कितना कहना चाहता हु,पर कैसे बताऊ- ऐसी हालत है जैसी १५ अगस्त १९४७ के बाद हर सच्चे भारतीयों की हो गयी होगी |
आज १५ अगस्त है ,पर दिल खुश नहीं |
आधी जिंदगी गयी गुलामी में |
समज में जब आयी भारत और उसकी गरिमा को ,ये आज़ादी अब लग रही हे अधूरी |
प्रभु से प्रार्थना हे मुझे मेरा भारत वापस दे दो ,मेरा खून चाहे तो पूरा ले लो |
भारत के विरोंकी कसम- जिऊंगा तो भारत के लिया और मारूंगा तो भारत के लिया |
महसूस करो क्रांतिकारियों के दर्द को जिनको लिटाया था कांटो की शैया पर, दर्द होता हे ना जब कांटा चुबता है |
भारत में हो तो भारतीय भाषा बोलो,फिरंगियों को अब भगाना - तन मन और विचारोंसे |
व्यर्थ हे वो विचार जिसमे भारतीयता न हो |
क्या मिला ६३ सालों में भूख ,लाचारी ,पीढा ,अशिक्षा - कुछ १% काले फिरंगियों की वजह से |
हम तो समज गए पर अब समझाना अपने भाइय्यों को ,अंग्रजो ने हम पर राज़ किया क्यों की वे चालाक थे और हम भोले |
लेकिन अब हमारा वक्त हे - इनका षड़यंत्र से वाकिब हे ,गलती अब नहीं दोहराएँगे ,क्रांति करनी हे विचारों से - सतर्क रहना हमेशा से |
दुविधा में हो तो प्रार्थना करो प्रभु से ,आशीर्वाद लो बाबजी से |
कठिन परिस्तिथियों में ध्यान रहे बलिदोंका ,अभी सपना साकार करना हे क्रन्तिकारों का |
Lets convert India into भारत |
वन्दे मातरम!
जय भारत !