ऋषि-मुनियों का वैज्ञानिक इतिहास !

622 views
Skip to first unread message

Jugal Kishore Somani

unread,
Jun 23, 2012, 2:04:07 AM6/23/12
to Bharat Trust, hindusth...@googlegroups.com, jay.cho...@gmail.com, KhabarIndiya, B P S Chandel, DR. HARISHCHANDRA SHAH, Dr. Ved Pratap Vaidik, Dr. Jaideep Arya, Dr. Ashutosh vajpeyee, dr.deepa...@gmail.com, Dr. Ernest Albert, Dr. Ved Pratap Vaidik
भाई श्री मुकुल शुक्ल जी द्वारा प्रेषित अतिमहत्वपूर्ण जानकारी , जिसे पढ़ कर आप दांतों तले अंगुली दबा लेंगे .....
* हिंदुस्तान के गौरवशाली ऋषि-मुनियों का वैज्ञानिक इतिहास !

जिनमे से कुछ का विवरण यहाँ हम दे रहें है ..

हिंदु वेदोंको मान्यता देते हैं और वेदोंमें विज्ञान बताया गया है । केवल सौ वर्षोंमें पृथ्वीको नष्टप्राय बनानेके मार्गपर लानेवाले आधुनिक विज्ञानकी अपेक्षा, अत्यंत प्रगतिशील एवं एक भी समाजविघातक शोध न करनेवाला प्राचीन ‘हिंदु विज्ञान’ था ।
पूर्वकालके शोधकर्ता हिंदु ऋषियोंकी बुद्धिकी विशालता देखकर आजके वैज्ञानिकोंको अत्यंत आश्चर्य होता है । पाश्चात्त्य वैज्ञानिकोंकी न्यूनता सिद्ध करनेवाला शोध सहस्रों वर्ष पूर्व ही करनेवाले हिंदु ऋषिमुनि ही खरे वैज्ञानिक शोधकर्ता हैं ।

गुरुत्वाकर्षणका गूढ उजागर करनेवाले भास्कराचार्य !

भास्कराचार्यजीने अपने (दूसरे) ‘सिद्धांतशिरोमणि’ ग्रंथमें गुरुत्वाकर्षणके विषयमें लिखा है कि, ‘पृथ्वी अपने आकाशका पदार्थ स्व-शक्तिसे अपनी ओर खींच लेती हैं । इस कारण आकाशका पदार्थ पृथ्वीपर गिरता है’ । इससे सिद्ध होता है कि, उन्होंने गुरुत्वाकर्षणका शोध न्यूटनसे ५०० वर्ष पूर्व लगाया ।

* परमाणुशास्त्रके जनक आचार्य कणाद !

अणुशास्त्रज्ञ जॉन डाल्टनके २५०० वर्ष पूर्व आचार्य कणादजीने बताया कि, ‘द्रव्यके परमाणु होते हैं । ’विख्यात इतिहासज्ञ टी.एन्. कोलेबु्रकजीने कहा है कि, ‘अणुशास्त्रमें आचार्य कणाद तथा अन्य भारतीय शास्त्रज्ञ युरोपीय शास्त्रज्ञोंकी तुलनामें विश्वविख्यात थे ।’

* कर्करोग प्रतिबंधित करनेवाला पतंजलीऋषिका योगशास्त्र !

‘पतंजलीऋषि द्वारा २१५० वर्ष पूर्व बताया ‘योगशास्त्र’, कर्करोग जैसी दुर्धर व्याधिपर सुपरिणामकारक उपचार है । योगसाधनासे कर्करोग प्रतिबंधित होता है ।’ - भारत शासनके ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्था’के (‘एम्स’के) ५ वर्षोंके शोधका निष्कर्ष !

* औषधि-निर्मितिके पितामह : आचार्य चरक !

इ.स. १०० से २०० वर्ष पूर्व कालके आयुर्वेद विशेषज्ञ चरकाचार्यजी । ‘चरकसंहिता’ प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथके निर्माणकर्ता चरकजीको ‘त्वचा चिकित्सक’ भी कहते हैं । आचार्य चरकने शरीरशास्त्र, गर्भशास्त्र, रक्ताभिसरणशास्त्र, औषधिशास्त्र इत्यादिके विषयमें अगाध शोध किया था । मधुमेह, क्षयरोग, हृदयविकार आदि दुर्धररोगोंके निदान एवं औषधोपचार विषयक अमूल्य ज्ञानके किवाड उन्होंने अखिल जगतके लिए खोल दिए । चरकाचार्यजी एवं सुश्रुताचार्यजीने इ.स. पूर्व ५००० में लिखे गए अर्थववेदसे ज्ञान प्राप्त करके ३ खंडमें आयुर्वेदपर प्रबंध लिखे ।

* शल्यकर्ममें निपुण महर्षि सुश्रुत !

