On 4/17/11, Rameshwar Sandupatla <rsg...@gmail.com> wrote:
> कोटि कोटि धन्यवाद् भाई साहब बहुत ही बढ़िया जानकारी है आप की और भी नयी
> जानकारी की अपेक्षा है आप से प्रणाम !
>
> १७ अप्रैल २०११ ८:१२ पूर्वाह्न को, Ravi Verma <ravisve...@gmail.com> ने
> लिखा:
>
>> आदरणीय दोस्तों
>> *सत्ता के हस्तांतरण की संधि ( Transfer of Power Agreement ) *
>> करदिया था |
>> क्यों ? गाँधी जी कहते थे कि मै मानता नहीं कि कोई आजादी आ रही है | और गाँधी
>> जी ने स्पस्ट कह दिया था कि ये आजादी नहीं आ रही है सत्ता के हस्तांतरण का
>> समझौता हो रहा है | और गाँधी जी ने नोआखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी
>> |उस प्रेस स्टेटमेंट के पहले ही वाक्य में गाँधी जी ने ये कहा
>> कि मै हिन्दुस्तान के उन करोडो लोगों को ये सन्देश देना चाहता हु कि ये
>> जोतथाकथित आजादी (So
>> Called Freedom) आ रही है ये मै नहीं लाया | ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के
>> हस्तांतरण के चक्कर में फंस कर लाये है | मै मानता नहीं कि इस देश में कोई
>> आजादी आई है | और 14 अगस्त 1947 की रात को गाँधी जी दिल्ली में नहीं थे
>> नोआखाली में थे | माने भारत की राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा जिसने
>> हिन्दुस्तान की आज़ादी की लड़ाई की नीव रखी हो वो आदमी 14 अगस्त 1947 की रात को
>> दिल्ली में मौजूद नहीं था | क्यों ? इसका अर्थ है कि गाँधी जी इससे सहमत नहीं
>> थे | (नोआखाली के दंगे तो एक बहाना था असल बात तो ये सत्ता का हस्तांतरण ही
>> था) और 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी नहीं आई ....
>> ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट लागू हुआ था पंडित नेहरु और अंग्रेजी सरकार
>> के
>> बीच में | अब शर्तों की बात करता हूँ , सब का जिक्र करना तो संभव नहीं है
>> लेकिन कुछ महत्वपूर्ण शर्तों की जिक्र जरूर करूंगा जिसे एक आम भारतीय जानता
>> है
>> और उनसे परिचित है ...............
>>
>> - इस संधि की शर्तों के मुताबिक हम आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं
>> - भारत का नाम INDIA रहेगा और सारी दुनिया में भारत का नाम इंडिया
>> प्रचारित किया जायेगा और सारे सरकारी दस्तावेजों में इसे इंडिया के ही नाम
>> से
>> संबोधित किया जायेगा | हमारे और आपके लिए ये भारत है लेकिन दस्तावेजों में
>> ये
>> इंडिया है | संविधान के प्रस्तावना में ये लिखा गया है "India that is
>> Bharat "
>> जब क़ि होना ये चाहिए था "Bharat that was India " लेकिन दुर्भाग्य इस देश
>> का
>> क़ि ये भारत के जगह इंडिया हो गया | ये इसी संधि के शर्तों में से एक है |
>> अब
>> हम भारत के लोग जो इंडिया कहते हैं वो कहीं से भी भारत नहीं है | कुछ दिन
>> पहले
>> मैं एक लेख पढ़ रहा था अब किसका था याद नहीं आ रहा है उसमे उस व्यक्ति ने
>> बताया
>> था कि इंडिया का नाम बदल के भारत कर दिया जाये तो इस देश में आश्चर्यजनक
>> बदलाव
>> आ जायेगा और ये विश्व की बड़ी शक्ति बन जायेगा अब उस शख्स के बात में
>> कितनी
>> सच्चाई है मैं नहीं जानता, लेकिन भारत जब तक भारत था तब तक तो दुनिया में
>> सबसे
>> आगे था और ये जब से इंडिया हुआ है तब से पीछे, पीछे और पीछे ही होता जा
>> रहा है
>> |
>> - भारत के संसद में वन्दे मातरम नहीं गया जायेगा अगले 50 वर्षों तक यानि
>> 1997 तक | 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने इस मुद्दे को संसद
>> में
