“The Hindu Religious and Charitable Endowment Act of 1951” यानि “हिंदू धर्म और दान चढावा एक्ट-१९५१” बनाकर हिंदू मंदिरों और ट्रस्टों में हिन्दुओ के आस्था के चढावे के अकूत संपत्ति को सरकारी खजाने में भेजने का कानून बनाने वाले हमारे “प्रिय चाचू नेहरू” को जन्म दिन पर श्रद्धांजलि. इस कानून के अनुसार हिन्दुओ के चढावे पर सरकार का अधिकार और सरकार इसके अनुसार हिन्दुओ मंदिरों का मालिक और इसी वजह से किसी भी हिंदू मंदिर के समिति/ ट्रस्ट का उस जिले का कलक्टर पदेन अध्यक्ष होता है तथा दान की राशि का ८५% पैसा सरकारी खाते में चला जाता है जो मस्जिदों और चर्चो को दान कर दिया जाता है. सबसे मजे की बात है की यही व्यवस्था अन्य धर्मो जैसे इस्लाम और ईसाइयो पर एकदम से लागू नहीं किया गया है. यानि हिंदू धर्म के लोगो की चडावे को हिन्दुओ और उनके मंदिरों पर न खर्च करके इसे अन्यत्र खर्च किया जाता है जिसकी वजह से हिंदू मंदिरों की हालत दिन पर दिन खस्ता होती जा रही है. यह कानून १९५१ में भारत में हिंदू विरोधी प्रधानमंत्री नेहरू ने बनाया था और आम जनता से यह बात छुपाई जाती है और हमारी भांड मिडिया हिंदू हितों से जुड़े मुद्दे कभी सार्वजनिक बहस नहीं करती, उसे सिर्फ स्वामी राम देवजी, रविशंकर जी और बल्क्रिश्नाजी का दुष्प्रचार करना भर आता है.
हम यह जानना चाहते है की इसमे बीजेपी और मुलायम सिंह क्या कर रहे है. ५ साल के शासन में अडवानी ने इसे बदला क्यों नहीं जब की बिना मागे विदेशी नागरिकता कानून में ऐसे बदलाव चोरी चोरी अडवानी ने करवाए है की सोनिया को पीएम बनाने का रास्ता आसान हो गया, ये बात और है की जनता को यह मालूम नहीं है. नेहरू को तो १९५१मे यह करना ही था क्योकि कोई भी आज इसका ठोस प्रमाण नहीं दे पाया की नेहरू खानदान वास्तव में हिंदू ही थे, इस पर आज भी संसय है और नेहरू कश्मीरी ब्राहमण होते तो निश्चय ही ५ लाख कश्मीरी ब्राह्मण कश्मीर न छोडते.
जय भारत माता,
संजय कुमार मौर्य
अयोध्या, फैजाबाद