६०० वर्ष ईसापूर्व विश्वके पहले शल्यचिकित्सक (सर्जन) महर्षि सुश्रुत शल्यचिकित्साके पूर्व अपने उपकरण उबाल लेते थे । आधुनिक विज्ञानने इसका शोध केवल ४०० वर्ष पूर्व किया ! महर्षि सुश्रुत सहित अन्य आयुर्वेदाचार्य त्वचारोपण शल्यचिकित्साके साथ ही मोतियाबिंद, पथरी, अस्थिभंग इत्यादिके संदर्भमें क्लिष्ट शल्यकर्म करनेमें निपुण थे । इस प्रकारके शल्यकर्मोंका ज्ञान पश्चिमी देशोंने अभीके कुछ वर्षोंमें विकसित किया है !

महर्षि सुश्रुतद्वारा लिखित ‘सुश्रुतसंहिता' ग्रंथमें शल्य चिकित्साके विषयमें विभिन्न पहलू विस्तृतरूपसे विशद किए हैं । उसमें चाकू, सुईयां, चिमटे आदि १२५ से भी अधिक शल्यचिकित्सा हेतु आवश्यक उपकरणोंके नाम तथा ३०० प्रकारके शल्यकर्मोंका ज्ञान बताया है ।

* नागार्जुन

नागार्जुन, ७वीं शताब्दीके आरंभके रसायन शास्त्रके जनक हैं । इनका पारंगत वैज्ञानिक कार्य अविस्मरणीय है । विशेष रूपसे सोने धातुपर शोध किया एवं पारेपर उनका संशोधन कार्य अतुलनीय था । उन्होंने पारेपर संपूर्ण अध्ययन कर सतत १२ वर्ष तक संशोधन किया । पश्चिमी देशोंमें नागार्जुनके पश्चात जो भी प्रयोग हुए उनका मूलभूत आधार नागार्जुनके सिद्धांतके अनुसार ही रखा गया |

* बौद्धयन

२५०० वर्ष पूर्व (५०० इ.स.पूर्व) ‘पायथागोरस सिद्धांत’की खोज करनेवाले भारतीय त्रिकोणमितितज्ञ । अनुमानतः २५०० वर्षपूर्व भारतीय त्रिकोणमितिवितज्ञोंने त्रिकोणमितिशास्त्रमें महत्त्वपूर्ण शोध किया । विविध आकार-प्रकारकी यज्ञवेदियां बनानेकी त्रिकोणमितिय रचना-पद्धति बौद्धयनने खोज निकाली । दो समकोण समभुज चौकोनके क्षेत्रफलोंका योग करनेपर जो संख्या आएगी उतने क्षेत्रफलका ‘समकोण’ समभुज चौकोन बनाना और उस आकृतिका उसके क्षेत्रफलके समानके वृत्तमें परिवर्तन करना, इस प्रकारके अनेक कठिन प्रश्नोंको बौद्धयनने सुलझाया |

* ऋषि भारद्वाज

राइट बंधुओंसे २५०० वर्ष पूर्व वायुयानकी खोज करनेवाले भारद्वाज ऋषि !

आचार्य भारद्वाजजीने ६०० वर्ष इ.स.पूर्व विमानशास्त्रके संदर्भमें महत्त्वपूर्ण संशोधन किया । एक ग्रहसे दूसरे ग्रहपर उडान भरनेवाले, एक विश्वसे दूसरे विश्व उडान भरनेवाले वायुयानकी खोज, साथ ही वायुयानको अदृश्य कर देना इस प्रकारका विचार पश्चिमी शोधकर्ता भी नहीं कर सकते । यह खोज आचार्य भारद्वाजजीने कर दिखाया ।

पश्चिमी वैज्ञानिकोंको महत्वहीन सिद्ध करनेवाले खोज, हमारे ऋषि-मुनियोंने सहस्त्रों वर्ष पूर्व ही कर दिखाया था । वे ही सच्चे शोधकर्ता हैं ।