>> उठाया तब जाकर पहली बार इस तथाकथित आजाद देश की संसद में वन्देमातरम गाया
>> गया
>> | 50 वर्षों तक नहीं गाया गया क्योंकि ये भी इसी संधि की शर्तों में से एक
>> है |
>> और वन्देमातरम को ले के मुसलमानों में जो भ्रम फैलाया गया वो अंग्रेजों के
>> दिशानिर्देश पर ही हुआ था | इस गीत में कुछ भी ऐसा आपत्तिजनक नहीं है जो
>> मुसलमानों के दिल को ठेस पहुचाये | आपत्तिजनक तो जन,गन,मन में है जिसमे एक
>> शख्स
>> को भारत भाग्यविधाता यानि भारत के हर व्यक्ति का भगवान बताया गया है या
>> कहें
>> भगवान से भी बढ़कर |
>> - इस संधि की शर्तों के अनुसार सुभाष चन्द्र बोस को जिन्दा या मुर्दा
>> - इस संधि की शर्तों के अनुसार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकुल्लाह,
>> रामप्रसाद विस्मिल जैसे लोग आतंकवादी थे और यही हमारे syllabus में पढाया
>> जाता
>> था बहुत दिनों तक | और अभी एक महीने पहले तक ICSE बोर्ड के किताबों में
>> भगत
>> सिंह को आतंकवादी ही बताया जा रहा था, वो तो भला हो कुछ लोगों का
>> जिन्होंने
>> अदालत में एक केस किया और अदालत ने इसे हटाने का आदेश दिया है (ये समाचार
>> मैंने
>> इन्टरनेट पर ही अभी कुछ दिन पहले देखा था) |
>> - आप भारत के सभी बड़े रेलवे स्टेशन पर एक किताब की दुकान देखते होंगे
>> "व्हीलर बुक स्टोर" वो इसी संधि की शर्तों के अनुसार है | ये व्हीलर कौन
>> था ?
>> ये व्हीलर सबसे बड़ा अत्याचारी था | इसने इस देश क़ि हजारों माँ, बहन और
>> बेटियों के साथ बलात्कार किया था | इसने किसानों पर सबसे ज्यादा गोलियां
>> चलवाई
>> थी | 1857 की क्रांति के बाद कानपुर के नजदीक बिठुर में व्हीलर और नील
>> नामक दो
>> अंग्रजों ने यहाँ के सभी 24 हजार लोगों को जान से मरवा दिया था चाहे वो
>> गोदी का
>> बच्चा हो या मरणासन्न हालत में पड़ा कोई बुड्ढा | इस व्हीलर के नाम से
>> इंग्लैंड
>> में एक एजेंसी शुरू हुई थी और वही भारत में आ गयी | भारत आजाद हुआ तो ये
>> ख़त्म
>> होना चाहिए था, नहीं तो कम से कम नाम भी बदल देते | लेकिन वो नहीं बदला
>> गया
>> क्योंकि ये इस संधि में है |
>> - इस संधि की शर्तों के अनुसार अंग्रेज देश छोड़ के चले जायेगे लेकिन इस
>> देश में कोई भी कानून चाहे वो किसी क्षेत्र में हो नहीं बदला जायेगा |
>> इसलिए आज
>> भी इस देश में 34735 कानून वैसे के वैसे चल रहे हैं जैसे अंग्रेजों के समय
>> चलता
>> था | Indian Police Act, Indian Civil Services Act (अब इसका नाम है
>> Indian Civil Administrative Act), Indian Penal Code (Ireland में भी IPC
>> चलता है और Ireland में जहाँ "I" का मतलब Irish है वही भारत के IPC में
>> "I" का
>> मतलब Indian है बाकि सब के सब कंटेंट एक ही है, कौमा और फुल स्टॉप का भी
>> अंतर
>> नहीं है) Indian Citizenship Act, Indian Advocates Act, Indian
>> Education Act, Land Acquisition Act, Criminal Procedure Act, Indian
>> Evidence
>> Act, Indian Income Tax Act, Indian Forest Act, Indian Agricultural
>> Price
>> Commission Act सब के सब आज भी वैसे ही चल रहे हैं बिना फुल स्टॉप और
>> कौमा बदले हुए |
>> - इस संधि के अनुसार अंग्रेजों द्वारा बनाये गए भवन जैसे के तैसे रखे
>> जायेंगे | शहर का नाम, सड़क का नाम सब के सब वैसे ही रखे जायेंगे | आज देश
>> का
>> संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, राष्ट्रपति भवन कितने नाम गिनाऊँ सब
>> के सब
>> वैसे ही खड़े हैं और हमें मुंह चिढ़ा रहे हैं | लार्ड डलहौजी के नाम पर
