प्रिय मित्रो ॐ
मै काफी दिनों से ॐ शब्द पर अपने अनुभव बाटना चाह रहा था की इतफाक से एक मेल ने जो अशोक जी द्वारा लिखी गयी पड कर बहुत ही आनंद आया भाग्यवश यह हमारे गुरूजी द्वारा दिया गया गुरु मन्त्र भी है और हम सभी ॐ शब्द के फल से वशीभूत है ! और हम सभी प्रति दिन ॐ शब्द का प्रियोग कर अपनी चेतना को जागते है ! और अपने अन्दर उठ रहे असुरिया उद्दंदो को ॐ द्वारा शांत कर अपने शारीर का पुनेह निर्माण कर रहे है ! अबतक जितने भी ज्ञानी, ऋषि, संत, गुरु, सभी ॐ शब्द से सही ज्ञान अर्जित कर परब्रह्म में अपना निवाश बना चुके है ! और समाज कल्याण में अपना महत पूर्ण जीवन लगा चुके है ! ग्रंथो, पुराणों, में ॐ शब्द का अर्थ (टेलीपेथी) अर्थात इश्वर से सम्भन्ध स्थापित करने का मूल मत्र है कहते है की विदुत की गति से भी तीव्र गति मन की होती है अर्थात मनमे ॐ साधना मत्र से अपने विचार मीलो दूर बैठे अपने मित्र तक पहुचाये जा सकते है ! यह विज्ञानिक सत्य है ! तो इश्वर तक अपना सन्देश पहुचना उतनाही सरल है जितना आपका सन्देश वाहक टेलीफ़ोन ! इसी उत्सुकता ने मुझे आभाष कराया की***** इतनी गति इस ॐ में है और किसी मन्त्र में नहीं और यह सत्य है की जितनी गहराई में आप जाते जाएगे उतनाही डूबते जाएगे विचारो की चेतना और बढती जाएगी आप का अनुभव उतनाही छोटा होता चला जाएगा ! मे सोचने लगा की ये संत महात्मा हिमालय की इन कंधाराओ में क्यों जाते है शांति के लिए** नहीं ये ज्ञानी उन पहाड़ो की इन कंधाराओ में ॐ साधना के लिए जाते होगे ! पर जब अनुभव हुआ की पथ्वी में निरंतर इतनी गति से ही एक ॐ स्वर की उत्पति हो रही है मेरे को तो भोचक्का कर दिया यह बात सामान्य नहीं थी ! इसलिए मरी बेचेनी बढती गयी और मेने प्रियोग करने की ठानली और ॐ शब्द की इस रहेस्य में जदू में उलझता चला गया की**** संतो की इस रहेस्य में साधना का राज क्या है ! की उस एकांत में जहा पसु पक्षी मनव किसी का भी कोलाहल नहीं जहा मत्र गुप शांति ! मेरी भी चेतना विधुत की तरेह पकड़ की***और सोचने लगी की संतो की इस एकांत में साधना से जो ॐ की ध्वनी होती है वो सीदा उस गति से जुडती है जो निरंतर प्रथ्वी में इतनी तीव्र गति से उत्पन हो रही ध्वनि से जुडती है येही वो ॐ है जो साधना में ॐ के स्वर को इन पाच तत्वा रूपी प्रथ्वी मंडल में हो रहे घण-सड़ से उत्पन ॐ शब्द से जोडती है मे बार बार इस वाक्य को इसलिए लिख रहा हु की की इस जादुई साधना से सिर्फ पञ्च तत्व और उत्पन स्वर जो प्रथ्वी में हो रही गति में हो रहा है एक विज्ञानी सत्य है की २४ घंटे में जो पूरी प्रथ्वी वापस अपने स्थान पर आजाती है यह लगभग सभी जानते है पर इसी गतिसे कोई भी वास्तु या प्रदार्थ फेका जाये तो उसमे आग लग जाएगी और वोह प्रथ्वी के वायु मंडल में विलीन हो जायेगी ! यह बात बहुत कम लोग जानते है इशी उत्सुकता ने मुझे भी जानने पर मजबूर किया और मेने एक छोटा सा प्रयोग करने का फेसला किया आप सब भी कर सकते है ! यह प्रयोग*** अगर वायु की गति से कोई चीज उड़ाई जाए तो उसकी मशीनरी की ध्वनि होती है कोई वास्तु फेकी जा नहीं सकती इतनी रफ़्तार से पर एक चक्र को तो घुमाया जासकता है पर उतनी गतिसे भी नहीं आप सिर्फ एक साधरण चक्र जो बैस्किल का हो या कोई और चक्र जिसके घुमाने से उस वास्तु की ध्वनि न निकले को आप घुमाए आप देखेगे की जैसे ही आप का चक्र गति पकडेगा एक ध्वनि उत्पन होगी जाएगी क्यों *****अगर उस चक्र में उभरे हुए कुछ प्रदार्थ और जोड़ दिए जाये तो ध्वनि और बढ जायेगी ये ध्वनि लगभग ॐ स्वर से मिलती होगी बस इसी तरेह हमारी प्रथ्वी में होरही गति से उत्पन शब्द में ॐ ध्वनि हो रही है हम जब भी ॐ शब्द का उचारण करते है तो हम पचो तत्त्व के साथ प्रथ्वी में हो रही गति से जुड़ जाती है और शारीर में उर्जा का संचाजन होजाता है और पांचो तत्त्व से बना शारीर प्रकाश मए होने लगता है हम इशी उर्जा को योग के माध्यम से अपने शारीर में प्रवेश कराते है ! और प्रकृति रूप से हम स्वस्थ होने लगते है ! और प्रकृति द्वारा पञ्च तत्त्व का शारीर योग साधना द्वारा तेजोमे हो जाता है और ज्ञान का भण्डार आपके आत्मा में समाने लगता है ! और ब्रहम त्वात्व का ज्ञान हो जाता है ! और सामान्य बातो से परे हो जाता है ! ******अब ॐ का उचारण कैसे किया जाये ये भी अध्बुत है ! जब भी हम ॐ स्वर का उचारण करते है तो हमारा मेरु दंड बिलकुल सीधा होता है ! और स्वर तंत्र से नाभि तंत्र तक आप की स्वाश नली बिलकुल सीधि होती है जब आप ॐ स्वर प्रारंभ करते है तब आपकी शारीर में कम्पन मस्तिक्ष में नहीं न हीं ज्ञान चक्र में हो आप होटो के आकार से ये निर्धारण कर सकते है की की होटो की बनावट ऐसी हो की जब आप "ओ" स्वर निकले तब आपकी नाभि में सिर्फ कम्पन हो और धीरे धीरे "म " स्वर हो जाये तबतक आप के होटो की आकृति बंद हो चुकी होगी और आपके मूलाधार चक्र से कम्पन स्वता ही सहेस्त्रर्थ तक पहुच जाएगी ॐ शब्द एक ही है इसका पूरा पूरा ख्याल रखा जाये पर स्वर दो है वही ॐ खुले मुह से और अंत में बंद मुख तक ! शक्ति का संचार करे और आनंद उठाये ! और खुद ही अनुभव करे ! जय भारत वन्दे मातरम
प्रश्नों के उत्तर के लिए*** पीताम्बर :-09868420933