* गर्गमुनि

कौरव-पांडव कालमें तारों के जगतके विशेषज्ञ गर्ग मुनिजीने नक्षत्रोंकी खोजकी । गर्गमुनिजीने श्रीकृष्ण एवं अर्जुनके जीवनके संदर्भमें जो कुछ भी बताया वह शत प्रतिशत सत्य सिद्ध हुआ । कौरव-पांडवोंका भारतीय युद्ध मानव संहारक रहा, क्योंकि युद्धके प्रथम पक्षमें तिथि क्षय होनेके तेरहवें दिन अमावस थी । इसके द्वितीय पक्षमें भी तिथि क्षय थी । पूर्णिमा चौदहवें दिन पड गई एवं उसी दिन चंद्रग्रहण था, यही घोषणा गर्ग मुनि जीने भी की थी .
 
जुगल किशोर सोमाणी , जयपुर  

Ravinder Kumar Jayalwal

unread,
Jun 25, 2012, 12:52:49 AM6/25/12
to bharatswab...@googlegroups.com, hindusth...@googlegroups.com, jay.cho...@gmail.com, KhabarIndiya, B P S Chandel, DR. HARISHCHANDRA SHAH, Dr. Ved Pratap Vaidik, Dr. Jaideep Arya, Dr. Ashutosh vajpeyee, dr.deepa...@gmail.com, Dr. Ernest Albert, Dr. Ved Pratap Vaidik

ओ३म,
इन तथ्यों को में ने एक पॉवर पॉइंट के रूप में संकलित किया है  देखे
https://docs.google.com/open?id=0B4InnTrDJm9eelB5Sm80WnlMLTQ
सभी पॉवर पॉइंट यहाँ से देखे
http://www.socialservicefromhome.com/p/blog-page_01.html


|| Vande Maatram ||
Ravinder Jayalwal
Pune
Mob : 09028481706
-------------------------------------------------------------------------------------------------
आपने स्वयं और अपने परिवारके लिए सब कुछ किया, देश के लिए भी कुछ करिये,
क्या यह देश सिर्फउन्ही लोगो का है जो सीमाओं पर मर जाते हैं??? सोचिये......

घर बैठे भी आप देश के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं , जानने के लिए क्लिक करे
www.SocialServiceFromHome.com 
*To keep yourself fit and fine without spending any money , Please watch "AASTHA"
channel from 5.00 A.M. TO 8.00 A.M. and from 8.00 P.M. TO 9.00 P.M. every
day. Make yoga as your daily routine and Ayurveda your life style *
**
*Other Useful Link : www.rajivdixit.com*




2012/6/23 Jugal Kishore Somani <jugalkish...@yahoo.co.in>

--
Manage emails receipt at http://groups.google.com/group/bharatswabhimantrust/subscribe
To post ,send email to bharatswab...@googlegroups.com
http://www.rajivdixit.com - Rajiv Dixit audio and videos lectures.
http://www.bharatswabhimanyatra.com - Swami Ramdev's Yatra Videos
http://www.bharatswabhimantrust.org - Bharat Swabhiman Official website

Yogesh Shitre

unread,
Jun 25, 2012, 1:00:26 AM6/25/12
to bharatswab...@googlegroups.com

Namste.
Thanks for your information could you plz share more information.
Dhnyawad

--

debakanta sandha

unread,
Jun 25, 2012, 7:34:24 AM6/25/12
to bharatswab...@googlegroups.com
आज हम ज्यादा भाग्यवान होते अगर मोगलों के बजाय हम हमारे पूर्वज जो ऋषि, मुनि और आचार्यों के बारें में विद्यालयों के दिन से पढ़ते.
उन लोगोँ का दिया हुआ ज्ञान,विज्ञानं को जन पाते.
उन लोगोँ का शोध करने के बिधि से अवगत होते.
उन लोगोँ की उद्भावनों को जानते और सिख पाते.
उन लोगोँ की अविष्कारों को जान पाते और सिख पाते.
आखिर हम मोगलों के बारें में क्यूँ पढ़ते हें.
हमारी पाठ्यक्रमों को परिवर्तन किया जाए.
हम भास्कराचार्य, आर्यभट, ऋषि अगस्ति, ऋषि भरद्वाज,सप्त्रिशी, चरक, सुश्रुत के बिषय में पढाई करना चाहते हें.
आखिर कब हमारा पाठ्यक्रम परिवर्तन होगा?
 