>> डलहौजी
>> शहर है , वास्को डी गामा नामक शहर है (हाला क़ि वो पुर्तगाली था ) रिपन
>> रोड,
>> कर्जन रोड, मेयो रोड, बेंटिक रोड, (पटना में) फ्रेजर रोड, बेली रोड, ऐसे
>> हजारों भवन और रोड हैं, सब के सब वैसे के वैसे ही हैं | आप भी अपने शहर
>> में
>> देखिएगा वहां भी कोई न कोई भवन, सड़क उन लोगों के नाम से होंगे | हमारे
>> गुजरात
>> में एक शहर है सूरत, इस सूरत शहर में एक बिल्डिंग है उसका नाम है कूपर
>> विला |
>> अंग्रेजों को जब जहाँगीर ने व्यापार का लाइसेंस दिया था तो सबसे पहले वो
>> सूरत
>> में आये थे और सूरत में उन्होंने इस बिल्डिंग का निर्माण किया था | ये
>> गुलामी
>> का पहला अध्याय आज तक सूरत शहर में खड़ा है |
>> - हमारे यहाँ शिक्षा व्यवस्था अंग्रेजों की है क्योंकि ये इस संधि में
>> - इस संधि की शर्तों के हिसाब से हमारे देश में आयुर्वेद को कोई सहयोग
>> - इस संधि के हिसाब से हमारे देश में गुरुकुल संस्कृति को कोई प्रोत्साहन
>> - इस संधि में एक और खास बात है | इसमें कहा गया है क़ि अगर हमारे देश के
>> (भारत के) अदालत में कोई ऐसा मुक़दमा आ जाये जिसके फैसले के लिए कोई कानून
>> न हो
>> इस देश में या उसके फैसले को लेकर संबिधान में भी कोई जानकारी न हो तो साफ़
>> साफ़
>> संधि में लिखा गया है क़ि वो सारे मुकदमों का फैसला अंग्रेजों के न्याय
>> पद्धति
>> के आदर्शों के आधार पर ही होगा, भारतीय न्याय पद्धति का आदर्श उसमे लागू
>> नहीं होगा | कितनी शर्मनाक स्थिति है ये क़ि हमें अभी भी अंग्रेजों का ही
>> अनुसरण करना होगा |
>> - भारत में आज़ादी की लड़ाई हुई तो वो ईस्ट इंडिया कम्पनी के खिलाफ था और
>> संधि के हिसाब से ईस्ट इंडिया कम्पनी को भारत छोड़ के जाना था और वो चली भी
>> गयी
>> लेकिन इस संधि में ये भी है क़ि ईस्ट इंडिया कम्पनी तो जाएगी भारत से
>> लेकिन
>> बाकि 126 विदेशी कंपनियां भारत में रहेंगी और भारत सरकार उनको पूरा
>> संरक्षण
>> देगी | और उसी का नतीजा है क़ि ब्रुक बोंड, लिप्टन, बाटा, हिंदुस्तान लीवर
>> (अब
>> हिंदुस्तान यूनिलीवर) जैसी 126 कंपनियां आज़ादी के बाद इस देश में बची रह
>> गयी और
>> लुटती रही और आज भी वो सिलसिला जारी है |
>> - अंग्रेजी का स्थान अंग्रेजों के जाने के बाद वैसे ही रहेगा भारत में
>> जैसा क़ि अभी (1946 में) है और ये भी इसी संधि का हिस्सा है | आप देखिये
>> क़ि
>> हमारे देश में, संसद में, न्यायपालिका में, कार्यालयों में हर कहीं
>> अंग्रेजी,
>> अंग्रेजी और अंग्रेजी है जब क़ि इस देश में 99% लोगों को अंग्रेजी नहीं
>> आती है
>> | और उन 1% लोगों क़ि हालत देखिये क़ि उन्हें मालूम ही नहीं रहता है क़ि
>> उनको
>> पढना क्या है और UNO में जा के भारत के जगह पुर्तगाल का भाषण पढ़ जाते हैं
>> |
>> - आप में से बहुत लोगों को याद होगा क़ि हमारे देश में आजादी के 50 साल
>> बाद तक संसद में वार्षिक बजट शाम को 5:00 बजे पेश किया जाता था | जानते है
>> क्यों ? क्योंकि जब हमारे देश में शाम के 5:00 बजते हैं तो लन्दन में सुबह
>> के 11:30 बजते हैं और अंग्रेज अपनी सुविधा से उनको सुन सके और उस बजट की
>> समीक्षा कर सके | इतनी गुलामी में रहा है ये देश | ये भी इसी संधि का
>> हिस्सा है
>> |
>> - 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ तो अंग्रेजों ने भारत में राशन
>> कार्ड का सिस्टम शुरू किया क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों को
>> अनाज
>> क़ि जरूरत थी और वे ये अनाज भारत से चाहते थे | इसीलिए उन्होंने यहाँ
