जब-तक मुझे मेरा Title और रूप न मिले....तप-तक मै Gate के अन्दर कदम नही रखूंगी....कबी भी नही!!......"....और संगल्प (स्वमान और लक्ष्य) रख दिया....."Kanya-Surrender-Teacher बन Madhuban में आवुंगी और Prakashmani Dadi से मिलूंगी"....और इस एक संगल्प पर खड़ी होगयी.....{बाबा उसे 100% accuracy से सफल कर दिया}
इस संगल्प के कारण मेरे बापदादा को प्रकृति और समय को order देना पड़ा....."रास्ता बनावो!!!......मेरे बच्चे केलिए......"........बाबा को Madhuban तक एक अलग रास्ता बनाना पड़ा.....मुझे मधुबन लेगया....जब मै मधुबन पोहुंची तो दादी Hospital में थी....इसलिए मै दादी के बारे में सोचा भी नही.....(मुझे ये भी समझ में नही आया...बाबा अचानक मुझे क्यों मधुबन ले आया है?....)...एक दिन Shanti-Stambh के पास board में दादी की बहुत सुन्दर photos देखा और message मिला...."Prakashmani Dadi Hospital से Shantivan आयी है...आज शाम को सारे Teacher बहनों को Shantivan में दादी से मिलने ले जायेंगे...और आज का Dinner Shantivan में होगा......"....दादी की Cottage के अन्दर कदम रखी तो एसा लगा....मै सालों के बाद अपने माँ से मिल रही हुं......दादी से एक प्रकाश चारों और फ़ैल रही थी....और दादी दृष्टि देने केलिए आखे खोलती तो....in very high speed (nano seconds) एक प्रकाश निकल कर सब को touch करते हुवे दूर-दूर तक फ़ैलती जा रही थी...जब मै दादी के सामने पोहंची तो...जो बहन दादी से कह रही थी, "दादी, दृष्टि दो...." उन्हें 2-3 बार कहना पड़ा...जैसे ही दादी आखे खोल कर दृष्टि दी तो....एसा लगा बहुत Force और Speed से एक प्रकाश (रूप) आकर मेरे अन्दर प्रवेश किया और एक काली रूप पीछे से निकलकर चले गये.....in very high speed.....((कोन था? जो पीछे से निकल कर चला???....मुझे पीछे मुड कर देखना चाहिए था.....मगर, ये बात मै 15-20 minutes बाद सोचा.....)) मै सब कुछ भूल गयी......बिलकुल blank होगयी.........याद आया, Cottage है....दादी है....मगर, "अब मुझे क्या करना है?"....ये भूल गयी.......तो सामने एक small-Table थी मै उस पर हाथ रखा....तो मुन्नी बहन ने मुझे बुलाया...."ये......"....तो मै alert होगयी...."Yes!!....मुझे मुन्नी दीदी के सामने जाकर दृष्टि लेना है, Toli लेना है......तो सूक्ष्म-शारीर को order दिया "चलो....."...एसा लगा सूक्ष्म-शारीर और body नही है.....और order obey नही कर रहा है....क्योकि जैसे नींद में चलते है वैसे very very slowly चलकर दीदी के सामने पोहुंच गयी...मुन्नी दीदी मुझे दृष्टि दिया.....Toli दिया....जब Cottage के बाहर आया तो बहने सामने थे....मै कुछ कहना चाहा....मगर कुछ बोल न पाया.....कुछ समय बाद दीदी, दादी से मिल कर आया और मुझ से बात करने लगी.....Then, begin to talk......"दीदी.....वो क्या दृष्टि थी......Oh!!!!!!......."
Dadi की दृष्टि बहुत Powerful थी....साथ में इतना पवित्रता और शांति भी थी की.....वो एक फुल की तरह आकर छुवा....और पता ही न चला......दादी की स्थिति एसी थी, सब कुछ थी...मगर लगा कुछ भी नही.....क्योकि सब combined थे......एसे combined की एक-एक शक्ति-या-गुण को अलग-अलग निकाल न पाया......सब कुछ थी, पवित्रता, शांति, आनन्द, खुशी, प्यार, शक्ति.......etc...etc...in a very high quantity.....मगर, combined था.....दादी से मिलकर एसा लगा...कुछ भी नही......no feeling...no sense....blank....void.......{{निराकारी स्थिति: जब हम Paramdham में रहते है तो सर्व-शक्तियों से सम्बन्न और सम्पूर्ण होगा मगर स्वयं अनुभव नही कर सकता....(उस केलिए शारीर चाहिए) आत्मा में सब कुछ होगा...मगर लगेगा कुछ भी नही....एक statue की तरह.....एक star की तरह....stable निरसंगल्प......एसा लगेगा.....void है....blank है....no feeling......}}
कुछ समय बाद मै देखा हाथ में आम(Toli) है......"भीर से आम (mango) बाबा?!!.....वो भी दादी से मिला तो?!!.....कुछ तो बात है.......इस के पीछे का राज़ (secret) क्या है बाबा?....."....जैसे ही Room पोहुंची तो कुछ दिन पहले ॐ-शांति-भवन से जो आम मिला उसके पास window में वो भी रख दिया और सोचने लगी....बाबा पहले...एक फुल की तरह आम तोडना दिखाया......भीर उसे हाथ में दिया.....भीर उसका Juice पिलाया..... तो मै सोचा था, बचपन से सबसे ज्यादा आम का फल खायी है, और पसंद भी आम है इसलिए दिया होगा......मगर भीर से दिया तो लगा, बाबा कुछ कह रहा है...कोई इशारा दे रहा है....मै बहुत कोशिश किया और बाबा से कहा, "आप जो बड़ी-बड़ी बातें कह रहा है....वो कुछ भी मुझे समझ में नही आ रहा है.....आप क्या कह रहा है बाबा???.....".....एक ही word catch किया...."स्वर्ग!!"...और सोचने लगी स्वर्ग से आम का क्या connection है???.......एक दिन मै दोनों आम हाथ में लेकर सोचने लगी तो दीदी पूछा, "ये आम तुम्हे कहा से मिला?.."...तो कहा, "दीदी ये वही आम है जो...Om-Shanti-Bhavan से और Shantivan से मिला...."...तो दीदी कहा, "क्या???......अबी तक तुम ये खाया नही?....Oh!! मेरा बाबा ये बच्ची भी ना......कुछ भी खाती नही....