जय माँ भारती
 
 

Kamal Rawat

unread,
Jun 26, 2012, 12:40:18 AM6/26/12
to bharatswabhimantrust
I have put it in a post with english translations at some point and
some additions (including the photos of Rishi-Munis).. Visit the below
link.

http://www.social.ritambhara.in/scientific-history-of-indian-rishi-munis/

Please also like the Facebook page

https://www.facebook.com/pages/socialritambhara/410568675648733

On Jun 23, 11:04 am, Jugal Kishore Somani

> राइट ...
>
> read more »

Pankaj

unread,
Jun 27, 2012, 1:28:48 AM6/27/12
to bharatswab...@googlegroups.com, hindusth...@googlegroups.com, jay.cho...@gmail.com, KhabarIndiya, B P S Chandel, DR. HARISHCHANDRA SHAH, Dr. Ved Pratap Vaidik, Dr. Jaideep Arya, Dr. Ashutosh vajpeyee, dr.deepa...@gmail.com, Dr. Ernest Albert, Dr. Ved Pratap Vaidik, Jugal Kishore Somani
जय श्रीराम ,

बिल्कुल सहि....

हमारे ॠषीमुनियोंने विश्व के कल्याण हेतू अपना सारा जीवन ग्यान के खोज करने मे लगा दिया । लेकिन आज हमे हमारा गौरवशाली इतिहास सिखाया हि नहि जाता ।  आज भी हमे मेकाले बनायी हमारी बुध्दी को भ्रष्ट बनानेवाली शिक्षा दि जाती है । हमे अपने गौरवशाली इतिहास का अध्ययन करना होगा और उसका प्रसार करना होगा ।

-पंकज उपकारे..

Get up & win the Race :

Satish Kumar

unread,
Jul 2, 2012, 4:35:15 AM7/2/12
to bharatswab...@googlegroups.com
On 6/27/12, Pankaj <psu_p...@yahoo.com> wrote:
> जय श्रीराम ,
>
> बिल्कुल सहि....
>
> हमारे ॠषीमुनियोंने विश्व के कल्याण हेतू अपना सारा जीवन ग्यान के खोज करने मे
> लगा दिया । लेकिन आज हमे हमारा गौरवशाली इतिहास सिखाया हि नहि जाता । आज भी
> हमे मेकाले बनायी हमारी बुध्दी को भ्रष्ट बनानेवाली शिक्षा दि जाती है । हमे
> अपने गौरवशाली इतिहास का अध्ययन करना होगा और उसका प्रसार करना होगा ।
>
> -पंकज उपकारे..
>
> Get up & win the Race :
> http://enjoythegodgiftoflife.blogspot.in/
>
>
>
> On Saturday, 23 June 2012 11:34:07 UTC+5:30, JKS wrote:
>>
>> *भाई श्री मुकुल शुक्ल जी द्वारा प्रेषित अतिमहत्वपूर्ण जानकारी , जिसे पढ़

>> कर आप दांतों तले अंगुली दबा लेंगे .....*
>> ** हिंदुस्तान के गौरवशाली ऋषि-मुनियों का वैज्ञानिक इतिहास !*
>> चंद्रग्रहण था, यही घोषणा गर्ग मुनि जीने भी की थी *.*

>>
>> जुगल किशोर सोमाणी , जयपुर
>>
>
> On Saturday, 23 June 2012 11:34:07 UTC+5:30, JKS wrote:
>>
>> *भाई श्री मुकुल शुक्ल जी द्वारा प्रेषित अतिमहत्वपूर्ण जानकारी , जिसे पढ़

>> कर आप दांतों तले अंगुली दबा लेंगे .....*
>> ** हिंदुस्तान के गौरवशाली ऋषि-मुनियों का वैज्ञानिक इतिहास !*
>> चंद्रग्रहण था, यही घोषणा गर्ग मुनि जीने भी की थी *.*

>>
>> जुगल किशोर सोमाणी , जयपुर
>>
>

SOMU

unread,
Jul 3, 2012, 8:25:48 AM7/3/12
to bharatswab...@googlegroups.com, hindusth...@googlegroups.com, jay.cho...@gmail.com, KhabarIndiya, B P S Chandel, DR. HARISHCHANDRA SHAH, Dr. Ved Pratap Vaidik, Dr. Jaideep Arya, Dr. Ashutosh vajpeyee, dr.deepa...@gmail.com, Dr. Ernest Albert, Dr. Ved Pratap Vaidik, Jugal Kishore Somani
Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages