भारत स्वभिमान संगठन में फैली अव्यवस्थाओ का जवाब

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ravindersanjay

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Oct 7, 2010, 9:34:55 AM10/7/10
to bharatswab...@googlegroups.com
ॐ Raj Kumar Pandey जी / Roop Kumar जी,
 
आपको मेरा सुझाव है की भारत स्वाभिमान शंखनाद के २० CD का सेट आप मोबाइल , पेन drive , CD , ईमेल , ब्लॉग और जन संपर्क द्वारा जन जन तक पहुचाने  का प्रयास करते रहे  ( मेरी तरह ) . मैं ने राजीव दिक्सित जी से  समय समय पर इस ब्लॉग मैं पोस्ट होने वाली आव्यवास्थाओ का जिक्र किया है वे अवश्य ही कुछ प्रयास करके व्यस्था को ठीक करने की कोशिश करेंगे  एसी  उम्मीद करता हूँ . धीरे धीर सब ठीक हो जायगा क्योंकि भारत स्वाभिमन के स्पीड तेज है और हरिद्वार केंद्र अभी सभी कुछ संभल नहीं पा रहा है शायद . क्योंकि ये mission हमारा अपना  mission  है और इसकी खुद की  व्यवस्था भी हमको ही  ठीक करनी है क्योंकि बाबा रामदेव जी और राजीव दिक्सित जी क्या क्या संभालेगे . वो केवल दिशा दे सकते है करना तो हमको ही पड़ेगा . जो जाग गए है ये उनकी ही  जिम्मदारी बनती है के वो औरो को जगाएं   और mission को धीमा करने वाले और ख़राब करने वाले भारत स्वाभिमान के सदस्यों से भी सावधान रहे और  उनको सुधरने जाने या हट जाने का सुझाव दे दे .
साथ ही मैं पूजनीय बाबाजी   और राजीव जी से विनती  करना चाहता हूँ की आपने संगठन के लिए एक फूलप्रूफ सिस्टम देने का वादा किया है क्रपा कर के उस को आपने प्राथमिकता की लिस्ट में रखे .नहीं तो भारत स्वाभिमानियो का अगर मनोबल टूट गया तो देश बर्बाद 
होना निश्चित है .  और राजीव भाई की " एतिहासिक भूले " की  लिस्ट में  ये और जुड़ जायगा की बाबा जी संगठन के लिए एक फूलप्रूफ सिस्टम नहीं दे पाए और भारत स्वाभिमान आन्दोलन बिखर गया
मैं ने कुछ गलत कहा है तो कृपा करके बाकी सदस्य   सुधार कर दे . धन्यवाद

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 Raj Kumar Pandey <pandey....@ymail.com> Oct 05 11:40PM -0700 ^
 
Raj Kumar Pandey
Yog Teacher,
Bharat Swabhiman Vishisht Member,
Patanjali Yogpeeth Sammanit Member
Noida  
 
................... We can still unite under a federation or a union
(like European Union) called Akhand Bharat (comprising India, Pakistan,
Bangladesh, Bhutan, Srilanka, Myanmar, Nepal, Ahghanistan) under the guidance
and leadership of Yogrishi and Rajrishi Pujya Swami Ramdevji, provided
Swamiji start taking interest in building the organisation of committed workers
at district/tehsil/block level, which is presently under the control of
vision-less persons (Prabharis at all levels) who are not interested in Yog,
Swadeshi and Selfless Service, but only interested in making money and promoting
their selfish interests by encashing the popularity of Swamiji. All these
Prabharis speak/behave in the most dictatorial manner, whenever we talk to
them.  Thousands of old and new members have left our Sanstha and thousand
others are hesitating to join our Sanstha, only because of
insult/non-recognition from these Prabharis. 
 
Jai Bharat !
Vande Mataram !
 
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roop shur <roo...@yahoo.com> Oct 06 01:59AM -0700 ^
 
Om Raj Kumar Pandeyji,
This is Roop Kumar from Chennai. I was fortunate to be trained directly under Bhabaji in the first batch of teachers in 2006.
Since our return we had worked hard for the development of Yog and Bhabha's vision.
I was the first Organising Secretary of Patanjali Yog Samiti in Tamilnadu. My brothers in Yog and me spent money from our own pocket to develop the vision.
 
Now with the advent of New Office bearers (like the way you have mentioned and money from Haridwar the movement has lost its focus)
 
I have left the movement totally disillusioned and there many such others who have left after sacrificing their time and money - because of the current situation.
 
Jai Hind - only Bhabha should find methods to save us from these vagaries and protect true and honest devotees.
 
Roop Kumar
 
 

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Thanks and Regards,
Ravinder Kumar    

Pune / Gurgaon

Mob:    08928232212

 




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Thanks and Regards,
Ravinder Kumar    

Pune / Gurgaon

Mob:    08928232212

 

Anil Mittal

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Oct 8, 2010, 2:51:03 AM10/8/10
to bharatswab...@googlegroups.com
आदरणीय भारत स्वाभिमानी  भाइयो और बहनो,
                                                                      सप्रेम ओम! परम पूजनीय स्वामी रामदेव महाराज श्री, आदरणीय आचार्य श्री बाल किशन जी हमारे कीर्तिस्तम्भ है, ऐसे प्रकाश पुन्ज है, जिनका सारा जीवन विशव कल्याण  के लिये ही परम सत्ता ने निर्मित किया है। मा भारती के गुलामी  की बेडियां काटने के लिये भारतीय नागरिको मे स्वाभिमान् एवं आत्म चेतना के द्वारा राष्ट्र धर्म का दायित्व निभाने का जज्बा (भारत स्वाभिमान् आन्दोलन की रचना करके महाराज श्री योग एवं प्राणायाम को मूल मे रखते हुए।)  पैदा कर रहे है। राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय स्तर का यह  आन्दोलन है, हम सब् भारतीय नागरिक बिना किसी दबाव के अपनी आत्मा की पुकार से, अपना दायित्व एवं कर्तव्य देश के प्रति पूरा करने के लिये इस अभियान मे सक्रिय रूप से सम्मिलित हैं।
                    
                         यह आन्दोलन पुरे  समर्पण,लगन, निष्ठा, समय, धन, बलिदान से ही परवान चडेगा और मन्जिल को प्राप्त करेगा। इसके लिये हमे अपने मान सम्मान, अहन्कार, स्वार्थ, प्रलोभन, प्रतिस्पर्धा, द्वन्द इत्यादि को दरकिनार रखते हुए कार्य करना पडेगा। यह आन्दोलन और संगठन मेरा है इसकी प्रत्येक सफ़लता मेरी निज की सफ़लता है ये भाव हमारा होना चाहिये, आपका सत्य और कर्म आदर्श स्थापित करेगा और यही निष्क्रिय एवं स्वार्थी सदस्यो मे भी सुधार लायेगा और उनका स्थान निश्चित करेगा।
 
जय भारत वन्देमातरम!
अनिल मित्तल  
                       
                                                                  

Shankar Dutt Fulara

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Oct 8, 2010, 7:58:25 AM10/8/10
to bharatswab...@googlegroups.com
आपका कथन गलत नहीं है | वैसे हमें पूरी आशा है कि स्वामी जी, आचार्य जी, राजीव जी, व अन्य पूरी टीम,संदीप जी, जयदीप जी बहन सुमन जी, और अन्य भी,हमें फुलप्रूफ सिस्टम देंगे |      

७ अक्तूबर २०१० ७:०४ अपराह्न को, ravindersanjay <ravinde...@gmail.com> ने लिखा:

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ajay mehta

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Oct 11, 2010, 11:24:04 PM10/11/10
to bharatswab...@googlegroups.com
जय भारत
भाई अनिलजी आप कि भारत स्वाभिमान के प्रति लागण और निष्ठा को देखकर लगता हें कि कुछः  हो सकता हें. पर यह भी सत्य हें कि अगर कही भी किसी भी रूप में करणी  और कथनी में भेद होता हें तो एक सामान्य जन का उससे भरोसा उठना लाजमी हें.
आज जिस प्रकार से चारो और झूठ का वोलबाला, स्वामीजी और राजीवजी को भारत मां के महान सपूतो
अमर शहीद सुभाषचंद्रबोस, आजाद, बिस्मिल, भगतसिंह जैसे व्य्क्तीत्वो को हर भारतीय के समाने रखकर हीं आगे  बदना होगा. यह मेरा अपना मन्ना हें. हो सकता हें कि भाबुक्ता में  कुछः ज्यादा हीं कह दिया तो शंमांप्राथी हू.
 
जय भारत
 
 
2010/10/8 Shankar Dutt Fulara <shanka...@gmail.com>

subodh kumar

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Oct 12, 2010, 11:22:19 PM10/12/10
to bharatswab...@googlegroups.com, bstd...@gmail.com, tpt...@gmail.com, col.r...@gmail.com
यह भारत  वर्ष का  परम  सौभाग्य है कि  परम पुरुष परम  पूजनीय  बाबा रामदेव जी ने मानव  कल्याण हेतु एक  क्रान्ति आरम्भ  कर  दी है . जिस  ऊर्जा  और मन्यु  से  वे प्रत्येक  प्रातः सायं  किसी  नए  नगर  स्थान  स्थान  पर  पहुँच कर आह्वान कर  रहे  हैं  वह मानवीय  नहीं  दैवीय शक्ति  ही है .
परन्तु यदि  हमारी भिन्न भिन्न नगरों  में मात्र सदस्य  बनाने  के  काम  में इतनी अव्यवस्था  है  तो  बड़े दुःख से  कहना पड़ता  है  की भारत  स्वाभिमान   मात्र  सदस्य  बनाने के एक तुच्छ तम कार्य   में अव्यवस्था के ऐसे प्रदर्शन से हमारे  देश  के सरकार  के  तंत्र  को जो भारत सरकार चलाने  का  भीष्म कार्य है , क्या नई क्रान्ति कारी स्वच्छ दिशा कैसे  दे सकेगा?
पूज्य  स्वामी  जी का भागीरथ  प्रयास  क्या नष्ट  नहीं  हो  जावेगा. ? अंग्रेज़ी में कहते  हैं  After  me the deluge.
सुबोध कुमार

2010/10/12 ajay mehta <sga...@gmail.com>
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