अरे बंधु, संपूर्ण संसार की विरासत हमारी ही तो है| जो विचार या तकनीक ज्यादा उपयोगी हो, उसे अपनाना है| देश-प्रेम का मतलब यह थोड़े है कि दुसरे देश के चिंतकों का योगदान अपनाना कोई गलत बात हो जाएगी| फिर भी यदि किसी चीज़ को भारतवासियों को अपनाने के लिए प्रेरित ही करना है तो हमें तर्कपूर्वक यह साबित करना होगा कि हमारा विचार ज्यादा उपयोगी है| क्या आप भारतीय और वर्तमान समय-पद्धति के बीच तुलनात्मक विश्लेषण कर यह साबित करने की कोशिश करेंगे कि इन दोनों के क्या फायदें और कमियां हैं और किस प्रकार भारतीय समय-पद्धति वर्तमान समय-पद्धति से ज्यादा उपयोगी है? मुझे वर्तमान समय-पद्धति में कोई बड़ी खामी नहीं दिखाई देती है| रात १२ बजे दिन बदल जाता है तो इसमें तकलीफ कि क्या बात है - यह तो एक मानक मात्र है| व्यक्ति के लिए दिन ४ बजे या जब भी वह जागे, शुरू हो सकता है|
किसी भी नयी पद्धति को व्यापक स्तर पर अपनाने में काफी उर्जा लगती है| अतः काफी समझदारी की आवश्यकता है| और जब बहुत सारे लक्ष्य हों, तब हमें उनके पारस्परिक महत्व के आधार पर कुछ लक्ष्यों को पहले पाने की चेष्टा करनी चाहिए| अभी तो भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोजगारी, अपराध-नियंत्रण, जनसँख्या नियंत्रण आदि पर सबसे ज्यादा ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है| बिना इस समझदारी के दिखाए, सफलता मिलने की सम्भावना घट जाती है - राजनीति में परिवर्तन करना महापुरुषों के लिए भी आसान नहीं होता, पूरा इतिहास इस बात की गवाही देता है| यह संसार नैतिकता से ज्यादा कर्म-बल से चलता है| यदि अच्छे लोगों की योजनाओं और परिश्रम में बुद्धि और युक्ति का अभाव होगा, तो उन्हें भी मुहँ की खानी पड़ती है| इन बिन्दुओं पर नम्रतापूर्वक विचार करें|
धन्यवाद|
आपका बंधु,
गोपाल
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