भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, आजाद हिन्द फौज के संस्थापक और महान देशभक्त सुभाषचंद्र बोस जी की 115 वीं जयंती 23 जनवरी 2012 को शत्-शत् नमन-- तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा --खून भी एक-दो बूंद नहीं, इतना कि खून का एक महासागर तैयार हो

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Om B

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Jan 22, 2012, 12:23:34 AM1/22/12
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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, आजाद हिन्द फौज के संस्थापक और
महान देशभक्त सुभाषचंद्र बोस जी की 115 वीं जयंती 23 जनवरी 2012 को शत्-
शत् नमन-- तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा --खून भी एक-दो बूंद
नहीं, इतना कि खून का एक महासागर तैयार हो जाए और मैं उसमें ब्रिटिश
साम्राज्य को डूबो दूं। ये बाते कही थी नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, आजाद हिन्द फौज के संस्थापक और जय
हिन्द का नारा देने वाले सुभाष चंद्र बोस (जन्म-23 जनवरी, 1897, कटक,
उड़ीसा) में हुआ।

सुभाषचंद्र बोस जी की इच्छा देश सेवा करने और अंग्रेजों के विरूद्व
संघर्ष करते हुए भारतमाता को स्वतंत्रा कराने की थी पर पिता के आदेश का
पालन करते हुए वे 15 सितम्बर 1919 को लंदन गए और वहा कैम्ब्रिज
विश्वविद्यालय में अध्धययन करने लगे। वहां से उन्होंने आई.सी.एस. की
परीक्षा उत्तीर्ण की और योग्यता सूची में चौथा स्थान प्राप्त किया। पर
उनके पूर्व निश्चय के अनुरूप 22 अप्रेल 1921 को उन्होने आई.सी.एस. से
त्याग पत्रा दे दिया।

आज सुभाषचंद्र बोस जी जन्मदिन पर रंगून में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण का
स्मरण आवश्यक है। उन्होंने कहा था, ''स्वतंत्रता संग्राम के मेरे
साथियों! स्वतंत्रता बलिदान चाहती है। आप ने आजादी के लिए बहुत त्याग किए
हैं, किंतु अपनी जान की आहुति अभी बाकी है। मैं आप सबसे एक चीज मांगता
हूं और वह है खून। दुश्मन ने हमारा जो खून बहाया है, उसका बदला सिर्फ खून
से ही चुकाया जा सकता है। इसलिए तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी
दूंगा। इस प्रतिज्ञा-पत्र पर साधारण स्याही से हस्ताक्षर नहीं करने है।
वे आगे आएं जिनकी नसों में भारतीयता का सच्चा खून बहता हो। जिसे अपने
प्राणों का मोह अपने देश की आजादी से ज्यादा न हो और जो आजादी के लिए
सर्वस्व त्याग करने के लिए तैयार हो।''

जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!
युधवीर सिंह लाम्बा भारतीय
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