मेरे बच्चे, तुम कमज़ोर हो जायेंगे...." तो मै within 5 minutes Shantivan से मिला आम को खा लिया और दूसरा आम window में रखा और दीदी से कहा....."दीदी, ये center में ले जावुंगी....."....और धीरे से मुस्कुराते हुवे.....room से निकल कर Window के पास आया और Shanti-Stambh को देखा.....वो एक sunny day थी....एसा लगा...Shanti-Stambh से चारों और Golden-Yellow-Light फ़ैल रही है......"Yes!! Babaa....i got it.....बहार से Fresh-green...means Fresh-green-Nature(प्रक्तुती)......New World....नयी दुनिया......अन्दर से Golden-Yellow...means...Golden Age...Sun Dynasty....सूर्य-वंशी......एक fruit को फुल की तरह तोड़ने की कला सूर्य-वंशी का है......नया-स्वर्णिम- Bharat!!....".....
{खज़ाना बाबा हाथ में दिया....मगर उसे खोलने की बजाय....बहार से देख रही थी.....खोलेगे तो ही पता चलेगा ना अन्दर क्या है???....}
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When you go to the subtle region, you drink mango juice etc. but there are no trees etc. there. When you go to heaven, you receive everything there. Revised Sakar Murli dated 07/04/04
They go to the subtle region and then say: Baba gave us subiras (mango juice) to drink. However, there are no trees etc. there. There are trees in Paradise of course, but it isn’t that Baba went there and brought the drink back for you. Everything in the subtle region is a matter of visions. Revised Sakar Murli dated 08/04/04
Daughters go to the subtle region and say: Baba gave us subiras (nectar of mango juice) to drink. 10/03/03 Morning Murli Om Shanti BapDada Madhuban
In the golden age, everything is green and fresh. It takes time for this world to be made new. When you go to the subtle region, you are shown such big fruits and you are given mango juice to drink. So, just think how much fertilizer will be received, and especially Bharat will receive that. So many good things will emerge there in the new world. By receiving this fertilizer, the whole world will become new. You are given the mango juice of Paradise in the subtle region. You are granted visions of gardens etc. Children have had visions of that world. They go there and drink mango juice. Princes and princesses used to fetch fruit from the gardens. However, there cannot be a garden in the subtle region. Surely, they must have gone to Paradise. A vision would not be granted to everyone. Those who become instruments are granted visions. It is possible that if you stay in remembrance, if you remain Baba's children, then, at the end, you too will have visions. Sakar Murli 2008/08/25 Revised
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अगर उस समय बाबा मुझे Madhuban नही ले जाता तो शायद मै दादी से उस तन में न मिल पाती...मै तो सोचती थी, दादी से next season में मिलूंगी.....मगर, बाबा जनता था दादी को उसके पहले वो शारीर छोड़ना है......प्रकृति और समय को मिल कर मेरे सामने से माया को हटाकर.....Madhuban तक रास्ता बनाना पड़ा.....within 2 months दादी शारीर छोड़ दिया....(तब, मुझे ये बात समझ में आया......)
These are some of sweet-funny-lovely-special-magical-wonderful experience.....i got from Madhuban....जो मेरा जीवन का Foundation बन गया......बाबा, कुछ special teachings भी दिया था.....जो उस Foundation को मजबूत बनाया.....Diamond का चमक दिया.....मेरा हर कदम में शक्ति भर ने वाली एक आवाज़ Madhuban से निकला.........मै जब कदम उठाती है तो वो आवाज़ सुनती हुं......वो सब भीर कबी सुनावुंगी.................................................
मै ये कहना चाहती हुं....जब मधुबन जाते हो... तो......
अपने एक-एक संगल्पो पर Attention!!......
अपने एक-एक word पर Attention!!......(check each & every word.....check the meaning.....)
Madhuban का हर scene में राज़ छुपा है......बाबा का इशारा छुपा है......
Madhuban, तपस्या भूमि है.....Pandav-Bhavan को जादू का घर कहता है बाबा.......मै तो जैसे ही कदम रखा समझ गयी ये जादू का घर है.......बाबा से दिल खोल कर सचे दिल से बात करो......भक्तो की तरह मांगना नही...(मागने की कोई ज़रूरत ही नही......बिना मांगे देने वाला है भगवान....) एक बच्चे की तरह, student की तरह....प्यार से...अधिकार से.....respect से बात करो.....बापदादा आप के ऊपर कुर्बान हो जायेंगे.....समर्पण हो जायेंगे.........
मधुबन में जाकर हद का कोई भी संगल्प मत करो.....बेहद का बाप से बेहद का वारसा ले लो.....
merging in my husband's love
ॐ शांति
Wonderful Song: Watch our Dadi's love and magical smile.....
http://www.youtube.com/watch?v=D8uWTrj36cs