>> जनवितरण
>> प्रणाली और राशन कार्ड क़ि शुरुआत क़ि | वो प्रणाली आज भी लागू है इस देश
>> में
>> क्योंकि वो इस संधि में है | और इस राशन कार्ड को पहचान पत्र के रूप में
>> इस्तेमाल उसी समय शुरू किया गया और वो आज भी जारी है | जिनके पास राशन
>> कार्ड
>> होता था उन्हें ही वोट देने का अधिकार होता था | आज भी देखिये राशन कार्ड
>> ही
>> मुख्य पहचान पत्र है इस देश में |
>> - अंग्रेजों के आने के पहले इस देश में गायों को काटने का कोई कत्लखाना
>> नहीं था | मुगलों के समय तो ये कानून था क़ि कोई अगर गाय को काट दे तो
>> उसका हाथ
>> काट दिया जाता था | अंग्रेज यहाँ आये तो उन्होंने पहली बार कलकत्ता में
>> गाय
>> काटने का कत्लखाना शुरू किया, पहला शराबखाना शुरू किया, पहला वेश्यालय
>> शुरू
>> किया और इस देश में जहाँ जहाँ अंग्रेजों की छावनी हुआ करती थी वहां वहां
>> वेश्याघर बनाये गए, वहां वहां शराबखाना खुला, वहां वहां गाय के काटने के
>> लिए
>> कत्लखाना खुला | ऐसे पुरे देश में 355 छावनियां थी उन अंग्रेजों के | अब
>> ये सब
>> क्यों बनाये गए थे ये आप सब आसानी से समझ सकते हैं | अंग्रेजों के जाने के
>> बाद ये सब ख़त्म हो जाना चाहिए था लेकिन नहीं हुआ क्योंक़ि ये भी इसी संधि
>> में
>> है |
>> - हमारे देश में जो संसदीय लोकतंत्र है वो दरअसल अंग्रेजों का
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VISHIST SADASHY
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आदरणीय दोस्तों
सत्ता के हस्तांतरण की संधि ( Transfer of Power Agreement )
आपने देखा होगा कि राजीव भाई बराबर सत्ता के हस्तांतरण के संधि के बारे में बाट करते थे और आप बार बार सोचते होंगे कि आखिर ये क्या है ? मैंने उनके अलग अलग व्याख्यानों में से इन सब को जोड़ के आप लोगों के लिए लाया हूँ उम्मीद है कि आपको न पसंद आएगी | पढ़िए सत्ता के हस्तांतरण की संधि ( Transfer of Power Agreement ) यानि भारत के आज़ादी की संधि | ये इतनी खतरनाक संधि है की अगर आप अंग्रेजों द्वारा सन 1615 से लेकर 1857 तक किये गए सभी 565 संधियों या कहें साजिस को जोड़ देंगे तो उस से भी ज्यादा खतरनाक संधि है ये | 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी नहीं आई बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट हुआ था पंडित नेहरु और लोर्ड माउन्ट बेटन के बीच में | Transfer of Power और Independence ये दो अलग चीजे है | स्वतंत्रता और सत्ता का हस्तांतरण ये दो अलग चीजे है | और सत्ता का हस्तांतरण कैसे होता है ? आप देखते होंगे क़ि एक पार्टी की सरकार है, वो चुनाव में हार जाये, दूसरी पार्टी की सरकार आती है तो दूसरी पार्टी का प्रधानमन्त्री जब शपथ ग्रहण करता है, तो वो शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करता है, आप लोगों में से बहुतों ने देखा होगा, तो जिस रजिस्टर पर आने वाला प्रधानमन्त्री हस्ताक्षर करता है, उसी रजिस्टर को ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर की बुक कहते है और उस पर हस्ताक्षर के बाद पुराना प्रधानमन्त्री नए प्रधानमन्त्री को सत्ता सौंप देता है | और पुराना प्रधानमंत्री निकल कर बाहर चला जाता है | यही नाटक हुआ था 14 अगस्त 1947 की रात को 12 बजे | लार्ड माउन्ट बेटन ने अपनी सत्ता पंडित नेहरु के हाथ में सौंपी थी, और हमने कह दिया कि स्वराज्य आ गया | कैसा स्वराज्य और काहे का स्वराज्य ? अंग्रेजो के लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ? और हमारे लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ? ये भी समझ लीजिये | अंग्रेज कहते थे क़ि हमने स्वराज्य दिया, माने अंग्रेजों ने अपना राज तुमको सौंपा है ताकि तुम लोग कुछ दिन इसे चला लो जब जरुरत पड़ेगी तो हम दुबारा आ जायेंगे | ये अंग्रेजो का interpretation (व्याख्या) था | और हिन्दुस्तानी लोगों की व्याख्या क्या थी कि हमने स्वराज्य ले लिया | और इस संधि के अनुसार ही भारत के दो टुकड़े किये गए और भारत और पाकिस्तान नामक दो Dominion States बनाये गए हैं | ये Dominion State का अर्थ हिंदी में होता है एक बड़े राज्य के अधीन एक छोटा राज्य, ये शाब्दिक अर्थ है और भारत के सन्दर्भ में इसका असल अर्थ भी यही है | अंग्रेजी में इसका एक अर्थ है "One of the self-governing nations in the British Commonwealth" और दूसरा "Dominance or power through legal authority "| Dominion State और Independent Nation में जमीन आसमान का अंतर होता है | मतलब सीधा है क़ि हम (भारत और पाकिस्तान) आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं | दुःख तो ये होता है की उस समय के सत्ता के लालची लोगों ने बिना सोचे समझे या आप कह सकते हैं क़ि पुरे होशो हवास में इस संधि को मान लिया या कहें जानबूझ कर ये सब स्वीकार कर लिया | और ये जो तथाकथित आज़ादी आयी, इसका कानून अंग्रेजों के संसद में बनाया गया और इसका नाम रखा गया Indian Independence Act यानि भारत के स्वतंत्रता का कानून | और ऐसे धोखाधड़ी से अगर इस देश की आजादी आई हो तो वो आजादी, आजादी है कहाँ ? और इसीलिए गाँधी जी (महात्मा गाँधी) 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में नहीं आये थे | वो नोआखाली में थे | और कोंग्रेस के बड़े नेता गाँधी जी को बुलाने के लिए गए थे कि बापू चलिए आप | गाँधी जी ने मना कर दिया था | क्यों ? गाँधी जी कहते थे कि मै मानता नहीं कि कोई आजादी आ रही है | और गाँधी जी ने स्पस्ट कह दिया था कि ये आजादी नहीं आ रही है सत्ता के हस्तांतरण का समझौता हो रहा है | और गाँधी जी ने नोआखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी | उस प्रेस स्टेटमेंट के पहले ही वाक्य में गाँधी जी ने ये कहा कि मै हिन्दुस्तान के उन करोडो लोगों को ये सन्देश देना चाहता हु कि ये जो तथाकथित आजादी (So Called Freedom) आ रही है ये मै नहीं लाया | ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में फंस कर लाये है | मै मानता नहीं कि इस देश में कोई आजादी आई है | और 14 अगस्त 1947 की रात को गाँधी जी दिल्ली में नहीं थे नोआखाली में थे | माने भारत की राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा जिसने हिन्दुस्तान की आज़ादी की लड़ाई की नीव रखी हो वो आदमी 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में मौजूद नहीं था | क्यों ? इसका अर्थ है कि गाँधी जी इससे सहमत नहीं थे | (नोआखाली के दंगे तो एक बहाना था असल बात तो ये सत्ता का हस्तांतरण ही था) और 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी नहीं आई .... ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट लागू हुआ था पंडित नेहरु और अंग्रेजी सरकार के बीच में | अब शर्तों की बात करता हूँ , सब का जिक्र करना तो संभव नहीं है लेकिन कुछ महत्वपूर्ण शर्तों की जिक्र जरूर करूंगा जिसे एक आम भारतीय जानता है और उनसे परिचित है ...............
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